कोवैक्सीन की लाइफ छह माह से बढ़ाकर 24 माह की जाए, भारत बायोटेक ने DCGI को लिखा पत्र

हैदराबाद की भारत बायोटेक ने सीएमआर के साथ मिलकर कोवैक्सीन विकसित की है. (Photo- news18 creative)

हैदराबाद की भारत बायोटेक ने सीएमआर के साथ मिलकर कोवैक्सीन विकसित की है. (Photo- news18 creative)

Coronavirus Vaccine Covaxin: कोवैक्सीन पूर्ण रूप से स्वदेशी टीका है, जिसे भारत बायोटेक ने आईसीएमआर और एनआईवी के साथ तालमेल से तैयार किया है.

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नई दिल्ली. भारत बायोटेक ने देश के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने पूरी तरह से भारत में विकसित अपने कोरोना-रोधी टीके 'कोवैक्सीन' की लाइफ को छह माह से बढ़ाकर 24 माह करने को कहा है. एक सूत्र ने रविवार को यह जानकारी दी. कोवैक्सीन पूर्ण रूप से स्वदेशी टीका है, जिसे भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के साथ तालमेल से तैयार किया है.



भारत में इस समय कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण में कोवैक्सीन के साथ सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित  कोविशील्ड वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अतिरिक्त भारत में रूस की वैक्सीन स्पूतनिक-वी को भी आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है. हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक को छह माह की लाइफ के साथ कोवैक्सीन की बिक्री एवं वितरण की मंजूरी दी गई है और वो भी तब जबकि इस वैक्सीन का भंडारण दो से आठ डिग्री सेल्सियस में किया गया हो.



तीसरे चरण के अंतरिम विश्लेषण में कोवैक्सीन ने 78 प्रतिशत प्रभावी दिखाया

गौरतलब है कि भारत बायोटेक ने कोविड रोधी टीके कोवैक्सीन के तीसरे चरण के अंतरिम विश्लेषण के नतीजों की घोषणा करते हुए बीते 21 अप्रैल को कहा था कि टीके का कुल अंतरिम क्लिनिकल प्रभाव क्षमता 78 प्रतिशत रही और गंभीर कोविड-19 के खिलाफ इसकी प्रभाव क्षमता 100 प्रतिशत है. टीके के निर्माताओं ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, 'दूसरा अंतरिम विश्लेषण कोविड-19 के लक्षण वाले 87 मामलों के परिणाम पर आधारित है. हाल में मामलों में आई तेजी के मद्देनजर, लक्षण वाले 127 मामलों को दर्ज किया गया, जिसमें कोविड-19 बीमारी के हल्के, मध्यम और गंभीर लक्षण वालों पर इसका प्रभाव 78 प्रतिशत रहा.'


गंभीर कोविड-19 मामलों के खिलाफ इसका प्रभाव 100 प्रतिशत है और अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में आई कमी में यह टीका प्रभावी रहा. इसमें कहा गया है कि बिना लक्षण वाले कोविड-19 संक्रमण के खिलाफ इसका प्रभाव 70 प्रतिशत था जो कोवैक्सीन लेने वालों में कम संक्रमण को दर्शाता है. विज्ञप्ति में कहा गया कि सफलता के आधार पर प्रायोगिक औषध प्राप्त करने वाले अब कोवैक्सीन की दो खुराक लेने के पात्र हो गए हैं. तीसरे चरण के अध्ययन में 18 से 98 साल के आयुवर्ग के 25,800 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था. इनमें से 10 प्रतिशत लोग 60 साल से ज्यादा उम्र के थे. इन्हें टीके की दूसरी खुराक देने के 14 दिन बाद विश्लेषण किया गया.


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