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बेंगलुरु हिंसा: देश में सांप्रदायिक अशांति पैदा करने की साजिश कर रही थी SDPI- एनआईए

बेंगलुरु में हिंसा की घटना बीते 11 अगस्त को हुई थी. (फाइल फोटो)
बेंगलुरु में हिंसा की घटना बीते 11 अगस्त को हुई थी. (फाइल फोटो)

एनआईए के सूत्रों (NIA Sources) के मुताबिक, एजेंसी ने मामले में 247 लोगों को आरोपी बनाया है. आरोप पत्र (Charge Sheet) पर प्रतिक्रिया देते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा कि यह एसडीपीआई की एक साजिश थी और सोशल मीडिया ऐसे संगठनों के लिए एक आसान औजार बन गया है.

  • भाषा
  • Last Updated: February 23, 2021, 11:38 PM IST
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बेंगलुरु. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हाल ही में बेंगलुरु की विशेष अदालत में दाखिल अपने आरोप-पत्र में कहा है कि शहर में पिछले साल 12 अगस्त को हुई हिंसा (Violence), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) द्वारा रची गई देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की एक बड़ी साजिश थी. हिंसा में दलित कांग्रेस विधायक आर अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति के घर और दो पुलिस थानों में तोड़फोड़ की गई थी और कई वाहनों में आग लगा दी गई थी.

एक व्यक्ति ने इस मामले की जांच एनआईए से कराने के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में जांच शुरू कर दी. एनआईए के सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने मामले में 247 लोगों को आरोपी बनाया है. आरोप पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा कि यह एसडीपीआई की एक साजिश थी और सोशल मीडिया ऐसे संगठनों के लिए एक आसान औजार बन गया है.

'हिंदू देवताओं का अपमान किया गया था'
बोम्मई ने संवाददाताओं से कहा, 'ये (सोशल मीडिया के) आका भारत में ही नहीं, बल्कि बाहर भी हैं. मुझे भरोसा है कि न्याय होगा.’ एनआईए के आरोप पत्र में कहा गया कि हिंसा का तात्कालिक कारण पुलकेशिनगर के विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया एक पोस्ट था जिसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय के 4,000 से अधिक लोग उग्र हो गए थे, हालांकि एसडीपीआई के कार्यकर्ताओं ने उनको टैग करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाला था, जिसमें हिंदू देवताओं का अपमान किया गया था.
वे सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने के मौका का इंतजार कर रहे थे


आरोप पत्र के अनुसार, 'बेंगलुरु में एसडीपीआई केंद्र सरकार के कुछ फैसले से नाखुश था, जिनमें अनुच्छेद 370, सीएए/ एनआरसी का मुद्दा, बाबरी मस्जिद मामले पर उच्चतम न्यायालय का फैसला, तीन तालक पर रोक इत्यादि शामिल हैं.’ आरोप पत्र में लिखा गया है, 'वे सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने के मौका का इंतजार कर रहे थे, जिससे देश में अशांति पैदा हो.’ मुख्य अभियुक्त फैरोज पाशा के एसडीपीआई में शामिल होने के बाद, मोहम्मद शरीफ, मुजम्मिल पाशा और एसडीपीआई के बेंगलुरु जिले के अन्य नेताओं ने आपराधिक साजिश रची.
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