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भीमा कोरेगांव हिंसा: जानें कौन हैं वो 5 वामपंथी विचारक, जिन्हें पुलिस ने किया अरेस्ट

भीमा कोरेगांव हिंसा: जानें कौन हैं वो 5 वामपंथी विचारक, जिन्हें पुलिस ने किया अरेस्ट

पुलिस की हिरासत में अरुण परेरा (PTI)

पुलिस की हिरासत में अरुण परेरा (PTI)

छापेमारी के बाद पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं और वामपंथी विचारकों वरवर राव, सुधा भारद्वाज, अरुण परेरा, गौतम नवलखा, वर्णन गोन्साल्वेज को गिरफ्तार किया है. पांचों आरोपियों को सेक्शन 153 A, 505(1) B,117,120 B,13,16,18,20,38,39,40 और UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया है.

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    भीमा-कोरेगांव हिंसा के मामले में मंगलवार को पुणे पुलिस की कई टीमों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देश भर में कई शहरों में एक साथ मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, लेखकों, वकीलों के घरों पर छापेमारी कर पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है. छापेमारी के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं के फोन, कैमरे, लैपटॉप, सिम कार्ड जैसे सामान और उनके घर से कई दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं.

    पुलिस के मुताबिक, 31 दिसंबर 2017 को पुणे में यलगार परिषद आयोजित किया गया था. जिसमें इन प्रमुख कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर ‘भड़काऊ’ टिप्पणी करने के बाद जिले के कोरेगांव भीमा गांव में हिंसा हुई थी.

    छापेमारी के बाद पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं और वामपंथी विचारकों वरवर राव, सुधा भारद्वाज, अरुण परेरा, गौतम नवलखा, वर्णन गोन्साल्वेज को गिरफ्तार किया है. पांचों आरोपियों को सेक्शन 153 A, 505(1) B,117,120 B,13,16,18,20,38,39,40 और UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया है.

    आइए जानते हैं मामले में गिरफ्तार पांंच लोग कौन हैं:-

    वरवर राव (प्रसिद्ध कवि, लेखक और कार्यकर्ता )
    क्रांतिकारी लेखन और सार्वजनिक भाषणों के लिए प्रसिद्ध लेखक और विचारक वरवर राव को उनके हैदराबाद स्थित घर से गिरफ्तार किया गया. उन्हें तेलुगू साहित्य के एक प्रमुख मार्क्सवादी आलोचक भी माना जाता है. राव ने दशकों तक स्नातक और स्नातक छात्रों को यह विषय पढ़ाया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की कथित साजिश के सिलसिले में पुणे पुलिस वरवर राव के घर की तलाशी ले चुकी है.

    बता दें कि राव को उनके लेखन और राजनीतिक गतिविधियों के लिए पहली बार गिरफ्तार नहीं किया गया है. आंध्र प्रदेश सरकार ने 1973 में उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया था, लेकिन एक महीने जेल में बिताने बाद हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था. रखरखाव और आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (एमआईएसए) के तहत इमरजेंसी के दौरान राव को फिर से गिरफ्तार किया गया था.

    नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज
    भारद्वाज नागरिक अधिकार कार्यकर्ता
    हैं, जो छत्तीसगढ़ में लगभग तीन दशकों तक काम कर रही हैं. वह छत्तीसगढ़ में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के महासचिव भी हैं और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बड़े पैमाने पर काम कर चुकी हैं. सुधा भारद्वाज ने मजदूरों के अधिकारों के लिए काम किया है. साथ ही दलित और जनजातीय अधिकारों के लिए काम करने वाली एडवोकेट भी हैं. पुणे पुलिस ने मंगलवार को उनके घर पर छापेमारी कर उन्हें आईपीसी की धारा 153 ए505(1) B,117,120 B के तहत गिरफ्तार किया गया है.

    अरुण परेरा और वर्णन गोन्साल्वेज
    अरुण परेरा
    और वर्णन गोन्साल्वेज मुंबई बेस्ड कार्यकर्ता हैं. इसके पहले गोन्साल्वेज  को 2007 में गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था. हालांकि, 2013 में उन्हें रिलीज कर दिया गया था.

    अरुण परेरा बिजनेस ऑर्गनाइजेशन के पूर्व प्रोफेसर हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें  केंद्रीय समिति के सदस्य और नक्सलियों के महाराष्ट्र राज्य समिति के पूर्व सचिव के रूप में लेबल किया. वो 20 मामलों में आरोपी थे, लेकिन उन्हें सबूत की कमी की वजह से 17 मामलों में बरी कर दिया गया था. परेरा भी लेखक और कार्यकर्ता हैं.

    गौतम नवलखा (नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार )
    नवलाखा भी एक नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और एक पत्रकार है और लंबे समय तक पीयूसीएल में शामिल हैं. उन्होंने मानव अधिकारों के मुद्दों पर कश्मीर और छत्तीसगढ़ में काम किया है. नवलाखा राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर वीकली कॉलम भी लिखते हैं. वह कश्मीर में अपने व्यापक कार्य के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने कश्मीर में मानवाधिकार और न्याय के लिए अंतरराष्ट्रीय पीपुल्स ट्रिब्यूनल के संयोजक के रूप में भी कार्य किया है. 2011 में नवलखा को श्रीनगर एयरपोर्ट पर कश्मीर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था और उन्हें राज्य सरकार ने वापस दिल्ली भेज दिया था.

     

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