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बेंगलुरु के डॉक्टर की Covid-19 डिवाइस का टेस्ट करेंगे अमेरिका, मैक्सिको

News18Hindi
Updated: March 24, 2020, 7:03 PM IST
बेंगलुरु के डॉक्टर की Covid-19 डिवाइस का टेस्ट करेंगे अमेरिका, मैक्सिको
यह डिवाइस संक्रमण का इलाज नहीं होगा. इसका मकसद वायरस के काम करने के तरीको को कमजोर कर संक्रमण को रोकना है

इस डिवाइस को बनाने वाले राजा विजय कुमार (Rajah Vijay Kumear) ने बताया, यह डिवाइस (Device) संक्रमण का इलाज नहीं होगी. इसका मकसद वायरस (Virus) के काम करने के तरीकों को कमजोर कर संक्रमण को रोकना है.

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  • Last Updated: March 24, 2020, 7:03 PM IST
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बेंगलुरु. बेंगलुरु (Bengaluru) के एक वैज्ञानिक की बनाई डिवाइस का जल्द ही अमेरिका और मैक्सिको में उसकी क्षमता को लेकर परीक्षण किया जाएगा. वैज्ञानिक का इस डिवाइस के जरिए सार्स-CoV-2 (जिस वायरस के चलते Covid-19 का इंफेक्शन होता है) के संक्रमण को रोकने का दावा है.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस डिवाइस को बनाने वाले राजा विजय कुमार ने मंगलवार को कहा, यह डिवाइस, संक्रमण (Infection) का इलाज नहीं होगी. इसका मकसद वायरस के काम करने के तरीको को कमजोर कर संक्रमण को रोकना है. मैं खुश हूं कि अमेरिका और मैक्सिको (America and Mexico) ने इतनी जल्दी डिवाइस का परीक्षण करने की इच्छा जताई है.

कैंपस में लोगों के साधारण जुकाम-फ्लू से बीमार पड़ने पर शुरू किया था इसका काम
राजा विजय कुमार ने कहा, "हम तीन प्रोटोटाइप (prototype) मंगलवार को भेजने वाले हैं. उन्होंने बताया कि जो प्रोटोटाइप अमेरिका, जबकि एक मैक्सिको भेजा जाएगा."



उन्होंने बताया कि उन्होंने अप्रैल, 2019 में इस डिवाइस- स्कालेने हाइपरचार्ज कोरोना कैनन (SHYCOCAN) पर काम करना शुरू किया था. ऐसा उन्होंने 2018-19 में अपने कैंपस में साधारण फ्लू और जुकाम के चलते लोगों के बीमार पड़ने के बाद किया था.

वातावरण में बड़ी संख्या में फ्री इलेक्ट्रॉन्स पैदा करती है यह डिवाइस
उनकी टीम को स्वीडिश इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज कंट्रोल और यूनिवर्सिटी ऑफ लिंकोपिंग की एक स्टडी मिली थी, जिसमें दिखाया संक्रमित वातावरण के एक्टिव आयनीकरण (Ionisation) के जरिए हवा से फैलने वाले इंफ्लुएंजा A वायरस की प्रभावी तरीके से रोकथाम की जा सकती है.

कुमार ने बताया, "हमने इसी रास्ते पर काम शुरू किया और SHYCOCAN को बनाया. यह डिवाइस वातावरण में फ्री इलेक्ट्रॉन्स (Free Electrons) की बड़ी संख्या को पैदा कर पाने में सक्षम है."

यह कैसे करता है काम?
सार्स-CoV-2 वायरस के मामले में कोशिका से वायरस का पहला जुड़ाव, S-प्रोटीन और इसके रिसेप्टर के जरिए होता है. और इसका काम करने का तरीका यह है कि यह उस कोशिका को (जो वायरस से संक्रमित होने वाली होती है) की ट्रांसमिशन क्षमता को निगेटिव (Negative) कर देता है.

उन्होंने समझाया, "सीधे कहें तो, S-प्रोटीन निगेटिव क्षमता को ढूंढकर वायरस को इंफेक्शन के लायक बनाता है. उदाहरण के तौर पर, हमारी कोशिकाओं की दीवार में निगेटिव क्षमता होती है, जो वायरस और S-प्रोटीन रिसेप्टर से जुड़ जाता है. हमारी डिवाइस की कोशिश S-प्रोटीन को निगेटिव चार्ज इलेक्ट्रान्स के जरिए न्यूट्रल (Neutral) बनाकर रिसेप्टर से जुड़ने में अक्षम करने की है. यह प्रभावी तरीके से वायरस के संक्रमण पैदा कर पाने के तरीके को अक्षम कर देगा."

यह कैसे करता है काम?
सार्स-CoV-2 वायरस के मामले में कोशिका (Cell) से वायरस का पहला जुड़ाव, S-प्रोटीन और इसके रिसेप्टर के जरिए होता है. और इसका काम करने का तरीका यह है कि यह उस कोशिका को (जो वायरस से संक्रमित होने वाली होती है) की ट्रांसमिशन क्षमता को निगेटिव कर देता है.

उन्होंने समझाया, "सीधे कहें तो, S-प्रोटीन निगेटिव क्षमता को ढूंढकर वायरस को संक्रमण (Infection) के लायक बनाता है. उदाहरण के तौर पर, हमारी कोशिकाओं की दीवार में निगेटिव क्षमता होती है, जो वायरस और S-प्रोटीन रिसेप्टर से जुड़ जाता है. हमारी डिवाइस की कोशिश S-प्रोटीन को निगेटिव चार्ज इलेक्ट्रान्स के जरिए न्यूट्रल बनाकर रिसेप्टर से जुड़ने में अक्षम करने की है. यह प्रभावी तरीके से वायरस के संक्रमण पैदा कर पाने के तरीके को अक्षम कर देगा."

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First published: March 24, 2020, 6:36 PM IST
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