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बैंकॉक में हुई अनोखी शादी, 'संविधान' को साक्षी मान रचाया विवाह!

बैंकॉक में हुई अनोखी शादी, 'संविधान' को साक्षी मान रचाया विवाह!

(Image:facebook)

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निशा के जीवन में संविधान की खास अहमियत है. उनका मानना है कि दुनिया में सर्वश्रेष्ठ संविधान है जो अनेकता में एकता का संदेश देने के साथ सभी को बराबरी से रहने का हक देता है.

    आमतौर पर लोग शादी समारोह के जरिए अपनी खुशियों का इजहार बड़ी धूम-धाम से करते हैं, लेकिन बैतूल जिले की डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे ने इसके विपरीत जाकर अनोखी शादी की है. उनके लिए सबसे ऊपर 'संविधान' है.

    निशा ने अपने मित्र सुरेश अग्रवाल के साथ बैंकॉक में गणतंत्र दिवस के मौके पर शादी की, लेकिन शादी की खास बात थी कि निशा ने संविधान को साक्षी मानकर जीवन एक साथ गुजारने का संकल्प लिया.

    सामान्य परिवार में जन्मी निशा के जीवन में संविधान की खास अहमियत है. उनका मानना है कि दुनिया में सर्वश्रेष्ठ संविधान है जो अनेकता में एकता का संदेश देने के साथ सभी को बराबरी से रहने का हक देता है. यही वजह थी कि निशा ने गुड़गांव के सुरेश अग्रवाल के साथ गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत के संविधान को साक्षी मानकर बैंकॉक में शादी कर ली.

    बालाघाट, तहसील किरनापुर के एक छोटे से ग्राम चिखला की रहने वाली निशा के माता-पिता का शुरुआती जीवन संघर्ष से भरा था. उनके पिता शिक्षक बने और अब एक्सीलेंस स्कूल में प्राचार्य हैं. यह उनके समाज की पहली पीढ़ी थी, जिसने इतनी पढ़ाई की थी और ये मुकाम हासिल किया.

    निशा बताती हैं कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद गुड़गांव में नौकरी की. पहली बार पीएससी की परीक्षा में डीएसपी के पद पर उनका चयन हुआ. दूसरी बार में डिप्टी कलेक्टर के लिए चयन हुआ और बैतूल में पोस्टिंग हुई.

    निशा जब गुड़गांव में नौकरी कर रही थीं, तभी उनकी सुरेश अग्रवाल से दोस्ती हुई. पिछले दिनों दोनों के परिवार साथ में थाईलैंड घूमने गए और बौद्ध मंदिर में ही शादी की. इन दोनों ने संविधान को साक्षी मानकर विवाह रचाया और एक दूसरे को वरमाला पहनाई.

    निशा बांगरे ने बताया कि उन्हें बचपन से भारत के संविधान के प्रति काफी आस्था और अटूट विश्वास रहा है. उनका मानना है कि यह दुनिया का बेहतरीन संविधान है जो अनेकता में एकता का संदेश देने के साथ ही सभी वर्गों के मौलिक अधिकारों को बनाए रखता है.

    निशा चाहती हैं कि सभी वर्गो के लोग संविधान की रक्षा करें.

    निशा ने संविधान को साक्षी मानकर विवाह रचाने के बजह बताते हुए कहा कि वह समाज को एक संदेश देना चाहती हैं कि हजारों शादियां अग्नि के फेरे लेकर संपन्न होती हैं फिर भी टूट जाती हैं और दोनों परिवार कोर्ट कचहरी के सालों तक चक्कर काटते रहते हैं. उन्हें खुशी है कि उनके पति ने भी संविधान के प्रति अटूट विश्वास दिखाया.

    युवतियों को संदेश देते हुए निशा कहती हैं कि पुरुषवादी मानसिकता में ढलने के बजाय खुद स्वतंत्र होकर अपने भविष्य का निर्णय लेकर समाज के लिए प्रेरणा बनें.

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    Tags: 5 weddings, Betul district

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