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अमेरिकी दौरे पर पीएम मोदी की बड़ी उपलब्धि, 157 पुरावशेष और कलाकृतियों को वापस ला रहे हैं भारत

2014 से 2021 के बीच 200 से अधिक पुरावशेष या तो वापस आ गए हैं या वापस आने की प्रक्रिया में हैं. (फाइल फोटो)

2014 से 2021 के बीच 200 से अधिक पुरावशेष या तो वापस आ गए हैं या वापस आने की प्रक्रिया में हैं. (फाइल फोटो)

मोदी सरकार (Modi Govenment) सक्रिय रूप से भारत के उन पुरावशेषों और कलाकृतियों को स्वदेश वापसी का प्रयास कर रही है, जो सालों से उपनिवेशवादियों द्वारा चुराए गए और जबरन छीन लिए गए थे. 157 कलाकृतियों और पुरावशेषो ने बड़े पैमाने पर 11 वीं सदी से लेकर 14 वीं सदी की ऐतिहासिक वस्तुएं हैं.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका से 157 कलाकृतियां और पुरावशेष स्वदेश वापस ला रहे है. ये वो कलाकृतियां और पुरावशेष है, जो सालों पहले चोरी, अवैध व्यापार या तस्करी से विदेशों में थी. प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा (PM Modi US Visit) के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of america) ने 157 कलाकृतियों और पुरावशेषों को सौंपा है. 157 कलाकृतियों की सूची में १०वीं सदी के बलुआ पत्थर में रेवंता के डेढ़ मीटर बेस रिलीफ पैनल से लेकर १२वीं सदी का 9.5 सेंटीमीटर लंबा कांस्य नटराज तक की वस्तुओं का एक विविध सेट शामिल है.

157 कलाकृतियों और पुरावशेषो ने बड़े पैमाने पर 11 वीं सदी से लेकर 14 वीं सदी की ऐतिहासिक वस्तुएं, जिसमे 2000 ईसा पूर्व की तांबा मानववंशीय वस्तु या दूसरी सदी के टेराकोटा फूलदान हैं. इसमे से लगभग 45 पुरावशेष कॉमन एरा के पहले के हैं.

लाये जा रहे कलाकृतियों में तकरीबन आधी यानी 71 कलाकृतियां सांस्कृतिक हैं, अन्य आधे में मूर्तियां हैं जो 60 हिंदू धर्म से जुड़ी हुई, 60 बौद्ध धर्म से जुड़ी हुई जबकि 9 जैन धर्म से संबंधित कलाकृतिया हैं.

कलाकृतियों में 24 जैन तीर्थंकरों की प्रसिद्ध मुद्राएं

कांस्य संग्रह में मुख्य रूप से लक्ष्मी नारायण, बुद्ध, विष्णु, शिव पार्वती और 24 जैन तीर्थंकरों की प्रसिद्ध मुद्राओं की अलंकृत मूर्तियाँ हैं और अन्य अनाम देवताओं और दिव्य आकृतियों के अलावा कम आम कंकलमूर्ति, ब्राह्मी और नंदीकेश हैं.

रूपांकनों में हिंदू धर्म से धार्मिक मूर्तियां (तीन सिर वाले ब्रह्मा, रथ ड्राइविंग सूर्य, विष्णु और उनकी पत्नी, शिव को दक्षिणामूर्ति, नृत्य गणेश आदि), बौद्ध धर्म (स्थायी बुद्ध, बोधिसत्व मजूश्री, तारा) और जैन धर्म (जैन तीर्थंकर, पद्मासन तीर्थंकर, जैन) शामिल हैं. इनके अलावा धर्मनिरपेक्ष रूपांकनों (समाभंगा में अनाकार युगल, चौरी वाहक, ढोल बजाने वाली महिला आदि) भी लाये जा रहे है.

56 टेराकोटा के टुकड़े ( दूसरी सदी के फूलदान, 12वी सदी की हिरण की जोड़ी और 18 वीं सदी की तलवार है जिसमें शिलालेख के साथ फारसी में गुरु हरगोविंद सिंह का उल्लेख है.

चोरी हुए कलाकृतियों को स्वदेश लाने में पीएम नरेंद्र मोदी का रिकॉर्ड

मोदी सरकार सक्रिय रूप से भारत के उन पुरावशेषों और कलाकृतियों को स्वदेश वापसी का प्रयास कर रही है, जो सालों से उपनिवेशवादियों द्वारा चुराए गए और जबरन छीन लिए गए थे. भारत सरकार की कोशिश देश की खोई हुई सांस्कृतिक विरासत को बहाल करना, चुराई गई कलाकृतियों को पुनः प्राप्त करना है.

2014 से 2021 के बीच 200 से अधिक पुरावशेष या तो वापस आ गए हैं या वापस आने की प्रक्रिया में हैं.
संसद में पेश एक रिपोर्ट के मूताबिक पीएम के इस दौरे से पहले वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद विदेशों से 41 कलाकृतियों को वापस स्वदेश लाया गया है. ये अब तक वापस आई कुल वस्तुओं के 75 फीसदी से भी ज्यादा है.

2004 और 2014 के बीच केवल 1 प्राचीन पुरातनता भारत लौटी थी

1976 से 2013 के बीच केवल 13 ऐसी पुरावशेषों को लौटाया गया था. 1976 से अब तक विदेशों से कुल 54 पुरावशेष वापस भारत लाए गए हैं, जिनमें से 41 वस्तुओं को पीएम मोदी की अगुवाई में स्वदेश लाया गया है.

1976 से कांग्रेस सरकार ने लगभग 25 सालों तक राज किया, लेकिन इस दौरान 10 से भी कम पुरावशेषों को भारत वापस लाया गया. यानि पिछले 7 सालों में मोदी सरकार ने अपने से पहले के 4 दशक से भी ज्यादा प्राचीन भारतीय खजाने को वापस लाई है.

यही नही भारत सरकार लगातार विदेशों से देश की धरोहर को वापस लाने की कवायद में लगी हुई है. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, जर्मनी, कनाडा और इंग्लैंड से चुराई गई प्राचीन वस्तुएं प्राप्त की जा रही हैं, जहां लगभग 119 पुरावशेष पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं.

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