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सरकार-किसानों के बीच नौवें दौर की वार्ता कल, कृषि मंत्री ने जताई सकारात्मक चर्चा की उम्मीद

केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने अगली बैठक में सकारात्मक वार्ता होने और समाधान निकलने की उम्मीद जतायी. (File pic)
केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने अगली बैठक में सकारात्मक वार्ता होने और समाधान निकलने की उम्मीद जतायी. (File pic)

Farm Laws: सरकार और किसान यूनियन के प्रतिनिधियों के बीच आठ दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं. दोनों ही पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं. तोमर ने किसानों से यह स्पष्ट किया था कि सरकार, कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 3:33 PM IST
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नई दिल्ली. किसान यूनियनों (Farmer Unions) के साथ नौवें दौर की वार्ता की केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने पुष्टि की है. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि इसमें लागू हुए नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के बारे में सकारात्मक चर्चा होगी.कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार गुरुवार को कहा कि किसान यूनियनों के साथ शुक्रवार को होने वाली नौवें दौर की बातचीत सकारात्मक होने की उम्मीद है. मंत्री ने सरकार के रुख को दोहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसान नेताओं के साथ खुले दिमाग से बातचीत करने के लिए तैयार हैं.

इधर किसान यूनियन ने भी कहा है कि वे शुक्रवार को निर्धारित बातचीत में हिस्सा लेंगे. उन्‍होंने कहा कि बातचीत जरूरी है ताकि इस गतिरोध का हल और आंदोलन खत्म किया जा सके. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि "देखते हैं, कल क्या होता है. हमारी बैठकें सरकार के साथ तब तक जारी रहेंगी, जब तक हमारा विरोध खत्म नहीं होता. हम सरकार के साथ बैठकों का विरोध नहीं करेंगे."

गौरतलब है कि सरकार और किसान यूनियन के प्रतिनिधियों के बीच आठ दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं. दोनों ही पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं. तोमर ने किसानों से यह स्पष्ट किया था कि सरकार, कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करेगी. किसानों से उन्होंने कानूनों के लिए एक विकल्प सुझाने को कहा था. वहीं, किसानों ने कहा कि वे तब तक अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे, जब तक कि सरकार तीनों कानून वापस न ले ले. उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत खरीद की प्रणाली के अप्रभावित रहने की कानूनी गारंटी भी मांगी है.




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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है कानूनों पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी और सरकार और किसानों के बीच के तनाव को समाप्त करने के लिए 4 सदस्य समिति के गठन का आदेश दिया था. किसान नवंबर के अंत से नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली के पास प्रदर्शन कर रहे हैं. ये कानून हैं : 'कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020', 'कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020', और 'आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक, 2020'. इन कानूनों के खिलाफ कई याचिकाएं प्रस्तुत की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसान यूनियन के प्रतिनिधि ने कहा था कि वे नहीं चाहते कि 4 सदस्य समिति कृषि कानूनों पर सरकार के रुख का हवाला देते हुए मुद्दों का हल करें. उन्होंने कहा था कि समिति के साथ चर्चा करने से कोई परिणाम नहीं निकलेगा, यदि सरकार कानूनों को रद्द नहीं करने पर अडिग रहती है.  किसान यूनियन का मानना है कि ये कानून बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कृषि क्षेत्र में प्रवेश करने और मुनाफा कमाने की अनुमति देते हैं. उनका मानना है कि ये कानून एमएसपी प्रणाली के तहत फसल की सरकारी खरीद को भी प्रभावित करेंगे.
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