बंगाल चुनाव हिंसा: रेप के कथित मामलों में SIT जांच के लिए कोर्ट में दाखिल की गई याचिका

बंगाल में चुनाव के बाद कई क्षेत्रों में हिंसा की घटना सामने आई है.

राज्य में चुनाव संबंधी हिंसा में भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की कथित हत्या से संबंधित एक लंबित याचिका में महिला और 17 वर्षीय एक लड़की ने उन्हें पक्षकार बनाये जाने के अनुरोध को लेकर अलग-अलग आवेदन दायर किये है.

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    नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के दौरान तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों या कार्यकर्ताओं द्वारा सामूहिक बलात्कार करने का आरोप लगाने वाली 60 वर्षीय एक महिला और एक नाबालिग लड़की ने उच्चतम न्यायालय में आवेदन दाखिल कर पहले से लंबित मामले में पक्षकार बनाने और इन सभी मामलों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने का अनुरोध किया है.

    राज्य में चुनाव संबंधी हिंसा में भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की कथित हत्या से संबंधित एक लंबित याचिका में महिला और 17 वर्षीय एक लड़की ने उन्हें पक्षकार बनाये जाने के अनुरोध को लेकर अलग-अलग आवेदन दायर किये है.

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को जारी किया था नोटिस
    उच्चतम न्यायालय ने 18 मई को पश्चिम बंगाल सरकार, केंद्र और अन्य को बिश्वजीत सरकार और सह याचिकाकर्ता स्वर्णलता अधिकारी की याचिका पर नोटिस जारी किया था. सरकार के बड़े भाई और स्वर्णलता के पति चुनावी हिंसा में मारे गए थे.

    साठ वर्षीय महिला की ओर से दाखिल आवेदन में आरोप लगाया गया था कि चार-पांच मई की दरम्यानी रात राज्य के ‘‘सत्तारूढ़ राजनीतिक दल’’ के समर्थकों या कार्यकर्ताओं ने उसके छह साल के पोते के सामने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. इसने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामला दर्ज किया था लेकिन उसने प्राथमिकी में पांच आरोपियों में से केवल एक का नाम लिया है.

    क्या है पूरा मामला?
    आवेदन में दावा किया गया है कि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के एक दिन बाद, आवेदनकर्ता के घर को कथित रूप से तृणमूल कांग्रेस पार्टी के समर्थन वाली भीड़ से घेर लिया गया था और उनके परिवार को घर छोड़ने या परिणाम भुगतने के लिए धमकियां दी गईं.

    राज्य पुलिस के आचरण को ‘‘असंतोषजनक और असहयोगपूर्ण’’ बताते हुए, आवेदन में कहा गया है कि मामला एसआईटी या एक स्वतंत्र एजेंसी को स्थानांतरित किया जाए. इसने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई को पश्चिम बंगाल से बाहर स्थानांतरित किया जाए.

    अनुसूचित जाति समुदाय की नाबालिग लड़की द्वारा शीर्ष अदालत में दाखिल एक अन्य आवेदन में आरोप लगाया गया है कि सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के सदस्यों या समर्थकों द्वारा नौ मई को उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था. उसने कहा कि मामले में 10 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

    उन्होंने मामले की जांच एसआईटी या केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने और मुकदमे को पश्चिम बंगाल से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है.

    पश्चिम बंगाल सरकार ने 25 मई शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि राज्य में दो मई को चुनाव संबंधी हिंसा में दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित हत्या के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

    उच्च्तम न्यायालय पीड़ितों के परिजनों द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अदालत की निगरानी में जांच और मामलों को सीबीआई या एसआईटी को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है.

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