Assembly Banner 2021

Tamil nadu Assembly Elections: तमिलनाडु की राजनीति में भी दिखने लगा है बड़ा बदलाव

राजनीतिक पत्रकार अनंत विजय कहते हैं कि इन दिनों राजनीतिक दलों के बीच ज्यादा बड़ा हिंदू दिखने की दौड़ चल रही है.

राजनीतिक पत्रकार अनंत विजय कहते हैं कि इन दिनों राजनीतिक दलों के बीच ज्यादा बड़ा हिंदू दिखने की दौड़ चल रही है.

Tamil nadu Assembly Elections: बीजेपी ने डीएमके के हिंदू विरोधी होने का अपना अभियान इतने आक्रामक तरीके से चलाया कि स्टालिन को जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 14, 2021, 5:10 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. तमिलनाडु (Tamil nadu Assembly Elections 2021) में दस साल बाद सत्ता में लौटने के लिए संघर्ष कर रही डीएमके ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में एक बड़ा ऐलान किया है. पार्टी ने कहा है कि वो हिंदू मंदिरों के रख रखाव, मरम्मत के लिए एक हज़ार करोड़ का प्रावधान करेगी. साथ ही तीर्थ यात्राओं पर जाने वाले एक लाख लोगों को 25-25 हज़ार रुपये की वित्तीय मदद भी देगी. हालांकि पार्टी ने मस्जिदों और चर्चो के रखरखाव के लिए भी 200 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा की है.

लेकिन द्रविड़ आंदोलन से जन्मी और पेरियार से प्रभावित विचारधारा वाली पार्टी के लिए ये एक बड़ा परिवर्तन है. ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या उत्तर भारत के बाद दक्षिण की राजनीति में भी बड़ा बदलाव आ रहा है. ये सवाल इसलिए भी वाजिब नजर आता है क्योंकि डीएमके के सबसे बड़े नेता और वर्तमान मुखिया स्टालिन के पिता करुणानिधि ने रामसेतु पर भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए थे और यहां तक कहा था कि क्या भगवान राम इंजीनियर थे, जो भारत से श्रीलंका तक पुल बना दिया था.

अपना संगठन मजबूत करने में जुटी बीजेपी
इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए सूबे की राजनीति में कुछ महीने पहले के घटनाक्रमों को देखते हैं. राज्य में बीजेपी का एक भी विधायक या सांसद नहीं है. बावजूद इसके बीजेपी अपना संगठन मजबूत करने में काफी समय से जुटी है. पिछले साल नवंबर माह में भगवान मुरुगन के भक्तों के लिए पूरे राज्य में वैतरणी यात्रा का आयोजन किया था. इस दौरान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एल मुरुगन ने हिंदू हितों की रक्षा का आह्वान करते हुए डीएमके और स्टालिन पर हिंदू देवी देवताओं के अपमान का भी आरोप लगाया.
यहां ये भी महत्वपूर्ण है कि इसी साल जनवरी में तमिलनाडु की एआईएडीएमके सरकार ने भगवान मुरुगन के सालाना त्योहार थाईपुसम पर सार्वजनिक छुट्टी का भी ऐलान किया था. बीजेपी ने डीएमके के हिंदू विरोधी होने का अपना अभियान इतने आक्रामक तरीके से चलाया कि स्टालिन को जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने कहा कि डीएमके कभी भी हिंदुओं के खिलाफ नहीं रही है. पार्टी सिर्फ ये सवाल उठाती है कि गलत काम करने वाले मंदिरों की शरण नहीं ले सकते. तमिलनाडु में अब तक जाति आधारित राजनीति का बोल बाला रहा था लेकिन बीजेपी की आक्रामक रणनीति ने उसमें बदलाव का संकेत दिखा दिया. शायद यही कारण है कि महान समाज सुधारक ईवी रामास्वामी जिन्हें हम पेरियार के नाम से जानते हैं, उसके द्रविडर कझगम से जन्मी डीएमके विचारधारा में भी अब बदलाव दिख रहे हैं.



ये भी पढ़ेंः- राकेश टिकैत ने प्रयागराज पहुंचकर भरी हुंकार, कहा- दिसंबर तक चल सकता है किसान आंदोलन

राजनीतिक गलियारों में ज्यादा बड़ा हिंदू दिखने की दौड़ा!
राजनीतिक पत्रकार अनंत विजय कहते हैं कि इन दिनों राजनीतिक दलों के बीच ज्यादा बड़ा हिंदू दिखने की दौड़ चल रही है. राजनीति में बड़ा सामाजिक बदलाव आ रहा है, तो तमिलनाडु की राजनीति कब तक और कहां तक इससे अछूती रहेगी.

दूसरा प्रशांत किशोर जैसे इलेक्शन मैनेजर जहां भी जाते हैं, वो हिंदुत्व को बढ़ाने पर जोर देते हैं. क्योंकि इनका कार्य अपने क्लाइंट (वो राजनीतिक दल जिसके लिए काम कर रहे हैं) को जीत दिलाना होता है और तीसरी जरूरी बात अब चुनाव में सिर्फ एक "वाद" ही महत्वपूर्ण बचा है, वो है "वोटवाद". ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल की विचारधारा कहीं पीछे बहुत पीछे छूट जाती है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज