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भीमा कोरेगांव हिंसा केस : आरोपी वरवर राव को राहत, मेडिकल ग्राउंड पर सुप्रीम कोर्ट ने दी नियमित जमानत

भीमा कोरेगांव हिंसा केस : आरोपी वरवर राव को राहत, मेडिकल ग्राउंड पर सुप्रीम कोर्ट ने दी नियमित जमानत

डॉक्टर पी वरवर राव को मेडिकल ग्राउंड पर नियमित जमानत मिली (फोटो-ANI)

डॉक्टर पी वरवर राव को मेडिकल ग्राउंड पर नियमित जमानत मिली (फोटो-ANI)

Bhima Koregaon violence case: ये मामला 31 दिसंबर 2017 में पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का दावा है कि इस भाषण की वजह से अगले दिन कोरेगांव-भीमा में हिंसा फैली.

हाइलाइट्स

पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप
28 अगस्त, 2018 को हैदराबाद स्थित घर से हुई थी गिरफ्तारी
दो साल से अधिक समय से हैं जेल में

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने 2018 भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी कवि डॉक्टर पी वरवर राव को मेडिकल ग्राउंड पर नियमित जमानत दे दी है. राव ने स्थायी चिकित्सा जमानत संबंधी अपनी अपील बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए ये याचिका दाखिल की थी. 83 साल के राव मेडिकल आधार पर जमानत पर हैं और उन्हें पिछले महीने आत्मसमर्पण करना था.

राव ने 13 अप्रैल के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ वकील नूपुर कुमार के जरिए दायर अपनी अपील में कहा था, ‘याचिकाकर्ता, 83 वर्षीय प्रसिद्ध तेलुगु कवि और वक्ता हैं, जो विचाराधीन कैदी के रूप में दो साल से अधिक समय तक जेल में रहे हैं. फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा चिकित्सा आधार पर दी गई जमानत पर हैं… कोई भी आगे की कैद उनके खराब होते स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते उनके लिए मौत की घंटी होगी.’

क्या कहा था बॉम्बे हाईकोर्ट ने?
बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एसबी शुक्रे और न्यायमूर्ति जीए सानप की पीठ ने 83 वर्षीय कार्यकर्ता के लिए तलोजा जेल प्राधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने की अवधि तीन महीने तक बढ़ा दी ताकि वो मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा सकें. पीठ ने राव की यह अर्जी खारिज कर दी कि उन्हें जमानत पर रहते हुए मुंबई के बजाय हैदराबाद में रहने की अनुमति दी जाए.

पी वरवर राव पर क्या हैं आरोप?
बता दें कि ये मामला 31 दिसंबर 2017 में पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का दावा है कि इस भाषण की वजह से अगले दिन कोरेगांव-भीमा में हिंसा फैली. पुलिस का दावा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोगों के माओवादियों से संबंध हैं.

2018 में हुई थी गिरफ्तारी
उन्हें 28 अगस्त, 2018 को हैदराबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया था और वह भीमा कोरेगांव मामले में विचाराधीन कैदी हैं. उनके खिलाफ पुणे पुलिस ने आठ जनवरी, 2018 को विश्रामबाग थाने में भादंसं की विभिन्न धाराओं और गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. पुणे पुलिस ने ये भी दावा किया था कि सम्मेलन कथित तौर पर माओवादियों से संबंध रखने वाले लोगों द्वारा आयोजित किया गया था. बाद में, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी. (भाषा इनपुट के साथ)

Tags: Bhima Koregaon case

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