नेशनल कमीशन फॉर अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स बिल दोनों सदनों में पास, जानें इससे क्‍या होंगे फायदे?

National Commission for Allied and Healthcare Professions bill : बिल पास होने से अलाइड एंड हेल्‍थ केयर प्रोफेशनल्‍स, जिनमें 56 कैटेगरी आती हैं, के प्रोफेशनल एजुकेशन स्‍टैंडर्ड में सुधार होगा. (Image used for representation: Reuters)

National Commission for Allied and Healthcare Professions bill : बिल पास होने से अलाइड एंड हेल्‍थ केयर प्रोफेशनल्‍स, जिनमें 56 कैटेगरी आती हैं, के प्रोफेशनल एजुकेशन स्‍टैंडर्ड में सुधार होगा. (Image used for representation: Reuters)

इस क़ानूनी संस्था के स्थापित होने पर देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की शिक्षा व सेवाओं की व्यवस्था में व्यापक सुधारों की उम्मीद है. इसके अतिरिक्त इनके पंजीकरण होने से प्रस्तावित स्वास्थ्य की सभी ढांचागत योजनाओं में इनकी जरुरत, कमी व संख्या आदि का अनुमान भी सही सही लगाया जा सकेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 25, 2021, 1:29 PM IST
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नई दिल्‍ली : नेशनल कमीशन फॉर अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स बिल-2021 लोकसभा व राज्यसभा में पास होने पर अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की अनेक एसोसिएशनों के राष्ट्रीय महासंघ जॉइंट फोरम ऑफ़ मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट्स ऑफ़ इंडिया (JFMTI) ने खुशी जाहिर की है. लंबे समय से इस बिल के लिए संघर्षरत JFMTI ने बिल के दोनों सदनों में पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन एवं सभी संसद सदस्‍यों का आभार जाहिर किया है.

JFMTI केंद्र व राज्य सरकारों के अधीन सभी महत्वपूर्ण सरकारी एवं प्राइवेट स्वास्थ्य संस्थानों की विभिन व्यवसायों जैसे मेडिकल लैब साइंसेज, रेडियोलोजी टेक्नोलॉजी, रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी, डायलिसिस टेक्नोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी से जुड़े लाखों अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का राष्ट्रीय प्रतिनिधि संगठन है, जोकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी संगठन सदस्य है. वह 2008 में अपनी शुरुआत से ही इस कानून के लिए मांग करता रहा है .

संगठन के महासचिव कप्‍तान सिंह सहरावत कहते हैं कि बीमारियों के निदान एवं इलाज में एवं मेडिकल साइंस की अद्भुत उन्नति में अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स का अहम योगदान रहा है और इस कारण से दुनिया भर के छोटे-बड़े बहुत से देशों द्वारा इनके महत्व को समझते हुए इस प्रोफेशन एवं प्रोफेशनल्स के विकास के लिए सुव्यवस्थित क़ानूनी ढांचा स्थापित किया गया, लेकिन भारत में स्वास्थ्य के इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र एवं इससे जुड़े लाखों प्रोफेशनल्स के प्रति लगातार अनदेखी की गई. आजादी के 74 साल बीत जाने के बावजूद देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले इन लाखों प्रोफेशनल्स की व्यवसायिक शिक्षा व्यवस्था एवं सेवाओं के नियमन के लिए कोई व्यापक केंद्रीय कानून/संस्था/कौंसिल मौजूद नहीं थी.

