धूमधाम से दुर्गा पूजा मना रहा बांग्लादेश, पूरे देश में लगेंगे 30 हजार से ज्यादा पांडाल

असम की राजधानी गुवाहाटी में दुर्गा मूर्ति तैयार करता एक कलाकार. (AP Image)
असम की राजधानी गुवाहाटी में दुर्गा मूर्ति तैयार करता एक कलाकार. (AP Image)

बहुतायत मुस्लिम (Muslim Majority) आबादी वाले बांग्लादेश (Bangladesh) में दुर्गा पूजा (Durga Puja) किसी राष्ट्रीय महोत्सव सरीखी ही होती है. तकरीबन वैसी ही जैसी हम पश्चिम बंगाल में देखते हैं. इस बार भी पूरे देश में दुर्गा पूजा में 30 हजार से ज्यादा पांडाल लगाए जाएंगे.

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  • Last Updated: October 17, 2020, 5:55 AM IST
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नई दिल्ली. बंगाली पहचान के आधार पर पाकिस्तान (Pakistan) से अलग होने वाले बांग्लादेश (Bangladesh) में दुर्गा पूजा हर साल बेहद धूमधाम के साथ मनाई जाती है. बहुतायत मुस्लिम (Muslim Majority) आबादी वाले देश में दुर्गा पूजा (Durga Puja) किसी राष्ट्रीय महोत्सव सरीखी ही होती है. तकरीबन वैसी ही जैसी हम पश्चिम बंगाल में देखते हैं. इस बार भी पूरे देश में दुर्गा पूजा में 30 हजार से ज्यादा पांडाल लगाए जाएंगे.

कोरोना का असर, इस साल देश में करीब 11 सौ पांडाल कम लगेंगे
डीडी न्यूज पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद के महासचिव निर्मल कुमार चटर्जी ने बताया है कि इस साल देश में पांडालों की संख्या थोड़ी कम है. इसका कारण उन्होंने कोरोना महामारी को बताया है. निर्मल चटर्जी के मुताबिक इस साल देश में करीब 11 सौ पांडाल कम लगेंगे. लेकिन लोगों में दुर्गा पूजा को लेकर हर्षोल्लास है. कोरोना महामारी के बीच अपने सांस्कृतिक त्योहार को लेकर बांग्लादेशी हिंदू समुदाय तैयारी कर रहा है.

पांच दिन का शारदीय दुर्गोत्सव आगामी 22 अक्टूबर से शुरू होगा
अकेले राजधानी ढाका में 233 पूजा पांडाल लगाए जाएंगे. पांच दिन का शारदीय दुर्गोत्सव आगामी 22 अक्टूबर से शुरू होगा. इसी दिन महापंचमी होगी और उसी दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का अनावरण किया जाता है. 26 अक्टूबर देवी मूर्ति विसर्जन के साथ उत्सव का समापन किया जाएगा. कोरोना महामारी के तहत पांडालों में सोशल डिस्टेंसिंग और सैनेटाइजेशन संबंधी सभी दिशा-निर्देश फॉलो किए जाएंगे.



सरकार ने पूजा समिति के संचालकों को गाइडलाइंस फॉलो करने के निर्देश दिए
इस सप्ताह की शुरुआत में सरकार ने दुर्गा पूजा समिति के संचालकों को गाइडलाइंस का पालन करने के निर्देश दिए थे. पांडाल में मास्क पहनना अनिवार्य होगा. साथ ही हर पांडाल के पास सैनेटाइजर और हाथ धुलने की व्यवस्था की जाएगी. मूर्ति विसर्जन के दौरान भी नियमों का खयाल रखने की ताकीद की गई है.
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