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  • BEFORE FORWARDING MESSAGES ON SOCIAL MEDIA THE HELP OF CORONA PATIENTS MUST BE VERIFIED

Cyber fraud news- साइबर क्रिमिनल्‍स के हो सकते हैं ऑक्‍सीजन, बेड, दवाओं की उपलब्‍धता वाले मैसेज, ठगी से ऐसे बचें

मैसेज फारवर्ड करने से पहले वेरीफाई जरूर कर लें.

कोरोना मरीजों के इलाज में जरूरी उपकरण और दवाओं की उपलब्‍धता वाले मैसेज सोशल मीडिया में फॉरवर्ड करने से पहले वेरीफाई जरूर कर लें, ये मैसेज साइबर ठगों के भी हो सकते हैं.

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नई दिल्‍ली. आजकल सोशल मीडिया (Social Media) में ऑक्‍सीजन सिलेंडर, बेड, दवाओं व कोरोना मरीजों (corona patients) के लिए जरूरी अन्‍य उपकरण की उपलब्‍धता वाले तमाम मैसेज (massage) फॉरवर्ड किए जा रहे हैं. आम लोग मरीजों की मदद की इच्‍छा रखते हुए ऐसे मैसेज एक से दूसरे ग्रुप में फॉरवर्ड करते हैं, लेकिन इन्‍हीं मैसेज से कुछ मरीज साइबर क्रिमिनल्‍स (cyber criminals) के चंगुल में फंस रहे हैं. इस तरह ठगे (fraud) जाने के मामले साइबर एक्‍सपर्ट (Cyber ​​Expert) के पास पहुंच रहे हैं. साइबर एक्‍सपर्ट ने बताया कि ठगों द्वारा भेजे जा रहे मैसेज से आम लोग कैसे बच सकते हैं.

साइबर क्राइम एक्‍सपर्ट और साइबरोप्‍स इनफोसेक के सीईओ मुकेश चौधरी बताते हैं कि छोटे शहरो से लेकर बड़े शहरों में लोग कोरोना मरीजों की मदद के लिए व्‍हाट्सअप ग्रुप बना मैसेज फॉरवर्ड कर रहे हैं, इसके अलावा सोशल मीडिया के कई अन्‍य प्‍लेटफार्म में भी इसी तरह के मैसेज चलाए जा रहे हैं. वे बताते हैं कि इसका पूरा फायदा साइबर क्रिमिनल्‍स उठा रहे हैं. इनमें से कई मैसेज तो वाकई मदद के लिए संस्‍थाओं या सामाजिक संगठन के होते हैं लेकिन कुछ मैसेज साइबर क्रिमिनल्‍स होते हैं. सामान्‍यत: लोग बगैर वेरीफाइ किए तुरंत कॉपी पेस्‍ट कर दूसरे ग्रुप में मैसेज डाल देते हैं. लोग मदद लेने के लिए फोन करते हैं लेकिन कुछ फोन साइबर क्रिमिनल्‍स के पास पहुंच जाता है और लोग चंंगुल में फंस जाते हैं.

मुकेश चौधरी बताते हैं कि साइबर क्रिमिनल्‍स के चंगुल से बचने के लिए जरूरी है कि इस तरह के किसी भी मैसेज को फॉरवर्ड करने से पहले स्‍वयं वेरीफाई कर करें. इसका पहला तरीका है ट्रू कॉलर में जाकर आप देखें कि नंबर किस शहर या राज्‍य का है. मसलन आपको मदद दिल्‍ली में चाहिए और फॉवर्डेड मैसेज राजस्‍थान का है तो आपके किसी काम का नहीं है.

वहीं, कुछ जगह के नंबर संदिग्‍ध हो सकते हैं. इन्‍हें  आसानी से पहचाना जा सकता है. जिन शहरों की सीमा दूसरे राज्‍य से जुड़ी है, वहां के नंबरों को वेरीफाई जरूर करना चाहिए. मसलन राजस्‍थान में भरतपुर और अल्‍वर, हरियाणा में मेवात, उत्‍तर  प्रदेश में नोएडा व गाजियाबाद, पश्चिम बंगाल और  झारखंड के बार्डर के शहरों के नंबरों से सावधान रहें. इसके अलावा संभव हो तो एक बार फिजिकली करा लें, इसके बाद फॉरवर्ड करें. इस तरह साइबर क्रिमिनल्‍स के चंगुल में फंसने से बचाया जा सकता है.