Bhojpuri Spl: होली में पवन सिंह बबुनी के रंग में रंगलें त खेसारी मेहर के, भइल फगुनाहट के अहसास

फगुनी बयार में माहुर घोर देले रहे कोरोना. लोग के बुझाते ना रहे कि फागुन में ई सरवा कहाँ से आ गइल. ई केकर सार ह? हालांकि अब सार के ईलाज हो गइल बा. पूरा देश में कोरोना के वैक्सीन लागsता बाकिर अभियो लोग कहीं आवे जाये, ट्रैवेल करे में डेराता.

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  • Last Updated: March 18, 2021, 2:58 PM IST
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फागुन आ गइल बा. मन फगुआइल बा. मन बासंती बा. पिछला साल एही होली में मन के बगइचा में कोयल कुहूकत त रहे बाकिर आम मोजरात ना रहे. सदा आनंद रहे एही द्वारे के भावना उफान पर त रहे, बाकिर आनंद ना रहे. फगुनी बयार में माहुर घोर देले रहे कोरोना. लोग के बुझाते ना रहे कि फागुन में ई सरवा कहाँ से आ गइल. ई केकर सार ह? हालांकि अब सार के ईलाज हो गइल बा. पूरा देश में कोरोना के वैक्सीन लागsता बाकिर अभियो लोग कहीं आवे जाये, ट्रैवेल करे में डेराता. बाकिर डर त पिया जी के नू बा, फागुन के थोड़े. फागुन त आइये गइल बा. गोरी के बड़ा उम्मीद रहे कि पिछ्ला साल कोरोना में फंस के ना अइलें बाकिर असो अइहें बाकिर आहि दादा असहूं ना अइलें. बसंत आ गइल, पिया ना अइलें. बड़ा बेचैनी भइल भाई.

कवि मनोज भावुक के एगो हिंदी ग़ज़ल बा –

बसंत आया, पिया न आए, बयार पुरुआ जिया जलाए

पलाश-सा तन दहक उठा है, ये आग कैसे कोई बुझाए
हवा बसंती, फ़िज़ा की मस्ती, शबाबे आलम, लहर की कश्ती

हैं सब की लोभी निगाहें मुझपे, सखी री अब तो ख़ुदा बचाए

पराग महके, पलाश दहके, पपीहा कुहुके, चुनरिया लहके



पिया अनाड़ी, सुने न देखे , जिया की बतिया समझ न पाए

क़रीब आकर पता लगाऊँ कि तेरे मन का मिज़ाज क्या है

मगर ये मुमकिन तभी है जब तू नज़र से मेरे नज़र मिलाए

तवील, ख़ामोश, उदास रातें, कुतर-कुतर के जिया को काटें

बहुत हुआ अब दुआ है ‘भावुक’ ख़ुशी से उमड़ा बसंत आए

खैर, ई त पति भा पिया भा प्रेमिका के ना अइला पर विरह भाव लेले हिंदी ग़ज़ल भइल. आगे मनोज भावुक अपना भोजपुरी के दोहा में कहत बाड़न कि –

बाहर-बाहर हरियरी, भीतर-भीतर रेह

जले बिरह के आग में गोरी-गोरी देह

भावुक हो तोहरा बिना कइसन ई मधुमास

हँसी-खुशी सब बन गइल बलुरेती के प्यास

हमरो के डसिये गइल ई फागुन के नाग

अब जहरीला देह में लहरे लागल आग

आग लगे एह फाग के जे लहकावे आग

पिया बसल परदेश में, भाग कोयलिया भाग

फागुन में आवे बहुत निर्मोही के याद

पागल होके मन करे खुद से खुद संवाद

भावुक तू कहले रहs आइब सावन बाद

फगुओ आके चल गइल, ना चिट्ठी,संवाद

होली में लोक गीतन के अलावा सिनेमाई गीतन के चलन हर जगह बढ़ गइल बा, भोजपुरिया क्षेत्र जवन फगुआ आ जोगीरा खातिर जानल जाला, उहो अब सिनेमा से प्रेरित गीत-संगीत के तरफ आकर्षित भइल बा. गीतन के भाषा, लालित्य आ गुणवत्ता एगो अलग विवाद के विषय बा किन्तु होली के भोजपुरी गीतन के लेके नयका गीतकार, गायक अजब-गजब प्रयोग कर रहल बाड़ें.

फागुन में खेसारी लाल एही भाव के बेलकुल भदेस अंदाज में गावत बाड़ें. हालांकि विरह के वेदना के शब्द में बयां कइल बड़ा मुश्किल होला लेकिन भोजपुरी के सुपरस्टार गायक खेसारीलाल यादव गोरी के दिल के दर्द छलकावत एक होली गीत गवलें, ‘केकरा से लेहब सवाद, भतार अइहें होली के बाद’. अब खेसारी अपने भाषा आ संस्कार में नू गइहें. खैर, उनका गाना में एगो मेहरारू परेशान बाड़ी कि उ होली कइसे मनइहें, उनके मरद त छुट्टी में घर आवते नइखन आ आवे के होई त होली के बादे अइहें. लागता इ होली छूछें बीती. हालांकि ओह मेहरारू के दर्द से एतना लोग के रिलीफ मिलल बा कि गाना के यूट्यूब पर 113 मिलियन व्यूज हो गइल बा. बियहल त बियहल, छँवड़ो सन खातिर ई गीत मरहम के काम कइले बा. उहो एह गाना के मार बजा बजा के किचवाइन कइले बाड़sसन.

