पीएम मोदी के साथ बैठक से पहले कश्मीर में बढ़ी हलचल, एजेंडे को लेकर रणनीति बना रहीं पार्टियां

जम्‍मू-कश्‍मीर की राजनीतिक पार्टियों में हलचल तेज हो गई है. (फाइल फोटो: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के साथ होने वाली बैठक को लेकर जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu Kashmir) की मुख्‍य पार्टियों को औपचारिक निमंत्रण तो नहीं भेजे गए थे, लेकिन अधिकांश की पुष्टि गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने की थी.

  • Share this:
    नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की अध्‍यक्षता में 24 जून को दिल्ली में होने वाली जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के राजनीतिक दलों के एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है. अगस्‍त 2019 में जम्‍मू कश्‍मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 और 35A को निरस्‍त और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के बाद से पहली बार प्रधानमंत्री मोदी बातचीत की नींव रखने जा रहे हैं.

    बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी बैठक का एजेंडा तैयार कर रहे हैं. पीएम मोदी के साथ होने वाली बैठक को लेकर जम्‍मू-कश्‍मीर की मुख्‍य पार्टियों को औपचारिक निमंत्रण तो नहीं भेजे गए थे, लेकिन अधिकांश की पुष्टि गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने की थी.

    महबूबा मुफ्ती के चाचा सरताज मदनी को रिहा किया गया
    शुक्रवार की देर शाम जब अचानक बैठक की खबरें सामने आईं तो पता चला चला कि गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल नियमित रूप से पार्टियों तक पहुंच कर इस दिशा में काम कर रहे हैं. बैठक को देखते हुए शनिवार को पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के चाचा सरताज मदनी को रिहा कर दिया गया. मुफ्ती पार्टी की युवा शाखा के प्रमुख वहीद पारा की रिहाई के लिए भी जोर दे रही हैं. यहां तक ​​​​कि जब पार्टियों ने कहा कि वे बैठक में भाग लेने का फैसला वरिष्‍ठ नेताओं से परामर्श के बाद लेंगे तो इस बात का संकेत स्‍पष्‍ट हो गया कि वे बैठक में आने के इच्‍छुक है क्‍यों‍कि वे सभी नई दिल्ली के साथ राजनीतिक जुड़ाव की बहाली के पक्षधर हैं.

    इसे भी पढ़ें :- जम्मू-कश्मीर में कुछ पक रहा है! विभाजन की अफवाहों के बीच 6 महीनों बाद मिला गुपकर गठबंधन

    बैठक में परिसीमन को लेकर हो सकती है चर्चा
    बैठक को लेकर जिस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं उनमें परिसीमन पर चर्चा सबसे ऊपर दिखाई पड़ती है. हालांकि केंद्र शासित प्रदेश को राज्‍य का दर्जा दिए जाने को लेकर भी चर्चा जोरों पर हैं. इस मसले पर कुछ नेताओं का कहना है कि राज्‍य का दर्जा दिए जाने की बात करना अभी जल्‍दबाजी होगी. बता दें कि बैठक से ठीक पहले परिसीमन आयोग द्वारा केंद्र शासित प्रदेश के 20 जिला आयुक्‍तों से कई तरह की जानकारी मांगी जा चुकी है. बता दें कि परिसीमन आयोग का गठन फरवरी 2020 में किया गया था और इसे इस साल मार्च में एक साल का विस्तार दिया गया है. परिसीमन आयोग को विधानसभा और संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं को चित्रित करने का काम सौंपा गया है. बता दें कि अगर जम्‍मू-कश्‍मीर में विधानसभा चुनाव कराने हैं तो इन सभी प्रक्रिया को पूरा करना आवश्‍यक होगा.

    इसे भी पढ़ें :- PM मोदी की उच्च स्तरीय बैठक के लिए फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को भेजा गया न्योता

    जम्‍मू-कश्‍मीर के राजनीतिक दलों ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया 
    हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स को मिली जानकारी के मुताबिक 24 जून की बैठक इस प्रक्रिया में केंद्रशासित प्रदेश के राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए है. आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक को लेकर अभी तक जम्‍मू-कश्‍मीर के राजनीतिक दलों ने कोई जवाब नहीं दिया है. आर्टिकल 370 हटाए जाने का विरोध कर रहे राजनीतिक दलों ने कहा कि वह इसके लिए सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकायों से परामर्श करेंगे. बता दें कि शनिवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं को बैठक में आमंत्रित करने के लिए फोन किया था. नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी (जेकेएपी) के अल्ताफ बुखारी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन समेत 14 नेताओं को बैठक में शामिल होने का न्‍योता भेजा गया है.

    इसे भी पढ़ें :- जम्मू कश्मीर के नेताओं की पीएम मोदी ने बुलाई बैठक, जानें क्या बोले बीजेपी नेता

    केंद्र के साथ सार्थक जुड़ाव के लिए अपने दरवाजे कभी बंद नहीं किए
    माकपा नेता और पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डिक्लेरेशन (पीएजीडी) के प्रवक्ता एम वाई तारिगामी ने कहा कि हमें नहीं पता कि एजेंडा क्या है या नई दिल्ली क्या बताना चाहती है. 2019 में विधानसभा को एकतरफा भंग कर दिया गया और राज्य का विशेष दर्जा भी वापस ले लिया गया. हमने केंद्र के साथ सार्थक जुड़ाव के लिए अपने दरवाजे कभी बंद नहीं किए हैं.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.