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गोबर, मिट्टी और दालों से बने नए घर में इसलिए कुमार विश्वास का रंग हो गया सांवला!

गोबर, मिट्टी और दालों से बने नए घर में इसलिए कुमार विश्वास का रंग हो गया सांवला!

कवि कुमार विश्वास ने केंद्र सरकार और किसान संगठनों से मिल-बैठकर आपसी बातचीत के जरिए हल निकालने की गुजारिश की है.

कवि कुमार विश्वास ने केंद्र सरकार और किसान संगठनों से मिल-बैठकर आपसी बातचीत के जरिए हल निकालने की गुजारिश की है.

कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) ने जब गोबर, मिट्टी, चूना, दाल और दूसरी चीजों का जिक्र घर को बनवाने में किया तो उसके बाद उनके घर के फोटो देखते ही देखते सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल होने लगे थे.

    नई दिल्ली. हिंदी (Hindi) के जाने-माने कवि कुमार विश्वास का रंग सांवला हो गया है. ऐसा उनके नए घर में आने से हुआ है. एक ट्वीट (Tweet) कर उन्होंने यह जानकारी दी है. कुमार ने हाल ही में मोदी नगर (Modi Nagar) के भनेर गांव में नया घर बनाया है. नए घर की खासियत यह है कि इसे बनाने में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है. कुमार ने यह भी बताया कि उनके सांवले होते रंग के बारे में उन्हें उनके घर वालों ने टोका है. घर वालों का कहना है कि धूप के चलते उनका रंग सांवला हो गया है. जिस पर कुमार (Kumar Vishwas) ने कविता के माध्यम से ही गाकर घर वालों को जवाब भी दिया है. वहीं उनके फैंस भी कई सवाल कर रहे हैं.

    कवि कुमार विश्वास ने किया है यह ट्वीट

    कुमार विश्वास ने ट्वीट में लिखा, 'घरवालों का कहना है कि kvKutir (यह कुमार के नए घर का नाम है.)  की धूप में मेरा चेहरा और साँवला हो गया है! मेरा कहना है कि धूप और बारिशों में बेलौस भटकने वालों के रंग गाढ़े नहीं बल्कि अनुभव की धूप-छांव से पक्के ही होते हैं! अब जो है सो है... पूछते रहिए 'गोरे नंद, जसोदा गोरी, तू कत स्याम सरीर..?'



    कुमार विश्वास ने ट्विटर पर अपनी प्रोफाइल पिक्चर भी बदल दी है. अब वो महरून कलर की वूलन जर्सी में चश्मा लगाए नज़र आ रहे हैं.

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    कुमार ने खुद बताया किसलिए गोबर, मिट्टी और दालों बनवाई हैं दीवारें

    जब एक फैन ने कुमार विश्वास से इस मकान की दीवार की खासियतों के बारे में पूछा तो कुमार ने जवाब देते हुए एक ट्वीट में बताया कि दीवार पर हो रहे इस प्लास्टर को वैदिक प्लास्टर कहते हैं. इसमें सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

    यह प्लास्टर सिर्फ पीली मिट्टी, बालू, गोबर, चूना, इस्तेमाल में न आने वाली दालों का चूरा, लसलसे पेड़ों (लसोड़े, आंवला, गूलर, शीशम) के अवशेष मिलाए गए हैं. यह पूर्णतः एंटीबैक्टिरियल व तापमान नियंत्रक है. हमारे पूर्वजों की वास्तुकला को पुनर्जीवित किया है.

    Tags: Hindi, Kumar vishwas, Social media, Twitter

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