पाकिस्तान से आ रहे इस खतरे के बाद कहीं बर्बाद ने हो जाए किसानों की मेहनत!

मानसून से पहले बारिश और तेज आंधी को देखते हुए भारत इस खतरे को लेकर चिंतित है.

News18Hindi
Updated: June 21, 2019, 10:43 AM IST
पाकिस्तान से आ रहे इस खतरे के बाद कहीं बर्बाद ने हो जाए किसानों की मेहनत!
मानसून से पहले बारिश और तेज आंधी को देखते हुए भारत इस खतरे को लेकर चिंतित है.
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Updated: June 21, 2019, 10:43 AM IST
पाकिस्तान की सीमा से सटे बाड़मेर में किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है. 26 साल बाद आ रहे इस खतरे से किसानों को काफी नुकसान हो सकता है. दरअसल पाकिस्तान की ओर से आ रहे टिड्डी दल के आतंक से हिंदुस्तान की परेशानी बढ़ सकती है. पाकिस्तान से सटे जिलों में टिड्डी के डर से किसानों की चिंता बढ़ रही है. वहीं इसको लेकर भारत का टिड्डी नियंत्रण संगठन सक्रिय हो गया है. भारतीय अधिकारियों ने इसको लेकर बुधवार को पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक कर इस संकट पर चर्चा की.

अंतरराष्ट्रीय सीमा स्थित मुनाबाव में चार घंटे से ज्यादा चली मैराथन बैठक में समस्या के रोकथाम पर साझा कार्रवाई की भी बात हुई. माना जा रहा है कि वर्ष 1993 के बाद यह सबसे बड़ा टिड्डी दल का हमला हो सकता है. भारतीय अधिकारियों की माने तो पाकिस्तान सीमा से सटे सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और लगातार इससे निपटने के लिए कार्रवाई की जा रही है.

पाकिस्तान में टिड्डी बेकाबू हो गई है

टिड्डी, पाकिस्तान के 4 राज्यों में से तीन में गुजर गई है जनता के भारी विरोध के बाद अब वहां हवाई जहाज से स्प्रे किया गया है. बाड़मेर से कुछ दूर पाकिस्तान के मीरपुर जिले के एयरपोर्ट पर जहाज तैनात किया गया है. भारत के मुनाबाव में बुधवार सुबह भारत-पाकिस्तान की टीडी नियंत्रण संगठन के अधिकारियों के मध्य इस विषय पर 4 घंटे तक वार्तालाप चली. पाकिस्तान के अधिकारियों ने भारत को आश्वासन दिया कि उन्होंने दस हजार हेक्टेयर में टिड्डी के खिलाफ कंट्रोल कार्यक्रम चला रखा है.

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वहीं मानसून से पहले बारिश और तेज आंधी को देखते हुए भारत भी चिंतित है. हवा की दिशा दशा अनुकूल मिलने पर टिड्डी फिर से राजस्थान की तरफ आ सकती है. भारत में टिड्डी को निपटने के लिए तैयारी कर रखी है. वर्ष 1993 के बाद यह सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है.

संभवतः यह पहला मौका था जब बैठक इतनी लंबी चली है. पाकिस्तान की टिड्डी सिंध प्रांत के थारपारकर जिला थार मरुस्थल क्षेत्र में पहुंच चुकी है. टिड्डी विभाग बाडमेर के सहायक निर्देशक महेश चंद्र ने कहा कि इस बैठक में भारत के वैज्ञानिकों के साथ ही तकनीक की जुड़े लोगों ने भाग लिया.
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First published: June 21, 2019, 10:43 AM IST
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