भारत बायोटेक: फेज-3 ह्यूमन ट्रायल के लिए 23,000 प्रतिभागी शामिल, DCGI ने दिया अप्रूवल

प्रतीकात्मक तस्वीर

Vaccine Update: भारत बायोटेक (Bharat Biotech) टीके के पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षणों में करीब 1,000 लोगों ने भाग लिया था. इस टीके को कंपनी ICMR-NIV के साथ मिलकर विकसित कर रहा है.

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    हैदराबाद. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने रविवार को औपचारिक रूप से ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजैनेका (Oxford-Astrazeeca) और भारत बायोटेक को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है. एक ओर जहां सरकार बड़े वैक्सीन प्रोग्राम के लिए तैयारियों में लगी हुई है. वहीं, कंपनियां भी लगातार वैक्सीन को बेहतर बनाने के काम में जुटी हैं. ‘भारत बायोटेक’ ने कोविड-19 (Covid-19) टीके ‘कोवैक्सीन’ (Covaxin) के तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण के लिए 26,000 प्रतिभागियों को शामिल करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए 23,000 प्रतिभागियों का सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन कर लिया है.

    टीका निर्माता ‘भारत बॉयोटेक’ ने शनिवार रात एक बयान में कहा कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण का मानव पर क्लीनिकल परीक्षण नवंबर के मध्य में आरंभ हो गया था, जिसे 26,000 प्रतिभागियों पर किए जाने का लक्ष्य रख गया है. उसने कहा कि यह कोविड-19 टीके लिए देश में तीसरे चरण का पहला और एकमात्र अध्ययन है और यह भारत में किसी भी टीके लिए तीसरे चरण का अब तक का सबसे बड़ा परीक्षण है.

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    भारत बायोटेक की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एल्ला ने प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनका जोश देश और दुनिया का मनोबल बढ़ाता है. उन्होंने कहा, ‘हम भारत में 26,000 प्रतिभागियों पर तीसरे चरण का परीक्षण करने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में सहयोग कर रहे सभी मुख्य जांचकर्ताओं, चिकित्सकों, चिकित्सा कर्मियों और अस्पतालों का शुक्रिया अदा करते हैं. हम कोवैक्सीन के तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण के लिए 26,000 प्रतिभागियों के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.’

    इस टीके के पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षणों में करीब 1,000 लोगों ने भाग लिया था. इस टीके को ‘भारत बायोटेक’ भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर)- भारतीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के साथ मिलकर विकसित कर रहा है. इससे पहले सब्जेक्ट एक्स्पर्ट कमेटी ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजैनेका की वैक्सीन कोविशील्ड को मंजूरी देने की सिफारिश की थी. इसका निर्माण पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में किया जा रहा है.

    (भाषा इनपुट के साथ)

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