HRD मंत्री की डिग्रियों में अलग जन्मतिथियों पर विवाद! पोखरियाल ने दी ये सफाई

HRD मंत्री की डिग्रियों में अलग जन्मतिथियों पर विवाद! पोखरियाल ने दी ये सफाई
रमेश पोखरियाल. फाइल फोटो.

ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने जो डिग्रियां मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल के नाम जारी की हैं, उनमें उनकी दो अलग अलग जन्मतिथियां होने का मामला विवाद में तब्दील हो गया है. इससे पहले भी उनकी शैक्षणिक योग्यता पर आरोप लगे हैं.

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मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल अपनी दो अलग जन्मतिथियों को लेकर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. पोखरियाल ने दो अलग जन्म​तिथियों से जुड़े विवाद को लेकर यह स्पष्टीकरण दिया है कि हिंदू पंचांग के हिसाब से और स्कूली सर्टिफिकेट में जन्मतिथियों में फर्क रहा. ये विवाद तब सामने आया जब ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने उनके नाम जो डिग्रियां जारी कीं और उनके सीवी व उनके पासपोर्ट में दो अलग जन्मतिथियों का दर्ज होना पाया गया.

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हाल में मंत्री पद संभालने वाले पोखरियाल के सीवी के मुताबिक उनकी जन्मतिथि 15 अगस्त 1959 है, जबकि उनके पासपोर्ट में उनकी जन्मतिथि 15 जुलाई 1959 दर्ज है. दोनों तारीखों में एक महीने का अंतर है. मानव संसाधन विकास मंत्री का पद संभालने के सिर्फ एक ही दिन बाद उन पर ये आरोप लगे हैं. इस बारे में मीडिया से बात करते हुए पोखरियाल ने कहा कि दो जन्मतिथियों के दर्ज होने का कारण हिंदी पंचांग रहा है लेकिन उन्होंने कभी इस बात का फायदा नहीं उठाया.



मानद डिग्रियों से पैदा हुए विवाद को लेकर पोखरियाल ने एक समाचार पोर्टल लाइव हिंदुस्तान डॉट कॉम को बताया कि उन्हें ये डिग्रियां प्रदान की गई हैं इसलिए उन्होंने इन्हें छुपाना ठीक नहीं समझा. हालांकि, ये पहली बार नहीं है कि जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके पोखरियाल के शैक्षणिक दस्तावेज़ों को लेकर कोई बहस हुई हो. पहले भी, 2009 में जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला था, तब भी उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल खड़े किए गए थे.



उस समय हुई जांच पड़ताल में पाया गया था कि पोखरियाल की दो डिग्रियां फर्ज़ी थीं जो कि एक गैर पंजीकृत यूनिवर्सिटी से जारी की गई थीं. 90 के दशक में साहित्य में योगदान के लिए उन्हें श्रीलंका की एक ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने डीलिट की उपाधि प्रदान की थी. इसके साथ ही, विज्ञान में उनके योगदान के लिए भी ओआईयू ने एक और डीलिट की डिग्री प्रदान की थी.

अहम ये है कि ये यूनिवर्सिटी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है और न ही ये यूजीसी के दायरे में आती है. उस समय कांग्रेस नेता हरक सिंह ने इन डिग्रियों को लेकर पोखरियाल पर सवाल उठाए थे. बवाल होने के बाद श्रीलंका ​की यूजीसी ने मीडिया से कहा था कि 'ओआईयू ऐसी उच्च शैक्षणिक संस्था नहीं है, जो यूजीसी या श्रीलंका के यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत आती हो इसलिए यूजीसी इस तरह की यूनिवर्सिटी से जारी की गई डिग्रियों को लेकर कोई बयान देने की स्थिति में नहीं है'.

उल्लेखनीय ये भी है कि पिछली मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री रह चुकीं स्मृति ईरानी पर भी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवालिया निशान और आरोप लगते रहे थे. बाद में, उनके स्थान पर प्रकाश जावड़ेकर को यह मंत्रालय सौंप दिया गया था.

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