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बंगाल चुनाव: पूर्व निर्वाचन आयुक्तों बोले-कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद ही हुआ फैसला

पांच राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा हो गई है. (फाइल फोटो)

पांच राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा हो गई है. (फाइल फोटो)

दो पूर्व निर्वाचन आयुक्तों- ओ पी रावत और एन गोपालस्वामी ने 2016 में पश्चिम बंगाल में सात चरणों में हुए मतदान का हवाला देते हुए कहा कि जब भी निर्वाचन आयोग को लगता है कि जमीनी हकीकत के आधार पर सुरक्षा बढ़ानी चाहिए, तब वह सतर्कता बरतता है.

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नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव कराए जाने को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य लोगों द्वारा निर्वाचन आयोग की आलोचना के बीच दो पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्तों ने शुक्रवार को आयोग के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह निर्णय कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद ही लिया गया होगा.

वहीं, एक अन्य पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने एक चरण में चुनाव कराने की वकालत करते हुए कहा कि सोशल मीडिया के दौर में अफवाहें तेजी से फैलती हैं.

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दो पूर्व निर्वाचन आयुक्तों- ओ पी रावत और एन गोपालस्वामी ने 2016 में पश्चिम बंगाल में सात चरणों में हुए मतदान का हवाला देते हुए कहा कि जब भी निर्वाचन आयोग को लगता है कि जमीनी हकीकत के आधार पर सुरक्षा बढ़ानी चाहिए, तब वह सतर्कता बरतता है.
वर्ष 2010 से 2012 के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त रहे एस वाई कुरैशी ने कहा कि हालांकि आयोग का निर्णय कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद लिया गया होगा. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जमाने में अफवाहें तेजी से फैलती हैं इसलिए कम चरणों में चुनाव कराना बेहतर निर्णय होता.
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