बिहार उपचुनाव रिजल्ट: नीतीश कुमार के री-यूनियन को भुनाने में नाकाम रही NDA

एनडीए में नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) की वापसी के रूप में महागठबंधन नैतिक जीत का दावा कर सकता है, क्योंकि पिछले चुनावों महागठबंधन जीत हासिल करने में नाकाम रही है.

आलोक कुमार | News18Hindi
Updated: March 14, 2018, 9:38 PM IST
बिहार उपचुनाव रिजल्ट: नीतीश कुमार के री-यूनियन को भुनाने में नाकाम रही NDA
बिहार उपचुनाव के किसी भी पार्टी के लिए निर्णायक संकेत देने में नाकाम रही.
आलोक कुमार
आलोक कुमार | News18Hindi
Updated: March 14, 2018, 9:38 PM IST
बिहार उपचुनाव के किसी भी पार्टी के लिए निर्णायक संकेत देने में नाकाम रही, क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (आरजेडी) के नेतृत्व में महागठबंधन और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व में एनडीए ने अपनी-अपनी सीटों को बरकरार रखा. जहानाबाद विधानसभा और अररिया लोकसभा सीट को जहां आरजेडी को जीत मिली, वहीं, भभुआ विधानसभा सीट पर बीजेपी का कमल खिला. तीनों विजयी उम्मीदवार, उन प्रतिनिधियों के रिश्तेदार थे, जिनके निधन के बाद उपचुनाव कराने की जरूरत पड़ी.

हालांकि, एनडीए में नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) की वापसी के रूप में महागठबंधन नैतिक जीत का दावा कर सकता है, क्योंकि पिछले चुनावों महागठबंधन जीत हासिल करने में नाकाम रही है.

अररिया लोकसभा सीट पर आरजेडी के सरफराज आलम ने बीजेपी के प्रदीप सिंह को 63000 से ज्यादा वोटों से हराकर जीत दर्ज की है. 2014 में जब चारों तरफ मोदी की लहर थी, तब इस सीट पर सरफराज आलम के पिता तसलीमुद्दीन की जीत का मार्जिन 1.4 लाख वोट का था. हालांकि, आरजेडी, जेडीयू 2014 का लोकसभा चुनाव हार गई थी.


अररिया सीट पर वोटों की गिनती के शुरुआती रुझानों में सरफराज बीजेपी उम्मीदवार से पीछे चल रहे थे, लेकिन आठवें राउंड की काउंटिंग के बाद वो काफी आगे निकल गए और आखिर तक बढ़त बनाए रखी. हालांकि, बीजेपी उम्मीदवार प्रदीप सिंह ने उन्हें कांटे की टक्कर दी. इस सीट पर आरजेडी की जीत हुई. बीजेपी दूसरे और जेडीयू तीसरे स्थान पर रही.

अररिया सीट आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की प्रतिष्ठित सीट थी. उनपर इस सीट को अपनी पार्टी में रखने का बड़ा दबाव भी था. खासकर तब जब उनके पिता और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव जेल में हैं. इस सीट के नतीजे से यह भी साफ होता है कि मुस्लिम-यादव (एमए) कॉम्बिनेशन ने आरजेडी के लिए वोट किया. इस सीट के कुल मतदाताओं में के मुसलमानों और यादवों का 40 और 10 फीसदी है. तेजस्वी ने दलित नेता जीतन राम मांझी को भी चुनाव में शामिल किया था, जिन्हें मतदान से पहले एनडीए ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था.


2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद लालू और नीतीश ने हाथ मिलाया और 2015 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की. हालांकि, दो साल से कम समय में ही लालू और नीतीश की राहें जुदा हो गईं. नीतीश अपने पुराने साथी बीजेपी के पास लौट गए. वैसे उपचुनाव नतीजों को देखें, तो कह सकते हैं कि नीतीश कुमार का यह री-यूनियन फेल रहा.

जहानाबाद विधानसभा सीट भी आरजेडी अपने पास रखने में कामयाब रही है. इस सीट से आरजेडी कैंडिडेट कुमार कृष्ण मोहन ने सुदय यादव को हराया है. इस सीट पर बीजेपी कैंडिडेट से आरजेडी उम्मीदवार की जीत का मार्जिन भी काफी ज्यादा है. हालांकि, भभुआ विधानसभा सीट पर बीजेपी 'कमल' खिलाने में कामयाब रही है. बीजेपी उम्मीदवार रानी रिंकी पांडेय ने कांग्रेस कैंडिडेट शंभू पटेल को 14866 वोटों से हराया है.

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