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बाटला हाउस केस: बवाल से लेकर कोर्ट के फैसले तक की पूरी कहानी

बटला हाउस ऑपरेशन को दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मोहनचंद्र शर्मा लीड कर रहे थे (फाइल फोटो)

बटला हाउस ऑपरेशन को दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मोहनचंद्र शर्मा लीड कर रहे थे (फाइल फोटो)

Batla House Encounter Case: दक्षिणी दिल्ली के जामिया नगर इलाके में 2008 में बाटला हाउस मुठभेड़ के दौरान दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के निरीक्षक शर्मा की हत्या कर दी गई थी. इस मुठभेड़ को लेकर देश भर में काफी हंगामा हुआ था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 15, 2021, 7:03 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने 2008 के बाटला हाउस मुठभेड़ मामले (Batla House Encounter Case) में इंडियन मुजाहिदीन (Indian Mujahideen) के आतंकी आरिज खान को मौत की सजा सुनाई है. खान को अदालत ने 8 मार्च को इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या का दोषी पाया गया था. आरिज खान पर देश में कई जगह बम धमाके करने का भी आरोप है. इन हमलों में 165 लोगों की जान चली गई थी. धमाकों के बाद आरिज भागकर नेपाल चला गया था और वहां नाम बदलकर छिपा हुआ था. दिल्ली के कई बड़े इलाकों में हुए बम धमाकों की जांच आगे बढ़ी. इसी क्रम में पुलिस ने दिल्ली के बाटला हाउस में छापा मारा था. यहां पुलिस और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई.

19 सितंबर 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में स्थित बाटला हाउस के एल-18 मकान में छिपे इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकियों और दिल्ली पुलिस की मुठभेड़ हुई थी. इस मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए जबकि दो आतंकी जिसमें आरिज खान भी था वहां से भागने में कामयाब हो गए थे. एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.

ये पूरा ऑपरेशन दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के नेतृत्व में हो रहा था. शर्मा को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट भी माना जाता था. उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान 35 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया था इसके साथ ही 80 से ज्यादा आतंकियों को गिरफ्तार भी किया था. इस मुठभेड़ में घायल इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आठ घंटे इलाज के बाद उनकी मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक शर्मा को पेट, जांघ और दाहिने हाथ में गोली लगी थी और उनकी मौत का कारण अत्यधिक खून बह जाना बताया गया था.



एनकाउंटर को बताया गया था फर्जी
इस एनकाउंटर के बाद देश भर में काफी हंगामा हुआ. शर्मा की मौत को लेकर देश भर तमाम जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए. तमाम नेताओं ने इस एनकाउंटर को फर्जी करार भी दिया था. राजनीतिक पार्टियों और मानवाधिकार संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने की भी मांग उठाई थी.

मई 2009 में दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से पुलिस के दावों की जांच करने के बाद दो महीने में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. एनएचआरसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में जुलाई 2009 में अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें कि दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दे दी.
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