बिहार विधानसभा चुनाव: पीएम मोदी के बल पर नीतीश सरकार विकास की राजनीति में उतरी

पीएम मोदी द्वारा खुद की तारीफ वाले पोस्टर लगवाकर सीएम नीतीश कुमार ने संकेत दिए हैं कि उन्होंने अपनी चुनावी रणनीति बदल ली है. (फाइल फोटो)
पीएम मोदी द्वारा खुद की तारीफ वाले पोस्टर लगवाकर सीएम नीतीश कुमार ने संकेत दिए हैं कि उन्होंने अपनी चुनावी रणनीति बदल ली है. (फाइल फोटो)

Bihar assembly election 2020: पीएम मोदी ने बिहार के सतत विकास में नीतीश कुमार की पीठ थपथपाई है. पीएम मोदी ने बीजेपी और जेडीयू के बीच कलह को खत्म करने और एनडीए में रामविलास पासवन की लोकजन शक्ति पार्टी (Lokjan shakti Party) को शामिल करने के लिए भी नीतीश की प्रशंसा की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 11:31 PM IST
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केंद्र की राजनीति में बिहार की प्रासंगिकता के अपने अलग मायने हैं. बिहार में विधानसभा चुनाव (Assembly Election-2020) सिर पर है. सूबे में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दल 'जनता दल (यूनाइटेड)' (JDU) की सरकार है, जिसका प्रतिनिधित्व राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) कर रहे हैं. अक्टूबर और नवंबर में बिहार चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने मतदाताओं (Voters) को लुभाने के लिए कई इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं (Infrastructure Schemes) को बड़े पैमाने पर लॉन्च किया है.

विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रदेश में लॉन्च की गई कई योजनाएं और आर्थिक पैकेज का चुनाव परिणाम पर कितना असर पड़ेगा यह निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. चुनाव के दौरान बिहार सरकार ने जो मंडल राजनीति से निकलकर विकास की राजनीति की ओर कदम बढ़ाया है, इसे सरकार के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि चुनावों के दौरान हर राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए इसी स्तर पर काम करता नजर आता है, लेकिन पीएम मोदी के बारे में कहा जाता है कि वह गुजरात में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान चुनावों में इसी आधार मतदाताओं को लुभाने का काम करते आए हैं और अब इस लिस्ट में नीतीश कुमार का नाम भी शामिल हो गया है.

राज्य को 30 प्रोजेक्ट्स की सौगात
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच चरणों में 4,366 करोड़ के 30 प्रोजेक्ट्स की घोषणा की है. इन सभी प्रोजेक्ट्स पर बीती 10 सिंतबर से कार्य चल रहा है. इन 30 प्रोजेक्ट्स में मुख्यत: गंगा नदी पर बड़े पुल का निर्माण, हाईवे, कोसी में रेलवे पुल और पेट्रोलियम गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स जैसे मुद्दे शामिल हैं. इनमें से चुनाव के मद्देनजर एक साल पहले ही विशेष प्रोजेक्ट्स तैयार किए जा चुके हैं जिसमें बिहार के लिए 10 विशेष प्रोजेक्ट्स की नींव रखी गई है. इनमें 21 हजार करोड़ के पेट्रोलियम और गैस प्रोजेक्ट भी शामिल है. वहीं, सात प्रोजेक्ट्स विशेष रूप से जनता के लिए बनाए गए हैं, जिनमें से छह प्रोजेक्ट्स का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है.
दरभंगा में एम्स का प्रस्ताव


इसके अलावा पीएम मोदी ने छह महीने पहले दुर्गापुर-बांका क्षेत्र में 200 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाने के प्रोजेक्ट की भी आधारशिला रखी थी. पीएम ने 14,258 करोड़ के हाईवे प्रोजेक्ट की नींव भी रखी है, इसमें पटना रिंग रोड के बगल में महात्मा गांधी सेतू के लिए एक बड़े पुल का निर्माण किया जाएगा. राज्य के 45,945 गांव को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सर्विस से जोड़ने की भी योजना तैयार की गई है. साथ ही दरभंगा के लिए एम्स ( All India Institute of Medical Sciences) का प्रस्ताव पास किया है.

पीएम मोदी ने थपथपाई सीएम नीतीश की पीठ
इधर, पीएम मोदी ने बिहार के सतत विकास में नीतीश कुमार की पीठ थपथपाई है. पीएम मोदी ने बीजेपी और जेडीयू के बीच कलह को खत्म करने और एनडीए में रामविलास पासवन की लोकजन शक्ति पार्टी (Lokjan shakti Party) को शामिल करने के लिए भी नीतीश की प्रशंसा की है. बता दें कि मुख्यमंत्री ने राज्य में कई लघु, मध्यम और प्रमुख योजनाओं को लॉन्च करने के साथ अनुबंध अध्यापकों और डॉक्टरों को भी बड़ी राहत दी है.

एससी/एसटी वर्ग का रखा खास ख्याल
सीएम ने ग्रामीण विकास विभाग के लिए 67,700 करोड़ के प्रोजेक्ट्स और योजनाओं पर मुहर लगाई है, जिसमें सड़के, बिजली, पानी, शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों को जोड़ा है. इस प्रोजेक्ट को 'सात निश्चय' कार्यक्रम का नाम दिया गया है. इसके अलावा बिहार सरकार ने एससी/एसटी वर्ग के लिए विशेष रूप से स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाएं पर धरातल पर आकर काम करने की ठानी है.

सर्व शिक्षा अभियान के लिए बढ़ाया बजट
बता दें कि राज्य सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के बजट में भी समय-समय बड़ी वृद्धि की है. साल 2005 में सर्व शिक्षा अभियान के लिए 900 करोड़ रुपये दिए गए थे तो वहीं साल 2014 में इसमें केंद्र सरकार की सहायता से 7,800 करोड़ का आवंटन किया. हालांकि पहले भी बिहार में उच्च स्तर पर कई प्रोजेक्ट्स और योजनाओं को समय-समय पर लॉन्च किया गया है लेकिन जमीनी स्तर पर आने के बाद ये सभी प्रोजेक्ट्स और योजनाएं दम तोड़ते नजर आए हैं.

राज्य सरकार ने किया जनता को गुमराह
राज्य में विपक्ष भी चुनाव के लिए अपनी भूमिका तैयार करने में लगा हुआ है. बता दें कि नीतीश ने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (राष्ट्रीय जनता दल) के शासनकाल को जनता के लिए अंधकारमय बताया है. इधर, राजेडी के वरिष्ठ नेता मृत्युंजय तिवारी ने बिहार में चुनाव को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा 'पिछली बार पीएम मोदी के 1.25 लाख करोड़ के पैकेज के आधार पर राज्य सरकार ने जनता को गुमराह किया था, लेकिन हकीकत यह थी कि इनमें से 1.08 लाख करोड़ के 87 फीसदी पैकेज पुराने प्रोजेक्ट्स के थे, सिर्फ 10 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर ही काम किया गया.'

विपक्ष उठा सकता है सवाल
चुनाव के दौरान राज्य सरकार के इन प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करने पर चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर विपक्ष सवाल उठा सकता है, लेकिन चुनाव आयोग इन योजनाओं में कोई कानूनी संबंध न होने के चलते कुछ भी करने में समक्ष नहीं है. क्योंकि यह सरकार की सामान्यत: नीति-निर्माण की प्रक्रिया है लेकिन अगर सरकार इन्हें चुनावी माहौल के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए लॉन्च करती है तो यह चुनाव आचार सहिंता के उल्लंघन के दायरे में आएगा.
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