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OPINION: पाकिस्तान को लेकर भारत का 'रक्षात्मक' रवैया ही है सबसे बड़ी समस्या!

OPINION: पाकिस्तान को लेकर भारत का 'रक्षात्मक' रवैया ही है सबसे बड़ी समस्या!

जम्मू में कर्फ्यू के दौरान गुज्जर नगर में तैनात जवान

जम्मू में कर्फ्यू के दौरान गुज्जर नगर में तैनात जवान

बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार पुलवामा हमले का बदला राजनीतिक या डिप्लोमेटिक तरीके से लेगी या सेना की मदद लेगी. अगर मोदी सरकार सेना की मदद लेती है तो इसके क्या परिणाम होंगे? इमरान खान की चेतावनी का क्या होगा?

  • News18.com
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    विवेक काटजू
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पुलवामा हमले के पांच दिन बाद नेशनल टीवी पर भारत को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने न ही इस घटना की आलोचना की और न ही शहीद हुए जवानों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की.

    पुलवामा हमले के एक हफ्ते बाद भी पीएम मोदी ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि पाकिस्तान से किस तरह से बदला लिया जाएगा. विपक्षी पार्टियां सरकार के साथ खड़ी हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट करना होगा कि वह पाकिस्तान के खिलाफ क्या कार्रवाई करने जा रहे हैं.

    इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने को लेकर अभी तक भारत ने डिप्लोमेटिक रास्ता अपनाया है. 2016 में उरी हमले के पहले भी भारत डप्लोमेटिक रास्ता ही अपनाता रहा है. हालांकि, उरी के बाद पीएम मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक करने की इजाज़त सेना को दे दी थी.

    ये भी पढ़ें: पाकिस्‍तान की भारत को धमकी: हमें छेड़े नहीं, हमारे पास जंग जीतने वाली फौज है
    अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार पुलवामा हमले का बदला राजनीतिक या डिप्लोमेटिक तरीके से लेगी या सेना की मदद लेगी. अगर मोदी सरकार सेना की मदद लेती है तो इसके क्या परिणाम होंगे? इमरान खान की चेतावनी का क्या होगा?

    हालांकि, पाकिस्तान हमेशा भारत को इस बात की धमकी देता रहा है कि अगर भारत उसके खिलाफ सेना का इस्तेमाल करेगा तो वह परमाणु हथियारों का प्रयोग कर सकता है. उरी हमले के बाद भारत ने जो सर्जिकल स्ट्राइक की थी उसने पाकिस्तान की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया. भले ही पाकिस्तान अपनी जनता के सामने मना करता रहा कि भारत की तरफ से कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई.

    पाकिस्तान की मंशा हमेशा यही रही है कि आतंकवादी हमलों के बाद भारत को कमजोर कर दिया जाए. दुनिया के दूसरे देश भी नहीं चाहते कि परमाणु हथियार रखने वाले दो देश आपस में लड़ें. इसीलिए अमेरिका सहित दूसरे देश सांत्वाना देकर भारत के गुस्से को शांत करने की कोशिश करते रहते हैं.

    जरूरत इस बात की है कि भारत दुनिया को इस बात का संदेश दे कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को दी जाने वाली सहायता बंद की जानी चाहिए. लेकिन वास्तविक समस्या ये है कि पाकिस्तान द्वारा की जाने वाली आतंकवादी घटनाओं को लेकर हम हमेशा रक्षात्मक यानी 'डिफेंसिव' रहे हैं जिसकी वजह से हमेशा हम नुकसान झेलते रहे हैं.

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    भारतीय रणनीतिकारों का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से किए जाने वाला आतंकवादी हमले को डिप्लोमेटिक तरीके से नहीं सुलझाया जा सकता. हालांकि, लोकसभा चुनाव के तुरंत पहले हुए इस आतंकवादी हमले में मोदी के ऊपर लोगों के गुस्से को शांत करने की ज़िम्मेदारी कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई थी. भारतीय सुरक्षा के मद्देनज़र पाकिस्तानी आतंकवाद को खत्म करने के लिए रणनीतिकारों को लंबी प्लानिंग करनी होगी.


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    (विवेक काटजू पूर्व भारतीय डिप्लोमेट हैं जिन्होंने विदेश मंत्रालय के सचिव के रूप में काम किया है.)

    Tags: Jaish e mohammad, Pakistan, Pulwama attack, Terrorism, Terrorist attack

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