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NCB के शिकंजे में आया भारत का पहला डार्क नेट ड्रग्स सिंडिकेट का बड़ा खिलाड़ी

NCB के शिकंजे में आया भारत का पहला डार्क नेट ड्रग्स सिंडिकेट का बड़ा खिलाड़ी

गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम दीपू सिंह है जो कि लखनऊ का रहने वाला है और एमिटी से पढ़ाई कर चुका है

गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम दीपू सिंह है जो कि लखनऊ का रहने वाला है और एमिटी से पढ़ाई कर चुका है

जांच में पता चला की मुंबई के एक फॉरेन पोस्ट ऑफिस से इन्हीं ड्रग्स की खेप ब्रिटेन जाने वाली थी तब उस खेप को बरामद किया गया. इसमें 9 हजार ड्रग्स की टेबलेट पहले पकड़ी गई फिर देशभर में रेड कर और अलग-अलग खेप बरामद की गईं.

नई दिल्ली. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (Narcotics Control Bureau) के इतिहास में पहली बार एक ऐसे ड्रग्स सिंडिकेट (Drugs Syndicate) का पर्दाफाश किया है जिसके तार देश ही नही बल्कि दुनिया के कई देशों से जुड़े थे. दिसंबर में इस ऑपरेशन की शुरुआत की गई और देश भर की तमाम एजेंसियों के साथ मिलकर इस ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश किया गया जो (डार्क नेट) से चल रहा था.

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डिप्टी डायरेक्टर आरएन श्रीवास्तव और जोनल डायरेक्टर के पीएस मल्होत्रा के मुताबिक एक स्पेशल 26 टीम बनाई गई. जिसमें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी NCB के तेजतर्रार अफसरों को शामिल किया गया. NCB के अधिकारियों के मुताबिक केटामीन ट्रोमाड़ाल नाम की ड्रग्स की खरीद फरोख्त के न केवल रूट्स बल्कि उसके सबसे बड़े सप्लायर को गिरफ्तार किया गया है.

जांच में मिले अहम सुराग
जांच में पता चला की मुंबई के एक फॉरेन पोस्ट ऑफिस से इन्हीं ड्रग्स की खेप ब्रिटेन जाने वाली थी तब उस खेप को बरामद किया गया. इसमें 9 हजार ड्रग्स की टेबलेट पहले पकड़ी गई फिर देशभर में रेड कर और अलग-अलग खेप बरामद की गईं. इसके साथ ही 22 हजार टैबलेट और बरामद की गईं. यहां से एनसीबी ने डार्क नेट से चल रहे ड्रग्स की खरीद फरोख्त के सबसे बड़े सौदागर पर शिकंजा कसा.

गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम दीपू सिंह है जो कि लखनऊ का रहने वाला है और एमिटी से पढ़ाई कर चुका है. दीपू सिंह ने डार्क नेट बाजार में अच्छी खासी घुसपैठ बना रखी थी. इसी डार्क नेट पर दिल्ली और लखनऊ से बैठकर दीपू सिंह ड्रग्स की करोड़ों रुपए की डील न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के करीब आधा दर्जन देशों में कर रहा था.

NCB
दीपू सिंह की फाइल फोटो


एनसीबी के मुताबिक इंटरनेट के जरिये खासकर डार्क नेट के जरिए हो रही ड्रग्स की अब तक की सबसे बड़ी खरीद फरोख्त का भंडाफोड़ किया गया. बात दें कि अब तक दीपू सिंह अपने दो डार्क नेट एकाउंट्स से करीब 600 अलग-अलग किस्म के ड्रग्स पार्सल यूरोपियन और अन्य देशों मे भिजवा चुका है. जिसकी अंतराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है.

आखिर क्या होता है डार्क नेट
दरअसल डार्क नेट इंटरनेट का 96 प्रतिशत हिस्सा है जिसे पकड़ पाना बेहद मुश्किल है. जिसका दुनिया भर में बड़े से बड़े अपराध को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. डार्क नेट की दुनिया में मौजूद लोग गोपनीय तरीके से तमाम अवैध धंधों को अंजाम दे रहे हैं. डार्क नेट पर होने वाली हर डील केवल वर्चुअल मनी के जरिये ही की जाती है ताकि कोई भी खुफिया एजेंसी इन तक पहुंच न सके.

NCB देशभर में डार्क नेट से जुड़े दीपू सिंह के कई करीबियों की भी तलाश कर रही है. बता दें की दुनिया वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में डार्क नेट पर होने वाले तमाम अपराधों में 63 प्रतिशत क्राइम केवल ड्रग्स की खरीद फरोख्त से जुड़े हैं. और सबसे ज्यादा देश का युवा डार्क नेट का इस्तेमाल कर रहा है. जो आसानी से इंटरनेट पर ट्रॉउ ब्राउजर डाउनलोड कर डार्क नेट पर एकाउंट बना कर उसे गैर कानूनी तरीके से कमाई का जरिया बना रहा है.

जबकि ऐसा नहीं है की डार्क नेट पर केवल गैर कानूनी काम ही होता है देश भर की कई एजेंसियां डार्क नेट के जरिए कई बड़े आपराधिक मामलो में सुराग इकट्ठा करती हैं बल्कि देश की सुरक्षा पर भी नजर रखती हैं. सबसे पहले डार्क नेट का इस्तेमाल अमेरीकन नेवी ने अपने ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए किया था.

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Tags: Drug procurement scam, Narcotics Control Bureau

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