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पिछलका होली में पिया जी त नाहिए अइले बाकिर अगिला साल के होली पर हिदायत रहे कि ए बेरी ना अइनी त बूझ जाएम. मरद महोदय के बुझाइल कि ए बेरी ना गइनी त हमार मेहर घर में ढूके न दी. इहे सोच के उ चल त अइले बाकिर इहाँ आवते होली के दिने भाँग घोंट के लोट गइलें. त गोरी के लागल असहूं होली उपासे रही का रे ! कलाकार आदमी ऑब्जर्वर बड़ा हेवी होला. खेसारी लाल ‘भतार अइहें होली में पार्ट टू’ गा देहले जे में पिया के अइला के बादो अइसन करतूत के सजीव चित्रण भइल बा. रउआ सभे देख सकीलें.

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खेसारी लाल गोरी के दर्द त सुनावते बाड़ें, ए बेरी होली में पतियो लोग के दर्द सुना रहल बाड़ें. उ पति लोग के एगो अइसन दुख चिन्हले बाड़ें जवना के पति लोग खुल के ना कह पावेला आ भीतरे-भीतर घुटत रहेला. एगो पति अपना मेहरारू से कहत बा कि हमार साढ़ू भाई जे बाड़ें, माने कि ओकर मेहरारू के जीजा जी, उ होली में आके गड़बड़ कर रहल बाड़ें. पति अपना मेहरारू के धमकावत बा कि हमरा साढ़ू के भेज द ना त बेजाईं हो जाई. मेहरारू ओकरा के दिलासा दे तिया कि रउआ झूठहूं के चिंता करत बानी, उ कुछु ना करिहें.

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पवन सिंह होली में कहाँ पीछे रहे वाला बा. बबुआन खेसारी के एक लेबल ऊपर जा के गाना निकलले बाड़ें. पवन सिंह पिछला साल से हिन्दी संगीत जगत में भी आपन प्रभाव जमावे के कोशिश में लागल बाड़ें ओही के असर ह कि उनके दू गो हिन्दी गाना बड़हन संगीतकार लोग के साथे होली पर आ चुकल बा आ चारों तरफ बवाल मचवले बा.

पहिला गाना संगीतकार दंपति आदित्य देव आ पायल देव के निर्माण में आइल बा. पवन के साथे हिन्दी सिनेमा में मशहूर आ दिलकश आइटम डान्सर लॉरेन गौटीलेब बाड़ी जे मूलतः अमेरिका से बाड़ी. गोरी मेम के साथे पवन सिंह के कमर हिलावत आ ठुमका लगावत गाना ‘कमरिया हिला रही है’ काफी चर्चित रहल आ एहू साले ट्रेंड में बा.

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पवन सिंह के दोसरका गाना सुपरहिट हिन्दी गीतन बनावे वाला संगीतकार भाई सलीम सुलेमान के साथे आइल बा जवन श्रोता लोग के बीच खूब धमाका कइले बा. गाना ‘बंबई में का बा’ फ़ेम डॉ सागर लिखले बाड़ें. गाना के बोल बा कि बबुनी के रंग में बबुआ यंग हो गइल बा अउरी दबंगो हो गइल बा. गाना खाली नाचे वाला बा अउरी होली में नवहियन के एही के दरकारो रहेला.

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कल्लू भी होली में एगो गीत निकलले बाड़ें बाकिर उनके गीत समसामयिक विषय पर बा. उ कोरोना के त्रासदी आ दर्दनाक याद नइखन गावत. उ मस्ती गावत बाड़न आ एह कोरोना काल में भी कुछ पॉजिटिव ढूढ़त बाड़न बाकिर कइसन पॉजिटिव जी ??? देखीं, गाना में कइसे कल्लू के भौजाई लॉकडाउन के सही प्रयोग करत आ आपदा के अवसर में बदलत सृजन करत बाड़ी. होली में लरकोरी होखे के उम्मीद बा. भोजपुरी सिनेमा के दूरदर्शी गीतकार- गायक लोग कोरोना काल में अद्भुत एंगिल खोजले बा. सरकार के रेल-बस भलहीं बंद रहल बाकिर भउजी के मालगाड़ी रफ़्तार में चलल ...

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अभी होली के मौसम चलिये रहल बा, फगुनी बयार बहते बा त होली पर एक से बढ़ के एक कटाह गाना आ कल्पना से परे प्रयोग देखे-सुने के मिली. आगे हम ओहू सब पर चर्चा करब. फिलहाल फागुन के मजा लीं. सामाज में, बाहरे-बाहर ना भितरो के सफाई पर ध्यान दीं. गीतो-संगीत के सफाई करीं भाई. बहुत कचड़ा हो गइल बा आ होली गीतन में त कुछ बेसिए.

बात अपना एगो दोहा से ख़तम करत बानी-

कींचड़-कांदों गांव के सब फागुन में साफ

मिटे हिया के मैल भी, ना पूरा त हाफ

( लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के जानकार हैं. )
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