Bihar Election 2020: लोजपा की एनडीए में वापसी मुश्किल, फ्लॉप शो के बाद आसान नहीं चिराग की राह

लोक जनशक्ति पार्टी ने चिराग पासवान की अगुवाई में चुनाव लड़ा
लोक जनशक्ति पार्टी ने चिराग पासवान की अगुवाई में चुनाव लड़ा

Bihar Election Results 2020: बिहार चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और हारने के बाद अभी सबसे ज्यादा चर्चा में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) है. लोजपा इस चुनाव में केवल एक सीट जीती है और कई सीटों पर जदयू को हराने में भूमिका निभाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 2:52 PM IST
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पटना. लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) के नतीजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की विजय' करार दिया और कहा कि लोगों ने उनपर भरोसा जताया है. लोजपा इस चुनाव में केवल एक सीट जीती है और कई सीटों पर जदयू को हराने में भूमिका निभाई है. लोजपा ने बिहार विधानसभा में 140 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किये थे और उसे 5.68 प्रतिशत मत मिले. इस चुनाव में जदयू का वोट शेयर भी थोड़ा बढ़ा है.

वहीं चुनावी नतीजे आने के बाद पासवान ने ट्वीट किया कि उन्हें गर्व है कि उनकी पार्टी सत्ता के लिए झुकी नहीं. उन्होंने कहा, 'लोजपा के सभी उम्मीदवारों ने अपने दम पर बिना किसी गठबंधन के संघर्ष किया. पार्टी का मत प्रतिशत बढ़ा है. वह चुनाव में ‘बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट’ के नारे के साथ उतरी थी. वह हर जिले में ताकतवर होकर उभरी है. इससे पार्टी को भविष्य में फायदा होगा.'

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लोजपा का वर्तमान छोड़ भविष्य देखें तो यह राह बहुत कठिन हो सकती है. एलजेपी अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA में शायद ही वापसी कर पाए. बीते विधानसभा चुनाव में लोजपा को 2 सीटें मिली थीं लेकिन इस बार मैथानी विधानसभा सीट पर राज कुमार सिंह की जीत के अलावा पार्टी के हिस्से और कोई सीट नहीं आई.
साल 2004 में लड़ा था पहला चुनावसाल 2000 में गठित हुई लोजपा ने पहला चुनाव साल 2004 का लोकसभा लड़ा था. तब लेकर पहली बार लोजपा ने इतना खराब चुनाव लड़ा है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार लोजपा के कुछ सूत्रों ने कहा कि अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर कई सीनियर लीडर साथ नहीं थे. उन्हें पहले ही खराब प्रदर्शन की आशंका थी.हालांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि चिराग और उनकी पार्टी ने एनडीए के वोट शेयर में बड़ी सेंध मारी है. खासतौर से जेडीयू को बड़ा नुकसान हुआ है. दो बड़े विरोधी खेमों के बीच पिसकर लोजपा प्रमुख का किंगमेकर और चुनावी केंद्र बिन्दु बनने का सपना भी अधूरा ही रह गया.चिराग के लिए रास्ता इसलिए और कठिन हो जा रहा है क्योंकि अगर उन्हें एनडीए में वापसी चाहिए तो उन्हें बीजेपी को विश्वास दिलाना होगा कि वह गठबंधन के लिए विश्वसनीय साबित होंगे. संभव है कि लोजपा की एनडीए में वापसी इस आधार पर हो जाए कि वह दलितों के एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है. लेकिन अब यह चिराग को विश्वास दिलाना कि वह गठबंधन का साथ हमेशा देंगे.बमुश्किल एक साल पहले अध्यक्ष बने चिरागरिपोर्ट के अनुसार पार्टी के एक नेता ने कहा कि 'सबको साथ रखना चुनौती होगी. पार्टी ने अपना नेता खो दिया है जो सबको एक साथ लेकर चलते थे. कोई भी उनसे असहमत नहीं होता था.'बता दें चिराग बमुश्किल एक साल पहले ही लोजपा के अध्यक्ष बने थे. पार्टी के कुछ नेताओं ने कहा कि उन्हें 2010 और 2015 के विधानसभा चुनावों की तुलना में बेहतर परिणाम की उम्मीद है जब एलजेपी ने क्रमशः तीन और दो सीटों पर जीत दर्ज की थी.


'ऐसे रिजल्ट की नहीं थी उम्मीद'
एक लोजपा नेता ने कहा कि ' भाजपा के कुछ प्रमुख बागियों को उनके गढ़ से टिकट दिया. पूरे राज्य में अध्यक्ष की रैलियों पर जो रिस्पॉन्स मिला था, उससे इस तरह के परिणाम की उम्मीद नहीं थी.'

एलजेपी ने 2005 के चुनाव में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था जब उसने 29 सीटें जीती थीं. 12.6% वोट शेयर हासिल कर राजद को सत्ता में लौटने से रोक दिया था. इसी साल अक्टूबर-नवंबर 2005 में हुए चुनावों में, एलजेपी केवल 10 सीटें जीत सकी थी.
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