कांग्रेस में पर्दे के पीछे छिड़ी 'पुराने बनाम नये' की लड़ाई, ऐसे शुरू हुई खींचतान

कांग्रेस में पर्दे के पीछे छिड़ी 'पुराने बनाम नये' की लड़ाई, ऐसे शुरू हुई खींचतान
राजीव सातव और कपिल सिब्बल की फाइल फोटो

कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चीजें जस की तस रहें और वे अपना प्रभाव जारी रख सकें. लेकिन टीम राहुल (Team Rahul Gandhi) अब अपने समय का इंतजार करने को तैयार नहीं है. वे चाहते हैं कि अब बदलाव आए. अब सभी की निगाहें सोमवार की सीडब्ल्यूसी (CWC) की मीटिंग पर हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 24, 2020, 7:14 AM IST
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(पल्लवी घोष)

नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) के भीतर नई उथल-पुथल (Latest Turmoil in Congress) के केंद्र में वही 'पुराने बनाम नये' (Old Vs New) की लड़ाई है. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के साथ राज्यसभा सांसदों की बैठक के बाद यह कहानी शुरू हुई. युवा राजीव सातव (Rajiv Satav), जो राहुल गांधी का करीबी माने जाते हैं, ने वरिष्ठों पर हमला करते हुए कहा कि यूपीए (UPA) के मंत्री पार्टी को गर्त में ले गये और चुनावी नुकसान पहुंचाया. बैठक में मौजूद जूनियर गांधी और उनकी बहन प्रियंका वाड्रा (Priyanka Vadra) के करीबी कई युवा लोगों ने भी इसी तरह की बातें कहीं और इन बातों का समर्थन किया. इस दौरान यह इशारा किया गया कि 2019 के लोकसभा चुनावों (Lok Sabha Elections) के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने राहुल का पर्याप्त समर्थन नहीं किया था.

राजीव सातव (Rajiv Satav) को स्पष्टीकरण जारी करने के लिए मजबूर किया गया था, लेकिन इस पर बहुत ही कटु प्रतिक्रिया आई. कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) और कई वरिष्ठों ने आपत्ति जताई और सातव और युवा नेताओं के समूह (Group of Young Leaders) पर कटाक्ष किया. यहीं से कुछ वरिष्ठों को समस्या होनी शुरू हुई और उनके रणनीति बनाने की भी शुरुआत हुई.



कई वरिष्ठ इस प्रकरण को लेकर थे परेशान
कांग्रेस में आनंद शर्मा, भूपिंदर हुड्डा और कपिल सिब्बल सहित चार वरिष्ठ नेता परेशान थे और पार्टी में बदलाव चाहते थे. जो बात उन्हें ज्यादा परेशान कर रही थी, वह यह थी कि युवा उन्हें पीछे छोड़ रहे थे और उन्हें बाहर निकालने के लिए तैयार थे. इसलिए, सोनिया गांधी को लिखे एक पत्र में, कई कांग्रेस नेताओं ने लिखा कि एक निर्णायक नेता और किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता थी जो 24x7 जमीन पर रहे. नेताओं ने इस तथ्य पर अफसोस जताया कि राज्य की इकाइयां कमजोर हैं, कोई चुनाव नहीं कराए जा रहे और भाजपा से लड़ने में संगठन सक्षम नहीं है.

इस पत्र के पीछे का मास्टरमाइंड तब कई अन्य लोगों के संपर्क में आया और सूत्रों का कहना है कि उसने लगभग 303 लोगों के हस्ताक्षर ले लिये, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता और राज्य के नेता और कुछ पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. जब News18 ने वीरप्पा मोइली से संपर्क किया, जो पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक हैं, तो उन्होंने कहा, "यह पार्टी का आंतरिक मामला है और मैं इसे बाहर नहीं उठाना चाहता."

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'पूर्व नियोजित है मामला, वरिष्ठ चाहते कि बने रहें प्रभावी'
एक सूत्र ने कहा, "यह सब पूर्व नियोजित है." एक बार फिर से पार्टी के सीनियर नेताओं को लगा कि उन्हें आसानी से बाहर किया जा सकता है, और इसलिए उन्होंने इस मुद्दे को सोनिया के नेतृत्व पर सवाल की तरह पेश करने की कोशिश की. इस तरह से वे सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चीजें यथास्थिति में रहें और बड़े अपना प्रभाव जारी रख सकें. लेकिन फिर युवा और टीम राहुल अब अपने समय का इंतजार करने को तैयार नहीं हैं. वे चाहते हैं कि अब बदलाव आए. अब सभी की निगाहें सोमवार की सीडब्ल्यूसी की मीटिंग पर हैं.
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