अमेरिका में कोवैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल करेगा भारत बायोटेक, जानें क्यों

भारत बॉयोटेक को अपने कोविड-19 टीके कोवैक्सीन फेज-3 के डाटा को वैज्ञानिक पत्रिकाओं को दिए जाने के बाद दो से चार महीने में टीके के विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा (पीयर रीव्यू) की उम्मीद है. (फाइल फोटो)

भारत बायोटेक के यूएस पार्टनर ओक्यूजेन ने एफडीए के साथ वैक्सीन के इमर्जेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) के लिए अप्लाई किया था. हालांकि अमेरिका ने इस वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी (EUA) देने से मना कर दिया था.

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    नई दिल्ली. भारत बायोटेक (Bharat Biotech) के कोवैक्सीन को अमेरिका के ड्रग रेगुलेटर एफडीए ने इमर्जेंसी इस्तेमाल की मंजूरी नहीं मिलने के बाद कंपनी ने बड़ा फैसला लिया है. शनिवार को कंपनी ने कहा कि वह कोवैक्सीन (COVAXIN) की मार्केटिंग आवेदन को समर्थन देने के लिए अमेरिका में क्लीनिकल ट्रायल आयोजित करेगी.

    दरअसल, भारत बायोटेक के यूएस पार्टनर ओक्यूजेन ने एफडीए के साथ वैक्सीन के इमर्जेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) के लिए अप्लाई  किया था. हालांकि अमेरिका ने इस वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी (EUA) देने से मना कर दिया था. कहा जा रहा है कि पूरे डेटा न होने के कारण ये फैसला लिया गया है.

    यूएसएफडीए ने ओक्यूजेन इंक को सलाह दी थी कि वह भारतीय वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी हासिल करने के लिए अतिरिक्त आंकड़ों के साथ जैविक लाइसेंस आवेदन (बीएलए) मार्ग से अनुरोध करे. ओक्यूजेन ने बयान में कहा था कि वह एफडीए की सलाह के अनुसार कोवैक्सीन के लिए बीएलए दाखिल करेगी.

    भारत बायोटेक की वैक्सीन में है कमी?
    जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में इमरजेंसी इस्तेमाल के मंजूरी न मिलने का मतलब ये नहीं है कि वैक्सीन में कोई कमी है. हालांकि एफडीए का कहना है कि वह कोवैक्सीन के ट्रायल के कुछ और परिणाम देखना चाहती है. बता दें कि कोवैक्सीन को WHO से भी फिलहाल मंजूरी नहीं मिली है.

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