भीमा कोरेगांव हिंसा: NIA स्पेशल कोर्ट ने गौतम नवलखा को 22 जुलाई तक हिरासत में भेजा

भीमा कोरेगांव हिंसा: NIA स्पेशल कोर्ट ने गौतम नवलखा को 22 जुलाई तक हिरासत में भेजा
आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की फाइल फोटो

इससे पहले मुम्बई की एक विशेष अदालत (Special Court) ने रविवार को एल्गार परिषद मामले (Elgaar Parishad Case) के एक आरोपी- सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) को वैधानिक जमानत देने से इनकार कर दिया था.

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मुम्बई. भीमा कोरेगांव हिंसा (Bhima Koregaon Violence) के मामले में NIA की विशेष अदालत (Special Court) ने मंगलवार को आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा (accused social worker Gautam Navlakha) की हिरासत को 22 जुलाई तक बढ़ा दिया है. इससे पहले मुम्बई (Mumbai) की एक विशेष अदालत (Special Court) ने रविवार को एल्गार परिषद मामले (Elgar Parishad Case) के एक आरोपी- सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को वैधानिक जमानत देने से इनकार कर दिया था.

नवलखा ने यह दावा करते हुए अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 167 के तहत वैधानिक जमानत (Statutory Bail) मांगी कि वह 90 से अधिक दिनों से हिरासत में हैं (लेकिन आरोपपत्र दायर नहीं किया गया है). उन्होंने इस साल 14 अप्रैल को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के सामने आत्मसमर्पण किया था. वह नवी मुम्बई की तलोजा जेल (Taloja Jail) में हैं. वह 2018 में 29 अगस्त से एक अक्टूबर तक घर में नजरबंद थे.

वकील ने नजरबंदी के समय को भी हिरासत अवधि मानने की दलील दी थी
उनके वकील ने कहा कि अदालत को घर में उनके मुवक्किल को नजरबंद रखे जाने को भी जांच एजेंसियों की हिरासत की अवधि मानना चाहिए. दूसरा, जांच एजेंसी ने 90 दिनों की निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दायर भी नहीं किया है. एनआईए की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि (नवलखा की) यह अर्जी विचारयोग्य नहीं है. उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने नजरबंदी का आदेश दिया था और यह अवधि सीआरपीसी की धारा 167 के तहत हिरासत नहीं होगी.
एनआईए की बातों से सहमत होते हुए विशेष न्यायाधीश दिनेश कोलठालिकर ने यह दलील खारिज कर दी कि नजरबंदी को हिरासत अवधि माना जाए. अदालत ने कहा कि नवलखा नजरबंदी के दौरान जांच एजेंसियों की हिरासत में कभी नहीं रहे.



एल्गार परिषद के उत्तेजक भाषण के बाद ही हुई थी भीमा-कोरेगांव हिंसा: पुलिस
नवलखा को अदालत ने दस दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में भेजा था. जांच एजेंसी ने यह कहते हुए हिरासत की मांग की थी कि उसे इस मामले में साजिश का खुलासा करने के लिए उनसे पूछताछ करने की जरूरत है. अदालत ने नवलखा और अन्य आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ आनंद तेलटुम्बेडे के खिलाफ आरोपपत्र दायर करने के लिए 90 दिनों को बढ़कर 180 दिन करने की एनआईए की मांग मान ली.

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नवलखा को एल्गार परिषद माओवादी लिंक मामले में अन्य के साथ गिरफ्तार किया गया था. इस साल जनवरी में यह मामला पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपा गया था. यह मामला 31 दिसंबर, 2017 में पुणे के एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित उत्तेजक भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस के अनुसार इसी के बाद अगले दिन कोरेगांव भीमा वार मेमोरियल के पास हिंसा हुई थी.
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