बिहार चुनाव में राजद-कांग्रेस के साथ वाम दलों के महागठबंधन के क्या हैं मायने?

बिहार चुनाव में वाम दलों का राजद के साथ गठबंधन हुआ है.
बिहार चुनाव में वाम दलों का राजद के साथ गठबंधन हुआ है.

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar election 2020) में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) या सीपीआई (एमएल) ने अपने राजनीतिक विरोधी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ गठबंधन किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 31, 2020, 8:46 AM IST
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सुहास मुंशी

नई दिल्ली/पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) में संविधान को बचाने के नाम पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) या सीपीआई (एमएल) ने अपने राजनीतिक विरोधी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ गठबंधन किया है. माना जा रहा है कि यह भाजपा-जद (यू) गठबंधन का दबाव हो सकता है. लेफ्ट के हिस्से में आई 29 सीटों में से CPI (ML) 19 सीटों पर, सीपीआई छह सीटों पर और सीपीएम चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है. भोजपुर की पार्टी कहे जाने के बावजूद, CPI (ML)) को सीवान, अरवल, जहानाबाद, ग्रामीण पटना और कटिहार में सीटें दी गई हैं.

कई राजनीतिक जानकारों ने इन चुनावों में CPI (ML) को 'एक्स-फैक्टर' कहा है. पार्टी ने साल 2000 में छह सीटें, साल 2005 में सात, फिर उसी साल अक्टूबर में पांच सीटों पर चुनाव जीते. साल 2010 के चुनावों में इसके हिस्से एक भी सीट नहीं आई, जबकि साल 2015 में इसके तीन उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की.



हमारे आने से आई स्थिरता- CPI (ML)
News18 को दिए एक इंटरव्यू में पार्टी के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, CPI (ML) ने गठबंधन में दृढ़ता की भावना लाई है. विशेष रूप से अति पिछड़ा वर्ग (MBC) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) जीतनराम मांझी के नेतृत्व में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और महागठबंधन से उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के निकलने के बाद कई लोगों ने इसे अस्थिर करार दिया था.'

लेकिन हम (एस) और रालोसपा के ठीक उलट CPI (ML) महागठबंधन के लिए अधिक मूल्यवान है क्योंकि कैडर-आधारित पार्टी होने के नाते, इसके वोट आरजेडी और कांग्रेस के उम्मीदवारों को मिलने की अधिक संभावना है.

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'वोट ट्रांसफर करने का ट्रैक रिकॉर्ड भी काफी अच्छा'
एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि उन्हें लगता है कि 'पार्टी को पहले ही वर्षों में इतनी गिरावट का सामना करना पड़ा है कि उसे अपने दम पर बड़ी जीत का भरोसा नहीं था और इसीलिए उसने राजद का साथ चुना.' पटना विश्वविद्यालय के पूर्व शिक्षक नवल किशोर चौधरी ने कहते हैं कि 'राजद भी इतना बड़ा नहीं है कि वह CPI (ML) के कैडर्स को अपने साथ आने की बात कह सकता है. खास तौर से  लालू-राबड़ी के 15 साल के शासनकाल में जो हुआ उसके आधार पर तो बिल्कुल नहीं. तब बहुत सारे माले नेता राजद में शामिल हो गए. मांझी और कुशवाहा के बाहर निकलने के बाद तेजस्वी पर भी दबाव बढ़ा तो यह दोनों के लिए एक अच्छा अवसर था.'उन्होंने कहा कि वामपंथी गठबंधन के लिए विश्वसनीय भावना रखते हैं जिसकी महागठबंधन को जरूरत भी थी.

सचिंद्र नारायण ने कहा 'CPI (ML) के प्रमुख समर्थक सबसे पिछड़े वर्गों में से हैं, जो कुशवाहा और मांझी के दूर जाने से बनी खाली जगह में स्पेस बना सकते हैं. राजद के मुस्लिम-यादव कोर वोट बेस से वाम दलों को मदद मिलेगी. CPI (ML) का एमबीसी कोर वोट कांग्रेस और आरजेडी को मदद करेगा. CPI (ML) का वोट ट्रांसफर करने का ट्रैक रिकॉर्ड भी काफी अच्छा है.'

वामपंथी दल पहले से ही राजनीतिक एजेंडे के शीर्ष पर कृषि ऋण माफी और रोजगार के मुद्दों पर पकड़ बनाने में सफल रहे हैं.  भट्टाचार्य ने News18 को बताया 'अगर आप हमारे गठबंधन के  चार्टर को देखेंगे तो आपको वामपंथियों की एक अलग छाप दिखाई देगी. सभी मुद्दे, चाहे वे कृषि ऋण माफी हो, सुरक्षित रोजगार हो, समान काम के लिए समान वेतन हो, ऐसे मुद्दे हैं जो कामगार वर्ग में मजबूत जगह बनते हैं. यह अपने आप में हमारे लिए एक सफलता है, कि हम जिन मुद्दों पर इतने वर्षों से लड़ रहे हैं, उन्हें इस एजेंडा में प्रमुखता मिली. जब हम जीतते हैं और इन वादों को लागू किया जाता है तो राज्य के लोगों में बड़ा बदलाव होगा.'
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