फुटपाथ पर तेज धूप में बैठकर पौधे बेचते थे बुजुर्ग, सोशल मीडिया ने पहुंचाए मदद के हाथ

बेंगलुरु के बुजुर्ग की लोगों ने की मदद.
बेंगलुरु के बुजुर्ग की लोगों ने की मदद.

बेंगलुरु में एक बुजुर्ग सड़क किनारे फुटपाथ पर बैठकर पेड़-पौधे बेचते थे. जब धूप तेज होती थी तो एक हाथ से वह छाता पकड़ लेते थे. लेकिन अब लोगों की मदद से उन्‍हें पहले से काफी आराम पहुंचा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 1:51 PM IST
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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली का 'बाबा का ढाबा' (Baba ka Dhaba) तो याद होगा ही आपको. आखिर कैसे सोशल मीडिया (Social Media) के जरिये एक परेशान बुजुर्ग दंपती का ढाबा कुछ ही मिनट में फेमस हो गया था और लोग उनकी मदद करने लिए बड़ी संख्‍या में खाना खरीदने वहां पहुंच गए थे. अब ऐसा ही एक मामला बेंगलुरु (Bengaluru) में सामने आया है. बेंगलुरु में एक बुजुर्ग सड़क किनारे फुटपाथ पर बैठकर पेड़-पौधे बेचते थे. जब धूप तेज होती थी तो एक हाथ से वह छाता पकड़ लेते थे. लेकिन अब लोगों की मदद से उन्‍हें पहले से काफी आराम पहुंचा है. लोगों ने हाथ बढ़ाकर उनकी मदद की है.

दरअसल किसी ने बेंगलुरु के इस बुजुर्ग की तस्‍वीर सोशल मीडिया पर शेयर की थी. इसके बाद लोगों ने उन्‍हें प्‍यार दिया और उनकी मदद के लिए आगे आए एक्‍टर रणदीप हुड्डा ने भी उनकी फोटो शेयर करके लोगों से उनकी मदद की अपील की थी. इसके बाद उनकी मदद को कई लोग आगे आए.


रणदीप हुड्डा ने उनकी फोटो शेयर कर लिखा था, 'हे बेंगलोर, थोड़ा प्‍यार दिखाओ...यह कनकपुरा रोड पर सरक्‍की सिग्‍नल पर वुलार फैशन फैक्‍टरी के बाहर बैठते हैं.' एक्‍टर ने ये संदेश डालकर आशा की कि लोग दिल्‍ली वाले 'बाबा का ढाबा' की तरह ही उनकी मदद करेंगे. और ऐसा हुआ भी. रणदीप ने एक अन्‍य ट्विटर यूजर का ट्वीट शेयर किया था. इसमें लिखा था, 'इन बुजुर्ग का नाम रेवना सिद्धप्‍पा है. वह कनकपुरा रोड पर 10 से 30 रुपये की कीमत के पौधे बेचते हैं. वह धूप से बचने के लिए एक हाथ में छाता पकड़ते हैं.'



इस पोस्‍ट के बाद बुजुर्ग की मदद के लिए कई लोग उनके पास पहुंचे. 'चेंजमेकर ऑफ कनकपुरा रोड' नामक एक ट्विटर अकाउंट की ओर से ट्विटर पर कुछ फोटो शेयर की गईं. इसमें उन्‍होंने जानकारी दी कि 'आज हमने उन्‍हें एक छाता और बेचने के लिए उन्‍हें कुछ और पौधे उपलब्‍ध कराए हैं. हमने उन्हें कुर्सी और टेबल भी मुहैया कराई है. हम उनकी आय के लिए लगातार फंड एकत्र कर रहे हैं.'

इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मदद के लिए सराहना की. लोगों ने यहां तक कहा कि सोशल मीडिया कमाल का काम कर रहा है. अगर ऐसा ही लंबे समय तक चलता रहा तो यह भारत सरकार की तुलना में कहीं अधिक रोजगार सृजित कर देगा.
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