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Bhartiya Kisan Union (BKU) and UP Politics: पंजाब में जन्मा BKU, कुछ यूं बन गया पश्चिमी यूपी की राजनीति की धुरी

Bhartiya Kisan Union (BKU) and UP Politics: पंजाब में जन्मा BKU, कुछ यूं बन गया पश्चिमी यूपी की राजनीति की धुरी

भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत. (तस्वीर-न्यूज़18)

भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत. (तस्वीर-न्यूज़18)

Bhartiya Kisan Union (BKU) and UP Politics: चौधरी नरेश टिकैत (Naresh Tikait) बीकेयू के मौजूदा प्रमुख हैं, जिन्होंने अभी हाल ही में बयान दिया कि बीकेयू इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election-2022) में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन (SP-RLD Coalition) का समर्थन करेगा. लेकिन कुछ घंटों के भीतर ही पलट गए.

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नई दिल्ली. भारतीय किसान यूनियन (BKU) और इसके दो नेता चौधरी नरेश टिकैत (Naresh Tikait) तथा चौधरी राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) पिछले करीब 2 साल से खूब सुर्खियों में हैं. पहले केंद्र के 3 विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन में उनकी और उनके संगठन की भूमिका. फिर पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों के चुनाव में राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) का दखल और अब संगठन के मुख्य शक्तिस्थल उत्तर प्रदेश के चुनाव (UP Election) में सक्रियता. चौधरी नरेश टिकैत (Naresh Tikait) बीकेयू के मौजूदा प्रमुख हैं, जिन्होंने अभी हाल ही में बयान दिया कि बीकेयू इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election-2022) में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन (SP-RLD Coalition) का समर्थन करेगा.

लेकिन कुछ घंटों के भीतर ही पलट गए. इससे थोड़ा पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने नरेश टिकैत (Naresh Tikait) से मुलाकात की थी. जबकि उनके छोटे भाई और बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने सपा (SP) को समर्थन वाला उनका बयान खारिज कर दिया था.

ऐसी तमाम चर्चाओं के बाद बीकेयू (BKU) और इसके दोनों नेताओं के बारे में थोड़ा कुछ जानने की जिज्ञास हो सकती है. खास तौर पर इस तथ्य के मद्देनजर कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election-2022) की प्रक्रिया जारी है और उनमें बीकेयू की भूमिका अहम होने वाली है. क्योंकि वर्तमान में बीकेयू (BKU) का सबसे बड़ा समर्थक वर्ग उत्तर प्रदेश में ही पाया जाता है. खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में. लिहाजा, खंगालते हैं इससे जुड़े कुछ पहलू…

शुरुआत उत्तर प्रदेश से नहीं बल्कि पंजाब से

कम लोग ही जानते होंगे कि बीकेयू (BKU) का जन्म पंजाब (Punjab) में हुआ था. यह 1970 के दशक की बात है. उस वक्त पंजाब खेतीबाड़ी यूनियन (PKU) के नाम से संगठन अस्तित्व में आया था. उसी दौर में उत्तर प्रदेश (UP) से ताल्लुक रखने वाले राष्ट्रीय स्तर के तत्कालीन किसान नेता चौधरी चरण सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री) ने इस पहल को हाथों-हाथ लिया और संगठन को राष्ट्रीय क्षितित पर विस्तार दिया. सो, धीरे-धीरे अन्य किसान आंदोलन/संगठन भी अस्तित्व में आए. फिर 1980 में बड़ा मोड़ आया, जब तमिलनाडु के जाने-माने किसान नेता सी नारायणस्वामी नायडू ने सभी किसान संगठनों की बैठक बुलाई. इसके नतीजे में अखिल भारतीय किसान-महासम्मेलन हुआ. लेकिन यह एका ज्यादा चला नहीं और 1982 में भूपिंदर सिंह मन और सी नारायणस्वामी नायडू ने दो अलग संगठन बना लिए- बीकेयू-एम (BKU-M) और बीकेयू-एन (BKU-N). इस तरह पीकेयू (PKU) से शुरू हुआ सफर बीकेयू (BKU) तक आ पहुंचा.

बीकेयू ने जोर तब पकड़ा जब महेंद्र सिंह टिकैत आए

इस बीच तमाम घटनाक्रम चलते रहे. फिर 1986 में उत्तर प्रदेश के किसान नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) ने बीकेयू (BKU) का पुनर्गठन किया. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रभावी बालियान खाप के नेता महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) बीकेयू (BKU) का मुख्यालय भी सिसौली ले आए. उन्होंने चौधरी चरण सिंह (Chowdhari Charan Singh) की नीतियों से अलग रास्ता पकड़ा. चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) ने उसी दौर में उस वक्त राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं, जब उन्होंने मेरठ के कमिश्नर ऑफिस का 25 दिनों तक घेराव किया. फिर उन्होंने दिल्ली में बोट क्लब में ऐसा ही बड़ा धरना-प्रदर्शन किया. मसला गन्ने की कीमतों में नियंत्रण, कर्ज माफी, बिजली की समुचित आपूर्ति कराने से जुड़ा था. बताते हैं कि इस आयोजन के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) ही नहीं, देश के अन्य हिस्सों से भी करीब 8 लाख किसान महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) के समर्थन में दिल्ली आ गए थे.

अब आज के दौर और सियासत में बीकेयू

ऐसे 1990 के दशक तक बीकेयू (BKU) का दारोमदार महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) पर आ टिका, जो अब उनके दोनों बेटों नरेश और राकेश टिकैत के ऊपर है. महाराष्ट्र के वरिष्ठ किसान नेता विजय जवंधिया ने 1980-90 के दशक के किसान आंदोलनों और नेताओं को नजदीक से देखा है. शरद जोशी जैसे महाराष्ट्र के बड़े किसान नेताओं के साथ नजदीकी से काम भी किया है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में जवंधिया कहते हैं, ‘महेंद्र सिंह टिकैत (Mahendra Singh Tikait) ने बीकेयू (BKU) के लिए एक लाइन तय की थी. दलगत-राजनीति से दूर रहने की. इसका असर ये हुआ कि बीकेयू को किसानों ही नहीं सभी दलों के नेताओं का भी समर्थन मिला. हालांकि राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने जब 2007 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) कांग्रेस (Congress) के समर्थन से लड़ा, तो स्थिति बदली. वे बुरी तरह हार गए. उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) आरएलडी (RLD) के टिकट पर लड़ा. लेकिन 10,000 वोट भी हासिल नहीं कर पाए. इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि खुलकर किसी पार्टी से जुड़ने पर परिणाम किस तरह का हो सकता है.’ संभव है, इसीलिए अब टिकैत-बंधु खुलकर किसी पार्टी के पक्ष में आने से बच रहे हों.

Tags: Bharatiya Kisan Union, Naresh Tikait, Rakesh Tikait, UP Assembly Elections 2022

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