'येदियुरप्पा ने एक हफ्ता मांगा, गवर्नर ने दे दिए 15 दिन', SC में कांग्रेस ने रखे ये तर्क

कांग्रेस राज्यपाल के फैसले के खिलाफ और येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने के लिए बुधवार देर रात की सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) ने पूरे मामले को लेकर तीन सदस्यीय बेंच बना दी है, जो इस केस की सुनवाई कर रही है.

News18Hindi
Updated: May 17, 2018, 5:04 AM IST
'येदियुरप्पा ने एक हफ्ता मांगा, गवर्नर ने दे दिए 15 दिन', SC में कांग्रेस ने रखे ये तर्क
अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस का पक्ष रखा
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Updated: May 17, 2018, 5:04 AM IST
कर्नाटक में किसकी सरकार बनेगी इसे लेकर राजनीतिक समीकरणों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं. बुधवार को कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दे दिया. जिसके बाद येदियुरप्पा के नए सीएम बनने का रास्ता भी साफ हो गया. गुरुवार को सुबह 9 बजे येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए उन्होंने 7 दिन का वक्त मांगा था, लेकिन हैरान करने वाली बात है कि राज्यपाल ने येदियुरप्पा को 'फ्लोर टेस्ट' यानी बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया है.

वहीं, कांग्रेस राज्यपाल के फैसले के खिलाफ और येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने के लिए बुधवार देर रात की सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है.

कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी पक्ष रख रहे हैं, जबकि अडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार यानी राज्यपाल का पक्ष से कोर्ट में मौजूद हैं. वहीं, बीजेपी की तरफ से मुकुल रोहतगी बोल रहे हैं. कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने की मांग की. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. बेंच ने कहा कि हम राज्यपाल का फैसला नहीं पलट सकते. कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर आगे सुनवाई होगी.

इससे पहले कांग्रेस और जेडीएस के नेताओं ने राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाकात की. जेडीएस और कांग्रेस ने राज्यपाल को 117 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा. इसमें 78 कांग्रेस, 37 जेडीएस, एक बसपा और एक निर्दलीय विधायक के साइन हैं.

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी ने दिए ये तर्क:-
>>अभिषेक मनु सिंघवी ने पूछा- 'हमारे पास 117 विधायक हैं, बीजेपी के पास केवल 104 विधायक. ऐसे में बीजेपी कैसे बहुमत साबित करेगी?
>>सिंघवी ने पूछा- 'येदियुरप्पा ने 7 दिन मांगे थे और राज्यपाल ने 15 दिन दे दिए. क्यों? ऐसा पहली बार देखा कि किसी दल को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाए'.
>>उन्होंने कहा-'गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन चुनाव बाद हुए गठबंधन के बाद बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिला. कर्नाटक के केस में चीजें क्यों बदल गई? नियम क्यों बदले जा रहें?'
>> कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पूछा- 'जेडीएस ने बहुमत के सबूत के साथ सरकार बनाने का दावा भी कर दिया था. फिर राज्यपाल ने इंतजार क्यों नहीं किया? येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता देना का फैसला इतनी जल्दी कैसे ले लिया?
>>उन्होंने कहा- 'स्पष्ट बहुमत न होने की स्थिति में सरकारिया कमीशन और रामेश्वर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसले में भी पहले बहुमत वाले दल को प्राथमिकता दे. ऐसा न हो तो चुनाव पूर्व गठबंधन या चुनाव पश्चात गठबंधन को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए.
>>सिंघवी ने कहा- 'शपथ ग्रहण को रोकें, इससे राज्यपाल के आदेश में हस्तक्षेप नहीं होगा.'
>>सिंघवी ने कहा- 'अगर यह कोर्ट संविधान की धारा 356 के तहत राष्ट्रपति शासन को रोक सकता है, तो राज्यपाल के आदेश को क्यों नहीं रोक सकता?'
>>उन्होंने कहा- 'राज्यपाल के विशेषधिकार भी ज्यूडिशियल रिव्यू के दायरे में आते हैं.'
>>सिंघवी ने कहा- 'कर्नाटक में शपथ ग्रहण कल के बजाय परसों भी तो हो सकता है. इससे कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा.'
>>उन्होंने कहा, 'आप मेरिट पर फैसला करें. देश की सबसे बड़ी अदालत के तीन जज रात के दो बजे से ये अहम मामला सुन रहे हैं. लोकतंत्र निश्चिंत है.'

मुकुल रोहतगी ने दिए ये तर्क
>>मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल के पास सबसे बड़े दल को बुलाने का अधिकार है, अगर सबसे बड़ी पार्टी बहुमत साबित नहीं बना सकी तो दूसरी पार्टी को मौका मिलेगा.
>>मुकुल रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल को पार्टी नहीं बनाया जा सकता है.
>>रोहतगी ने कहा, 'इस देश में राष्ट्रपति और राज्यपाल के आदेश देने के अधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती. आदेश को चुनौती दी जा सकती है. पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने याचिका खारिज करने की मांग की.'

बता दें कि कर्नाटक में 222 सीटों पर शनिवार को वोटिंग हुई थी. सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 112 है. बीजेपी के पास सिर्फ 104 विधायक हैं. कांग्रेस के 78 और जेडीएश के 37. जेडीएस और कांग्रेस ने गठजोड़ कर लिया है.
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