Corona Vaccine: कोवैक्सीन सुरक्षित, लेकिन कोरोना पर सही असर जानने के लिए फाइनल ट्रायल के नतीजे जरूरी- लैंसेट

भारत बायोटेक ने बीते दिनों कोवैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे फेज की अंतरिम रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें इस वैक्सीन को कोरोना से लड़ने के लिए 81 फीसदी कारगर बताया गया था.

भारत बायोटेक ने बीते दिनों कोवैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे फेज की अंतरिम रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें इस वैक्सीन को कोरोना से लड़ने के लिए 81 फीसदी कारगर बताया गया था.

भारत में इस समय कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ दो वैक्सीन इस्तेमाल हो रही हैं- पहली, भारत बायोटेक की कोवैक्सिन (Covaxin) और दूसरी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड (Covishield). इन दोनों में कोविशील्ड को अब तक प्राथमिकता दी जा रही थी, जबकि नतीजों से साफ है कि 72% असर दिखाने वाली कोविशील्ड के मुकाबले कोवैक्सिन ज्यादा असरदार है.

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Coronavirus Vaccination in India: भारत में कोरोना वायरस को हराने के लिए वैक्सीनेशन के दूसरे फेज ने रफ्तार पकड़ ली है. लोगों को भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की कोवैक्सीन (Covaxin) और सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशिल्ड (Covishield) की डोज दी जा रही है.

भारत बायोटेक ने बीते दिनों कोवैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे फेज की अंतरिम रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें इस वैक्सीन को कोरोना से लड़ने के लिए 81 फीसदी कारगर बताया गया था. अब वीकली मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' ने कोवैक्सीन की प्रभावकारिता को लेकर कहा कि ये वैक्सीन सुरक्षित है, लेकिन इसकी कारगता को जांचने के लिए फेज 3 के क्लीनिकल ट्रायल के फाइनल रिपोर्ट की जरूरत है.

मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' ने अपनी स्टडी में ये बातें कहीं. स्टडी में कहा गया, 'हैदराबाद की भारत बायोटेक की विकसित की गई कोवैक्सीन सुरक्षित है और इसके कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स भी नहीं हैं, लेकिन ये वैक्सीन कोरोना पर कितनी असरदार है, इसका पता लगाने के लिए फेज 3 के क्लिनिकल ट्रायल के फाइनल नतीजे आने चाहिए.'

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स्टडी रिपोर्ट में कहा गया, 'कोवैक्सीन के दूसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल में BBV152 ने बेहतर रिजल्ट दिखाया है. इससे पता चला है कि वैक्सीन के शॉट शरीर में कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा बढ़ाने में कारगर हैं. वहीं, फेज 3 के क्लीनिकल ट्रायल के लिए अल्गेल-आईएमडीजी फॉर्मूलेशन के साथ 6 जी का चयन किया गया है.'

अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय के अपर चेसापेक हेल्थ में संक्रामक रोगों के प्रमुख फहीम यूनुस ने ट्विटर पर इस स्टडी को शेयर किया और इसे एक अच्छी खबर करार दिया.

उन्होंने लिखा- 'गुड न्यूज, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की फेज 2 के नतीजे Lancet में प्रकाशित हुए हैं. इसके तहत 380 वॉलेंटियर पर स्टडी किया गया है. वैक्सीन की दूसरी खुराक 28 दिन पर दी जा सकती है. वैक्सीन से किसी तरह के गंभीर (लेवेल 4/5) साइड इफेक्ट सामने नहीं आए हैं. लेकिन दो चरणों के ट्रायल रिपोर्ट के आधार पर वैक्सीन की प्रभावशीलता नहीं जांच सकते. इसके लिए तीसरे फेज के ट्रायल के फाइनल नतीजों की जरूरत है.'





रिपोर्ट में कहा गया, 'सुरक्षा परिणामों के मूल्यांकन के लिए हमें कोवैक्सीन के फेज 3 क्लीनिकल ट्रायल के फाइनल रिपोर्ट की जरूरत है. हमारे पास अभी पर्याप्त डेटा नहीं है. हम कम मात्रा की वजह से अन्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं (यानी एंटीबॉडी और सेल-मध्यस्थता प्रतिक्रियाओं) का आकलन कर रहे थे. इसके अलावा, हमें वैक्सीनेट हो चुके लोगों की उम्र या इनमें से किसी रोग से ग्रसित लोगों का डेटा नहीं मिला है. फेज 1 और फेज 2 के क्लीनिकल ट्रायल का डेटा भी चरणबद्ध तरीके से नहीं दिया गया है.'

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मेडिकल जर्नल ने अपनी स्टडी में इसका भी जिक्र किया कि कोवैक्सीन की अंतरिम स्टडी में जातीय, नस्लीय और लैंगिक विविधता का अभाव था, जो अन्य आबादी में BBV152 के मूल्यांकन के महत्व को और भी कम कर देता है.'

कोवैक्सिन के फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल्स के अंतरिम नतीजे में और क्या है?

दरअसल, भारत सरकार ने 3 जनवरी को कोवैक्सिन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी थी. तब कहा गया था कि फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल्स के नतीजे नहीं आए हैं, इसलिए इसे क्लीनिकल ट्रायल मोड में मंजूरी मिली है. इसका मतलब ये हुआ कि जिन लोगों को कोवैक्सीन लगेगी, उन पर नजर रखी जाएगी. अब कोवैक्सिन के फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल्स के अंतरिम नतीजे आ गए हैं. इसमें 25,800 वॉलंटियर्स शामिल हुए थे. यह देश में वॉलंटियर्स के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा क्लीनिकल ट्रायल बताया जा रहा है.

रिजल्ट में पाया गया कि फेज-3 में शामिल 43 वॉलंटियर्स कोरोना से संक्रमित हुए. इनमें 36 प्लेसिबो ग्रुप के थे, जबकि 7 वैक्सीन ग्रुप के थे. इस आधार पर वैक्सीन की एफिकेसी या इफेक्टिवनेस 80.6% निकलकर आई. वहीं, 4,500 वॉलंटियर्स ऐसे थे, जो पहले से ही किसी न किसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. इन पर भी कोवैक्सिन ने अच्छा इम्यून रिस्पॉन्स दिखाया है. बता दें कि कोवैक्सिन के ट्रायल्स में 2,433 वॉलंटियर्स की उम्र 60 वर्ष या अधिक थी.

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इससे पहले जनवरी में कोवैक्सीन की एक समीक्षा रिपोर्ट भी सामने आई थी जिसमें कहा गया था कि भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवैक्सीन टीका ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस के नये स्वरूप से बचाव में भी कारगर है. ‘बायोआरएक्सिव्स’ द्वारा प्रकाशन पूर्व समीक्षा रिपोर्ट में टीके के बारे में बताया गया. न्यूयॉर्क में एक गैर लाभकारी अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थान कोल्ड स्प्रिंग हॉर्बर लेबोरेटरी द्वारा इसे संचालित किया जाता है.
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