बेंगलुरु हिंसा की मजिस्ट्रेट करेंगे जांच, 10 पॉइंट्स में जानें ताजा हाल

फायरिंग में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से ज्यादा पुलिसवाले जख्मी बताए जा रहे हैं.

Bengaluru Clashes: भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस के गोली चलाने से तीन लोगों की मौत हो गई है. वहीं, राज्य सरकार ने इस पूरी हिंसा को ‘सुनियोजित’ बताया है.

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    बेंगलुरु. कर्नाटक सरकार (Karnataka Govt.) ने फैसला किया है कि बेंगलुरु शहर के कुछ हिस्सों में हुई हिंसा की जांच एक जिलाधिकारी से करायी जाएगी. इस घटना में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गयी और कई अन्य लोग घायल हो गए. गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि सरकार ने हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुआ नुकसान वसूलने का फैसला किया है. बता दें कि बेंगलुरु के कुछ इलाकों में मंगलवार देर रात सांप्रदायिक हिंसा (Communal Violence) भड़क गई. इस दौरान फायरिंग में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से ज्यादा पुलिसवाले जख्मी बताए जा रहे हैं.

    आइए एक नजर डालते हैं कि इस घटना में अब तक क्या कुछ हुआ है और सरकार ने और क्या कदम उठाएं हैं...
    मंगलवार देर रात और बुधवार सुबह बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा हुई. उपद्रवियों ने जगह-जगह गाड़ियों को आग लगा दिया था. एटीएम में तोड़फोड़ की गई. विधायक के घर पर हमला करने के अलावा आसपास के लोगों के घरों पर भी पथराव किया गया. इससे घरों की खिड़कियां भी टूट गईं.
    उत्तरी बेंगलुरु के पुलकेशी नगर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के एक कथित रिश्तेदार ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट किया था. जिसके बाद यहां हिंसा भड़क गई. इस पोस्ट के वायरल होने के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य एक जगह जमा हुए और कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर पत्थर फेंके. डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस स्टेशन पर भी पथराव किया गया. कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया.
    भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस के गोली चलाने से तीन लोगों की मौत हो गई है. वहीं, राज्य सरकार ने इस पूरी हिंसा को ‘सुनियोजित’ बताया है. पुलाकेशी नगर में हुए दंगों के सिलसिले में 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसमें करीब 50 पुलिसकर्मियों सहित बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.
    गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार ये फैसला लिया कि जब इस तरह के दंगे होते हैं और संपत्ति को नुकसान होता है, तो नुकसान की भरपाई उन लोगों से वसूल की जानी चाहिए जिन्होंने नुकसान पहुंचाया है. इससे पहले बेंगलुरु दक्षिण के सांसद तेजस्वी सूर्या ने मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को पत्र लिखकर उनसे दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली करने का अनुरोध किया.
    पुलिस के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के आवास के निकट जमा हुए और तोड़फोड़ की तथा वहां खड़े वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हिंसा को रोकने की कोशिश कर रहीं पुलिस टीमों के वाहनों को भी भीड़ ने क्षतिग्रस्त कर दिया.
    विधायक मूर्ति ने कहा कि वो चाहते हैं कि सरकार उन्हें सुरक्षा दे और मामले की जांच सीबीआई या सीआईडी से करायी जाए. घटना से बेहद डरे हुए विधायक ने बताया, ‘जब 3,000 लोगों की भीड़ पेट्रोल बम, डंडे लेकर आयी, वाहनों को जला दिया और हमारा मकान क्षतिग्रस्त कर दिया, उस वक्त हम घर में नहीं थे. इस घटना के बाद मुझे सरकार से सुरक्षा की आवश्यकता है.’
    मरने वालों में से एक की पहचान यासिन पाशा के रूप में हुई है. उसके पिता अफजल ने संवाददाताओं से कहा कि उनका बेटा ‘निर्दोंष’था. उन्होंने कहा, ‘मेरा बेटा उस इलाके में मांस की दुकान चलाता था. वह रात का खाना खाने गया था, तभी पुलिस ने गोलियां चलायीं जिसमें वह मारा गया. वह निर्दोष था और किसी आगजनी में शामिल नहीं था.’
    कर्नाटक की सत्ताधारी भाजपा ने बुधवार को कांग्रेस पर उन दंगाइयों के खिलाफ ‘‘मुखर’’ न होने का आरोप लगाया जिन्होंने विपक्ष के एक विधायक पर बेंगलुरु में हमला किया. राजधानी बेंगलुरु के पुलाकेशी नगर में मंगलवार रात भड़की हिंसा में कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए भाजपा ने कहा ऐसा लगता है कि ‘‘तुष्टिकरण’’ ही उसकी एकमात्र आधिकारिक नीति बन गई है.
    सीएम येडियुरप्पा ने कहा, 'विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के आवास और डीजे हाली पुलिस थाने पर हमला और दंगे निंदनीय हैं. अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. सरकार ने हिंसा पर काबू पाने के लिए हर संभव कार्रवाई की है. पुलिस, मीडियाकर्मी और आम नागरिक पर हमला अक्षम्य है. सरकार ऐसी हरकतें बर्दाशत नहीं करेगी.'
    कर्नाटक कांग्रेस के नेता दिनेश गुंडू राव ने संतोष पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वे इस घटना का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं. राव ने कहा कि संतोष का बयान मामले का साम्प्रदायीकरण करने का प्रयास है और लोगों को जातीय आधार पर बांटने की कोशश है. उन्होंने इसे दुखद और निंदनीय करार दिया.

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