शिवराज बोले- 2011 में पवार कहते थे कि MSP एक्ट पर कुछ नहीं किया, आज विरोध कर रहे हैं

शिवराज सिंह चौहान ने अरविंद केजरीवाल को बिन पेंदी का लौटा कहकर संबोधित किया. (फोटो साभारः ट्विटर/@OfficeofSSC)

शिवराज सिंह चौहान ने अरविंद केजरीवाल को बिन पेंदी का लौटा कहकर संबोधित किया. (फोटो साभारः ट्विटर/@OfficeofSSC)

Farmer Bharat band: शिवराज सिंह ने कहा, कांग्रेस कई सालों से प्राइवेट मंडी खोलने और एक से ज्यादा उपज बेचने के विकल्प की बात करती थी. मुझे शरद पवार जी ने चिट्ठी लिखकर एपीएमसी एक्ट का समर्थन किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 7, 2020, 8:58 PM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने कृषि कानूनों (Farm Law) को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है. सोमवार को हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि कानूनों पर आज मैं कांग्रेस और डीएमके, AAP, सपा, अकाली दल, TMC और लेफ्ट पार्टियों सहित अन्य राजनीतिक दलों के पाखंड का पर्दाफाश करूंगा. शिवराज ने कहा, कांग्रेस की नाव डूब रही है और इसीलिए वे किसानों (Farmer Protest) को गुमराह करके खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, कांग्रेस कई सालों से प्राइवेट मंडी खोलने और एक से ज्यादा उपज बेचने के विकल्प की बात करती थी. मुझे शरद पवार जी ने चिट्ठी लिखकर एपीएमसी एक्ट का समर्थन किया था. अब अचानक पता नहीं क्या हो गया है कि कांग्रेस कृषि कानून का विरोध करने लगी है.


सोनिया और राहुल गांधी से पूछे सवाल
शिवराज सिंह ने आगे कहा, 'मैं सोनिया गांधी, शरद पवार और राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि जब आप स्वयं एपीएमसी एक्ट का समर्थन करते थे, तो आज एकदम से यूटर्न का क्या कारण है? आपको जवाब देना होगा. इस दौरान शिवराज ने विपक्ष पर पाखंडी होने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि टीआरएस जैसी पार्टियां, जो अब तक सो रही थीं, अचानक नींद से जाग के कहने लगीं कि हम भी भारत बंद में साथ देंगे!

किसान के हित के लिए हैं तीनों कानून

पिछले चुनावों में बीजेपी को विशाल जीत हासिल हुई हैं, वे इस बात का द्योतक हैं कि किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं. कांग्रेस का तो कार्य ही है जनता को भ्रमित करना और बरगलाना. ये तीनों कानून किसान के हित के लिए हैं. उन्होंने कहा कि ये कृषि कानून तब लागू हुए थे, जब बिहार में चुनाव और मध्यप्रदेश में उपचुनाव समेत कई राज्यों में चुनाव हो रहे थे. यदि किसान कृषि बिल के विरोध में होते तो बीजेपी को सभी राज्यों में इतनी शानदार जीत न मिलती.

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