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Bihar Assembly election: चौथी बार सीएम बनने के लिए क्या नीतीश कुमार के सामने कोई चुनौती है?

Bihar Assembly election: चौथी बार सीएम बनने के लिए क्या नीतीश कुमार के सामने कोई चुनौती है?

सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा में विपक्ष के हंगामें को गलत बताया है. (फाइल फोटो)

सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा में विपक्ष के हंगामें को गलत बताया है. (फाइल फोटो)

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव में बाढ़ और विस्थापन कोई बड़ा मुद्दा नहीं होगा. वहां वोट तो जाति, उप जाति और समुदाय के आधार पर पड़ता है और पड़ेगा.

नई दिल्ली. अभी तक के हालात बता रहे हैं कि बिहार में जेडीयू-बीजेपी (JDU-BJP) गठबंधन विपक्ष के मुकाबले मजबूत है. लेकिन एक बात तय है कि अब नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की इमेज पांच साल पहले जैसी नहीं है. चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि भ्रष्टाचार, मुजफ्फरपुर कांड, बाढ़ और कोरोना पर सरकार के रवैये से जनता में उनकी इमेज खराब हुई है. ऐसे में चौथी बार सीएम बनने के रास्ते में क्या उनके सामने कोई चुनौती आ सकती है.

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) के निदेशक और चुनाव विश्लेषक संजय कुमार कहते हैं कि विपक्ष तो अभी जेडीयू-बीजेपी को चुनौती देने लायक दिख नहीं रहा. अब तक के हालात को देखते हुए कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है वो खुद बीजेपी है. बीजेपी ने अगर जेडीयू से ज्यादा सीटें जीत लीं तो नीतीश कुमार के लिए फिर से सीएम बनने में अड़चन आ सकती है.

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बिहार की चुनावी राजनीति पर ‘पोस्ट मंडल पॉलिटिक्स इन बिहार’ नामक किताब लिख चुके कुमार कहते हैं कि नीतीश कुमार चाहेंगे कि उन्हें गठबंधन में बीजेपी से अधिक सीटों पर लड़ने का मौका मिले. उसके बाद एक चुनौती आएगी बीजेपी से ज्यादा सीटें जीतने की. जहां तक इमेज का सवाल है तो कहा जा सकता है कि कोरोना और बाढ़ को लेकर जनता में उनकी छवि पहले से खराब हुई है. नीतीश कुमार के नाम पर जो दीवानापन था. वो अब नहीं दिखता.

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पीएम मोदी के साथ नीतीश कुमार (File Photo)


हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया कहते हैं कि बिहार में नीतीश कुमार नहीं तो कौन? का सवाल विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly election-2020)   में कायम रहेगा. क्योंकि तेजस्वी तो अभी ठीक से अपनी पार्टी तक नहीं संभाल पा रहे हैं. वो परिपक्व नहीं हैं. उनमें संगठनात्मक चातुर्य नहीं है. रही बात नीतीश कुमार की मौजूदा इमेज की तो बिहार चुनाव में उनका चेहरा जरूर होगा. लेकिन चुनाव बीजेपी लड़ रही होगी. नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की छत्रछाया में चुनाव लड़ रहे होंगे. इसलिए इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा.

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भदौरिया कहते हैं कि बिहार में बाढ़ (Flood) और विस्थापन कोई बड़ा मुद्दा नहीं होगा. क्योंकि ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा है. दुर्भाग्य से भ्रष्टाचार का मुद्दा भी चुनावी सभाओं में अच्छा लगता है. वहां वोट तो जाति, उप जाति और समुदाय के आधार पर पड़ता है और पड़ेगा. हां, एक ‘उम्मीद’ का भी फैक्टर है. जिसमें कोई भी पार्टी बीजेपी का मुकाबला नहीं कर सकती. लड़ाई तो तब साफ होगी जब विपक्ष अपना एक नेता और एजेंडा तय करके मैदान में आ जाए.

Tags: Bihar Election 2020, BJP, CM Nitish Kumar, Jdu, RJD

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