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Covid Vaccination in India: सरकार ने बताया- कोवैक्सीन लगाने वालों पर रखी जा रही नज़र, एक हफ्ते तक फॉर्म जरूर भरें

भारत बायोटेक ने कहा कि कमजोर इम्युनिटी वाले और इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज कोवैक्सिन न लगवाएं.
भारत बायोटेक ने कहा कि कमजोर इम्युनिटी वाले और इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज कोवैक्सिन न लगवाएं.

Covid Vaccination in India: स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देश में अब तक 4 लाख 54 हजार 49 लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है. अमेरिका में पहले हफ्ते में जितने लोगों को टीका लगाया गया है, उस संख्या को भारत अगले 3 दिन में पार कर जाएगा. अमेरिका में पहले हफ्ते में 5 लाख 56 हजार 208 लोगों का वैक्सीनेशन हुआ था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 7:27 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कोरोना और वैक्सीनेशन पर वीकली रिपोर्ट पेश की. स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि जिन लोगों को भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की कोवैक्सीन (Covaxin) की खुराक दी गई है, उनकी सेहत पर नजर रखी जा रही है, ताकि कोई साइड इफेक्ट दिखे तो तुरंत उसकी टेस्टिंग की जा सके.

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि कोवैक्सीन लगाने वालों को एक हफ्ते के लिए फॉर्म भरना होगा. इस दौरान उन्होंने कोवैक्सीन और कोविशील्ड (Covishield) के बीच अंतर को भी साफ किया. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर कोविशील्ड बनाई है. इस वैक्सीन का हाल ही में लास्ट ट्रायल पूरा हुआ है, जबकि कोवैक्सीन अभी ट्रायल के तीसरे स्टेज में है.

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स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि सरकार ने सीरम की कोविशील्ड के लिए एक निगरानी दृष्टिकोण का विकल्प चुना है. साथ ही भारत बायोटेक की कोवैक्सिन लगाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि वैक्सीनेशन के बाद उनपर हुई किसी भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया का पता लग सके.



दरअसल, केंद्र सरकार ने कहा था कि कमजोर इम्युनिटी वाले या इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज भी कोरोना वैक्सीन लगवा सकते हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही एडवर्स रिएक्शन की वजह से भारत बायोटेक ने मंगलवार को फैक्टशीट जारी की. भारत बायोटेक ने कहा कि कमजोर इम्युनिटी वाले और इम्युनिटी बढ़ाने की दवा ले रहे मरीज कोवैक्सिन न लगवाएं. अगर ऐसे लोग कोवैक्सिन लगवाते हैं तो उन्हें गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं. इसके साथ ही जिन्हें बुखार है, वे भी वैक्सीन न लगवाएं. इसके बाद ही सरकार ने कोवैक्सीन लगाने वाले लोगों की सेहत पर नजर रखने का फैसला लिया है.

कैसे होगी निगरानी?
राजेश भूषण ने कहा, 'सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड वैक्सीन लगाने वालों पर निगरानी निष्क्रिय है. इसमें वैक्सीन लगाने वाले को सिर्फ 30 मिनट के लिए ऑब्जर्ब किया जाएगा. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो उन्हें घर भेज दिया जाएगा. हालांकि, बाद में कोरोना के लक्षण विकसित हुए या फिर कोई साइड इफेक्ट दिखा तो वैक्सीन लगाने वाले को तुरंत इसकी जानकारी वैक्सीनेटर को देनी होगी. वहीं, भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के मामले में निगरानी सक्रिय रूप से होगी. इसका मतलब ये है कि एक डॉक्टर रोजाना आपकी सेहत का अपडेट लेगा. वैक्सीन लगाने के बाद आपको एक फॉर्म दिया जाता है, जिसे आप सात दिनों के लिए भरते हैं. इसमें आपकी सेहत से जुड़ी कुछ जानकारियां होती हैं.'

स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण (Rajesh Bhushan) ने बताया कि देश में अब तक 4 लाख 54 हजार 49 लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है. अमेरिका में पहले हफ्ते में जितने लोगों को टीका लगाया गया है, उस संख्या को भारत अगले 3 दिन में पार कर जाएगा. अमेरिका में पहले हफ्ते में 5 लाख 56 हजार 208 लोगों का वैक्सीनेशन हुआ था.


साइड इफेक्ट के मामले भारत में काफी कम
भूषण ने कहा कि अब तक भारत में जितने लोगों को टीका लगाया गया है, उनमें केवल 0.18% लोगों में साइड इफेक्ट देखने को मिला है. इनमें भी 0.002% ऐसे लोग थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. उन्होंने बताया कि वैक्सीन के बाद होने वाले साइड इफेक्ट को ट्रैक करने के लिए हमारे यहां एक तय सिस्टम है. 3 दिन के आंकड़ों के लिहाज से साइड इफेक्ट वाले मामलों की संख्या दुनिया के बाकी देशों से काफी कम है. 2 लोगों की जान गई है, पर इनका वैक्सीनेशन से कोई लेना-देना नहीं है.

वैक्सीनेशन में लक्षद्वीप टॉप पर और पंजाब सबसे पीछे
स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने बताया कि पिछले दो दिनों में सबसे बेहतर वैक्सीनेशन लक्षद्वीप में हुआ. यहां रजिस्टर हुए 87% लोगों को वैक्सीन लगाई गई. इसी तरह अंडमान में 81%, तेलंगाना में 81%, दादरा और नागर हवेली में 80%, अरुणाचल में 75%, उत्तर प्रदेश में 71% और राजस्थान में 71% लोगों को वैक्सीन लगाई गई. सबसे खराब रिपोर्ट तमिलनाडु, पु़ड्डुचेरी और पंजाब से आई. तमिलनाडु में रजिस्टर्ड लोगों में केवल 34.9% और पंजाब में केवल 27% लोगों को वैक्सीन लगाई गई.

वैक्सीनेशन से तोड़ सकते हैं कोरोना की चेन
वहीं, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि ये स्पष्ट है कि ये कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों सेफ हैं. वैक्सीन कोरोना संक्रमण का कारण नहीं बनता है, बल्कि ये संक्रमण से बचाता है. वैक्सीन कोरोना से होने वाली मौतों को रोकती है. लिहाजा ये वक्त वैक्सीनेशन का है. वैक्सीनेशन से ही हम कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ सकते हैं.

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बता दें कि भारत के ड्रग रेग्युलेटरी ने कोरोना को हराने के लिए कोविशील्ड और कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी. कोविशील्ड जहां पूरी तरह से इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए है. वहीं, कोवैक्सीन को क्लिनिकल ट्रायल मोड पर इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है. कोवैक्सीन का अभी तीसरा ट्रायल चल रहा है, जल्द ही भारत बायोटेक इसका डेटा जारी करेगी.
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