GST से नोटबंदी तक अरुण जेटली के वो बड़े फैसले, जिन्होंने 'भारत' को बना दिया 'न्यू इंडिया'

बीजेपी (BJP) नेता और पूर्व वित्त मंत्री (Finance Minister) अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने अपने कार्यकाल में जीएसटी (GST) और नोटबंदी (Note ban) जैसे कई अहम फैसले लिए.

News18Hindi
Updated: August 25, 2019, 9:51 AM IST
GST से नोटबंदी तक अरुण जेटली के वो बड़े फैसले, जिन्होंने 'भारत' को बना दिया 'न्यू इंडिया'
अरुण जेटली का शनिवार को दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया.
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Updated: August 25, 2019, 9:51 AM IST
बीजेपी (BJP) नेता और पूर्व वित्त मंत्री (Finance Minister) अरुण जेटली (Arun Jaitley) अब हमारे बीच नहीं रहे. लंबी बीमारी के बाद अरुण जेटली ने शनिवार को एम्स (AIIMS) में अपनी अंतिम सांसें लीं. अरुण जेटली न केवल बीजेपी के कद्दावर नेता थे, बल्कि उनके वित्त मंत्री रहते हुए लिए गए कई अहम फैसलों ने देश का रुख ही बदल दिया. अरुण जेटली को इतिहास बदलने वाला नेता कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा.

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने कार्यकाल में कई बड़े फैसले लिए, जिनकी मांग काफी समय से की जा रही थी. बात चाहे जीएसटी की हो या फिर नोटबंदी जैसे कड़े फैसले लेने की. जब कभी भी जेटली कोई बड़ा कदम उठाते थे तो उसके फायदे और नुकसान के बारे में गहन मंथन करते थे. आइए जानते हैं पूर्व वित्त मंत्री और दिवंगत नेता अरुण जेटली के कार्यकाल में लिए गए उन अहम फैसलों के बारे में जिन्होंने भारत को न्यू इंडिया में किया तब्दील...

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पूरे देश में जीएसटी लागू करने का काम अरुण जेटली के कार्यकाल में किया गया.


जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स)

भारत में कुछ साल पहले तक सेल्स टैक्स और दूसरे टैक्सों को मिलाकर बहुत सारे टैक्स हुआ करते थे. इन सभी टैक्स केा मिलाकर एक टैक्स, जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) बनाने का काम अरुण जेटली के कार्यकाल में किया गया. हालांकि इस टैक्स को पूरे देश में लागू करने के लिए सभी राज्यों की रजामंदी की जरूरत थी. उस वक्त एक नेशनल काउंसिल बनाई गई थी. इस काउंसिल में सभी राज्यों के वित्त मंत्री को शामिल किया गया था. सभी राज्यों की बात सुनकर उन्हें जीएसटी के लिए मनाना एक बड़ी बात थी. अरुण जेटली ने सभी राज्यों को एकमत किया और 1 जुलाई 2017 से पूरे देश में जीएसटी को लागू किया गया.

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अरुण जेटली ने वित्त मंत्री रहते हुए वन रैंक वन पेंशन लागू किया था.


वन रैंक वन पेंशन
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पिछले काफी समय से सैनिक वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहे थे. कई सरकारें आईं और चली गईं लेकिन किसी ने भी इसे लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाई. इस काम में सबसे बड़ी मुश्किल थी कि उनका वित्तीय पक्ष कैसे व्यवस्थित किया जाए. मोदी सरकार के वित्त मंत्री के रूप में अरुण जेटली ने तब के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर के साथ मिलकर इसकी योजना तैयार की और जो रास्ता निकाला वह काबिले तारीफ था. वन रैंक वन पेशन की योजना को हरी झंडी दिखाई गई और सैनिकों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो सकी.

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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रेल बजट को आम बजट के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई


रेल बजट को आम बजट के साथ मिलाना
रेल बजट को आम बजट के साथ जोड़कर पेश करना भी आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव बना. रेलवे को कभी भी राजस्व लाने वाले मंत्रालय के तौर पर नहीं देखा गया. हालांकि रेलवे की जरूरतें लगातार बढ़ती गईं. ऐसे में रेलवे में सुधार और इसमें पब्लिक प्राइवेट साझेदारी को बढ़ाने और राजस्व हासिल करने के लिए कई अहम कमद उठाने जरूरी थे. रेल बजट को आम बजट से जोड़ने से काफी फायदा हुआ और रेलवे के नुकसान को भरने और उसके लिए नई योजनाओं को तैयार करने में मदद मिली.

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पीएम मोदी की अहम जनधन योजना को अरुण जेटली ने पूरे देश में लागू कराया.


जनधन योजना ने गरीबों को दिलाया हक
साल 2014 बीजेपी के सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर गरीब परिवार के पास बैंक खाता होने पर दिलचस्पी दिखाई. वित्त मंत्री के रूप में इस योजना को पूरा करने की ज़िम्मेदारी अरुण जेटली के पास थी. जनधन योजना को विश्व में एक ऐसा बड़ा कार्यक्रम माना जाता है, जिसके माध्यम से डायरेक्ट बेनेफिट सिस्टम को लागू करने में मदद मिली. इस योजना को पूरे देश में बेहतर तरीके से लागू करने अरुण जेटली की भूमिका अहम रही.

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नोटबंदी के बाद अरुण जेटली को राजनीतिक दलों के विरोध का सामना करना पड़ा.


कालेधन को रोकने के लिए नोटबंदी का फैसला
कालेधन पर लगाम कसने के लिए नोटबंदी सबसे बड़े फैसलों में जाना जाता है. इस फैसले ने हर सेक्टर के लोगों को नाराज किया. बड़े राजनीतिक दल से लेकर व्यावसायिक घरानों तक ने इसका विरोध किया. नोटबंदी के बाद करीब तीन लाख शेल कंपनियों पर कार्रवाई हुई. नोटबंदी की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना और नए सिर से नए नोट जारी करना आसान काम नहीं था. उस वक्त बहुत से लोगों ने अरुण जेटली की आलोचना की थी. इसके बावजूद लगातार जेटली हर बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक करते रहे और कुछ ही दिनों में हालात बेहतर हो गए. नोटबंदी को उस दौरान बीजेपी के लिए गलत कदम करार दिया गया, लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पहले से बड़ी जीत दर्ज की.

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First published: August 25, 2019, 9:18 AM IST
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