ममता बनर्जी को नंदीग्राम में कैसे लगी चोट? बंगाल सरकार ने CID को सौंपी जांच

ममता बनर्जी ने हमले का जिक्र कर षड्यंत्र की आशंका जाहिर की थी. (फाइल फोटो)

ममता बनर्जी ने हमले का जिक्र कर षड्यंत्र की आशंका जाहिर की थी. (फाइल फोटो)

जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीआईडी अधिकारियों (CID Officers) की एक टीम जल्द ही पूर्व मेदिनीपुर जिले में घटनास्थल का दौरा करेगी और गवाहों के बयान दर्ज करेगी.

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल के अपराध जांच विभाग (CID) ने शनिवार को नंदीग्राम (Nandigram) घटना की जांच अपने हाथों में ले ली. इस घटना में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) घायल हो गई थीं. जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीआईडी अधिकारियों की एक टीम जल्द ही पूर्व मेदिनीपुर जिले में घटनास्थल का दौरा करेगी और गवाहों के बयान दर्ज करेगी.

उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के नेता शिख सुफियान द्वारा इस घटना को लेकर दर्ज एक शिकायत के आधार पर नंदीग्राम पुलिस थाने में पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका है. यह घटना 10 मार्च को हुई थी. अधिकारी ने बताया कि अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 341 और 323 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

चुनाव आयोग ने दो अधिकारियों को किया निलंबित

बनर्जी ने आरोप लगाया कि बिरुलिया बाजार क्षेत्र में उन पर हमला किया गया, जिसमें वह घायल हो गई थीं. इस घटना के बाद निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री के सुरक्षा निदेशक विवेक सहाय और पूर्व मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक प्रवीण प्रकाश को निलंबित कर दिया था.
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान ‘‘चार-पांच लोगों’’ द्वारा कथित रूप से धक्का दिये जाने की वजह से उनके एक पैर में चोट लगी है. घटना उस वक्त घटी थी जब बनर्जी रियापारा इलाके में एक मंदिर में प्रार्थना के बाद बिरूलिया जाने वाली थीं. उन्होंने कहा था, ‘मैं अपनी कार के बाहर खड़ी थी, जिसका दरवाजा खुला था. मैं वहां से मंदिर में प्रार्थना कर रही थी. कुछ लोग मेरी कार के पास आए और दरवाजे को धक्का दिया. कार का दरवाजा मेरे पैर में लग गया.’

विपक्ष ने बताया ‘सहानुभूति आधार पर वोट हासिल करने’ की एक चाल

राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले यह घटना एक मुद्दा बन गई. इस घटना के बाद बनर्जी ने ‘व्हीलचेयर’ पर बैठकर प्रचार करना शुरू किया. भाजपा समेत विपक्षी पार्टियों ने इसे लेकर उन पर निशाना साधते हुए इसे ‘सहानुभूति आधार पर वोट हासिल करने’ की एक चाल बताया था.
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