सेंट्रल काउंसिल के न होने से थीं ये दिक्‍कतें...
उनका कहना है कि इस विषय में कोई भी केंद्रीय कानून या संस्था के न होने से पूरे देश में हजारों शिक्षण संस्थान बेलगाम तरीके से खोले जा रहे थे, जिन्हें व्यवसाय के तौर पर केवल मुनाफा कमाने के लिए खोला जाता था और जिनके पास किसी भी तरह की आधारभूत सुविधाएं नहीं होती थीं. आवश्यक कानून के न होने से सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में कार्यरत प्रोफेशनल्स के लिए भी अनेक समस्याएं थीं, जैसे कि आवश्यक व्यवसायिक शिक्षा योग्यता होने के बावजूद भी कार्य के अधिकार (लाइसेंस) से वंचित होना एवं सरकारी संस्थानों में समान कार्य के लिए अलग-अलग विभागों में अलग-अलग पदों, वेतन, भत्तों व भर्ती नियमों एवं सेवा शर्तों का होना आदि. सेंट्रल काउंसिल के न होने से जहां एक तरफ अनेक अप्रशिक्षित लोगों का शिक्षा व्यवस्था एवं प्रयोगशाला सेवाओं में व्यवसायिक अधिपत्य है, वहीं दूसरी तरफ बहुत ही शिक्षित एवं प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स भी अपने कार्य के अधिकार से वंचित थे.

अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की शिक्षा व सेवा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की उम्मीद 

सहरावत ने बताया क‍ि पिछली सरकारों की इस विषय के प्रति लगातार अनदेखी, असंवेदनशीलता की वजह से सेंट्रल पैरामैडिकल काउंसिल बनाने का प्रयास विफल रहा. सेंट्रल पैरामैडिकल बिल 2007 को केंद्र सरकार ने पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ही संस्था NCHRH बनाने की नई योजना के नाम पर रोक दिया था और तीन साल से अधिक की बहस के बाद NCHRH बिल 2011 को भी संसदीय समिति द्वारा सिरे से नकार दिया गया. अंतत: लाखों अलाइड हेल्थ साइंसेज कर्मियों की शिक्षा व्यवस्था एवं व्यवसायिक नियमन के लिए सालों पुरानी मांग फिर अधर में लटक गई थी. इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2014 में नेशनल बोर्ड फॉर अलाइड हेल्थ साइंसेज को बनाने का निर्णय लिया था, जो प्रशासनिक कारणों के चलते आगे नहीं बढाया जा सका. इसके बाद 2015 में फिर से अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स काउंसिल ड्राफ्ट बिल पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने संबंधित कर्मिंयों से 25 अक्टूबर, 2015 तक सुझाव मांगे थे और उसके तीन साल बाद दिसंबर 2018 में इसे संसद में प्रस्तावित किया गया था और इस विषय को संसद की स्थाई समिति के पास विस्तृत जांच के लिए भेजा गया था. समिति के सुझावों के अनुसार अब नेशनल कमीशन फॉर अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स बिल-2021 लोकसभा व राज्यसभा में पेश किया गया, जिसे दोनों सदनों ने अपनी मंजूरी दे दी है. इस क़ानूनी संस्था के स्थापित होने पर देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की शिक्षा व सेवाओं की व्यवस्था में व्यापक सुधारों की उम्मीद है. इसके अतिरिक्त इनके पंजीकरण होने से प्रस्तावित स्वास्थ्य की सभी ढांचागत योजनाओं में इनकी जरुरत, कमी व संख्या आदि का अनुमान भी सही सही लगाया जा सकेगा.



ये होंगे कानून बनने के फायदे...

-इस बिल के पास होकर कानून बनने से अलाइड एंड हेल्‍थ केयर प्रोफेशनल्‍स, जिनमें 56 कैटेगरी आती हैं, के प्रोफेशनल एजुकेशन स्‍टैंडर्ड में सुधार होगा.

-अलाइड एंड हेल्‍थ केयर प्रोफेशनल्‍स का पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग शुरू हो जाएगा, जैसे की डॉक्‍टरों का हेाता है.

-प्रैक्टिस और क्‍वालिटी ऑफ सर्विस सुधरेगी.

-कानून आने से देशभर में खुले हजारों पैरामेडिकल इंस्‍टीट्यूट कंट्रोल में होंगे, ताकि उनमें आवश्‍यकत स्‍टैंडर्ड का पालन किया जा सके.
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