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अंतरिक्ष में बड़ा हादसा टला, बेहद नजदीक आ गईं थी भारत और रूस की सैटेलाइट्स

(फोटो: News18 English)
(फोटो: News18 English)

रूस की एजेंसी ने बताया कि भारतीय कार्टोग्राफी सैटेलाइट कार्टोसेट-2एफ (Cartosat-2F), रूस की सैटेलाइट कैनोपस-5 (Kanopus-V) के बीच केवल 224 मीटर की दूरी रह गई थी.

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  • Last Updated: November 28, 2020, 7:38 PM IST
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नई दिल्ली. अंतरिक्ष में बीते शुक्रवार को रूस और भारत की एक सैटेलाइट के बीच एक बड़ा हादसा टल गया है. इंटरनेट पर जारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की कार्टोसेट-2एफ, रूस की सैटेलाइट कैनोपस-5 के बेहद नजदीक आ गई थीं. यह घटना पृथ्वी के ऑर्बिट में हुई. वहीं, रूस की सरकार स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमोस (Roscosmos) ने भी इस मामले की जानकारी दी है. हालांकि, शुरुआत में भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) ने मामले पर प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन बाद में एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने माना कि दोनों सैटेलाइट करीब आ गईं थीं.

रूस की एजेंसी ने बताया कि भारतीय कार्टोग्राफी सैटेलाइट (Indian cartography satellite) कार्टोसेट-2एफ, रूस की सैटेलाइट कैनोपस-5 के बीच केवल 224 मीटर की दूरी रह गई थी. वहीं, एक रिपोर्ट बताती है कि इसरो प्रमुख के सिवन ने साफ किया है कि दोनों सैटेलाइट शुक्रवार को काफी करीब आ गईं थीं, लेकिन दोनों के बीच तब भी 420 मीटर की दूरी थी.

उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि सैटेलाइट के बीच ऐसे मामले पृथ्वी के निचले ऑर्बिट में सामान्य रूप से बढ़ रहे हैं. आमतौर पर इनमें से कई मामले सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते हैं. उन्होंने दावा किया कि हाल ही में ऐसा एक स्पेनिश इकाई के साथ भी हुआ था.

कार्टोसेट-2एफ जैसे कुछ उपग्रहों को स्पेस में भूभाग और वातावरण की स्टडी के लिए छोड़ा जाता है. वहीं, दूसरी सैटेलाइट के छोड़े जाने के पीछे के मकसद संचार और उससे जुड़ीं चीजें हो सकती हैं. कार्टोसेट-2एफ और कैनोपस-5 जैसी दूसरी सैटेलाइट्स को बड़े स्तर पर मौसम के बदलते पैटर्न और प्राकृतिक आपदा का पता लगाने के लिए छोड़ा गया है. इन सैटेलाइट के जरूरी कामों को देखते हुए स्पेस एजेंसियां इनके साथ कई तकनीकों का भी इस्तेमाल करती हैं. इन्हीं में से एक तकनीक की मदद से उपग्रह के कामों पर निगरानी करती हैं, जिसकी वजह से टकराव से बचने का काम भी जरूरी हिस्सा है.
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