Bihar Election 2020: पहले चरण की पांच खास सीटों पर सबकी नजर, बताएंगी बिहार में सियासी हवा का रुख

Bihar election 2020: पहले चरण का मतदान बुधवार को जारी है.
Bihar election 2020: पहले चरण का मतदान बुधवार को जारी है.

Bihar Assembly Election 2020: पहले चरण में जेडी-यू 35 सीटों पर, जबकि बीजेपी 29 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. उधर महागठबंधन में राजद ने 42, जबकि कांग्रेस ने 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. आइए हम आपको उन पांच सीटों के बारे में बताते हैं जो राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 10:25 AM IST
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पटना.  बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Polls 2020) के पहले चरण में 16 जिलों के 71 विधानसभा क्षेत्रों के लिए कड़ी निगरानी और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुधवार सुबह सात बजे मतदान शुरू हो गया. इसमें लगभग 2.14 करोड़ मतदाता 1,066 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे. इन 71 सीटों में से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल-यूनाइटेड (जेडी-यू) 35 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 29 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 42 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी कांग्रेस में 20 सीटों पर उम्मीदवार हैं. आइए हम आपको उन पांच सीटों के बारे में बताते हैं जो राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं.

गया- बीते 30 सालों में कोई भी भाजपा के इस किले को तोड़ नहीं पाया. बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने लगातार छह बार इस सीट से जीत हासिल की है. राज्य की राजनीति में उनका कद इतना महत्वपूर्ण है कि हर बार एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. यह सीट क्षेत्र में भाजपा की लोकप्रियता का मानक होगी.

दिनारा- यहां जदयू के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री जय कुमार सिंह का घर है. वह यहां से दो बार जीत चुके हैं और अब हैट्रिक लगाना चाहते हैं. यहां से लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के टिकट पर उनके खिलाफ भाजपा के बागी राजेंद्र सिंह मैदान में हैं. केवल 2,600 वोटों से पिछला चुनाव हारने वाले सिंह भाजपा की बिहार इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं.



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कहलगांव- इस सीट पर कांग्रेस ने 12 बार जीत दर्ज की है, पार्टी के बिहार इकाई के प्रमुख सदानंद सिंह को 1967 और 2015 के बीच नौ बार विजेता घोषित किया गया है. साल 2015 में, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी लोजपा के नीरज कुमार को 20,000 मतों से हराया था. सिंह यहां इतने लोकप्रिय हैं कि वे 1977 के चुनाव में भी जीच गए थे.

मोकामा- इस सीट से स्थानीय नेता और विधायक अनंत सिंह राजद के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. साल 2005 से 2010 तक, सिंह ने जद (यू) के उम्मीदवार के रूप में सीट जीती. साल 2015 में जदयू से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय के रूप में जीत हासिल की.भूमिहार और यादवों के वर्चस्व वाली मोकामा विधानसभा सीट ने केवल स्थानीय मजबूत नेता को  विधायक चुना है. 90 के दशक में सिंह के भाई दिलीप जनता दल के टिकट पर यहां से विधायक बने. तब से सिंह चार बार इस सीट से जीत चुके हैं.

लखीसराय- इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी. लगातार दो बार सीट जीतने के बाद श्रम संसाधन विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा यहां भाजपा के उम्मीदवार हैं. पिछले चुनाव में यहां भाजपा के विजय कुमार सिन्हा और जद (यू) के रामानंद मंडल के बीच एक करीबी लड़ाई थी.
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