Bihar Election 2020: बिहार में आरजेडी ही कर देगी बीजेपी की 'ख्वाहिश' पूरी!

महागठबंधन की पार्टियों में सबसे मजबूत राजद अपनी ज्यादातर सीटों पर जद (यू) के खिलाफ लड़ रही है. (फाइल फोटो)
महागठबंधन की पार्टियों में सबसे मजबूत राजद अपनी ज्यादातर सीटों पर जद (यू) के खिलाफ लड़ रही है. (फाइल फोटो)

Bihar Election 2020: बिहार चुनाव में भाजपा भले ही नीतीश कुमार को इस विश्वास में लेने की कोशिश कर रही हो कि सीटें चाहे जितनी भी आएं, मुख्यमंत्री वही रहेंगे. इस बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी इस चुनाव में जदयू के छोटे भाई की भूमिका से बाहर निकल सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 9:32 AM IST
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नई दिल्ली/पटना. बिहार चुनाव (Bihar election 2020) के लिए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की अगुवाई वाले महागठबंधन की ओर से सीटों का ऐलान करने से काफी पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और राज्य के डिप्टी सीएम सुशील मोदी (Sushil Modi) ने कहा था कि 'जितनी ज्यादा सीटों पर राजद लड़ेगी उतनी ही दिलचस्प लड़ाई होगी.' अब ऐसा लग रहा कि बीजेपी की उम्मीद पूरी होती हुई दिखाई दे रही है.

साल 2015 के विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार की अगुवाई वाले महागठबंधन में 101 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली राजद मौजूदा चुनाव में 144 सीटों पर लड़ रही है. इतना ही नहीं महागठबंधन की पार्टियों में सबसे मजबूत राजद अपनी ज्यादातर सीटों पर जद (यू) के खिलाफ लड़ रही है.

77 सीटों पर राजद के उम्मीदवार नीतीश के नेतृत्व वाले जद (यू) के खिलाफ मैदान में हैं. लगभग 30% सीटों पर जेडी (यू) आसान लड़ाई की उम्मीद कर सकती है. इसके ठीक उलट राजद 110 सीटों में से 51 सीटों पर भाजपा के खिलाफ हैं. बाकी 59 पर बीजेपी को आसान जीत की उम्मीद है. पांच राजद प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं और 11 विवेकशील इन्सान पार्टी (वीआईपी) के खिलाफ इलेक्शन लड़ रहे हैं.



राजद ने क्या कहा?
राजद का कहना है कि सीटों के निर्धारण के सामाजिक वास्तविकताओं की जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर टिकट दिए हैं. यह एक मात्र संयोग है कि आखिर में भाजपा को फायदा मिल सकता है. संभव है कि वह एनडीए में सबसे बड़े दल के रूप में उभरे या फिर चुनाव बाद सिंगल लार्जेस्ट पार्टी के तौर पर सामने आए.

राजद के एक नेता ने कहा कि 'तेजस्वी यादव महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार हैं. साथ ही हर सीट का अपना सामाजिक गणित है. कई सीटों पर 2,000 से 5,000 के मार्जिन के साथ इस बार कड़ी लड़ाई होगी.'

दूसरी ओर लोजपा प्रमुख चिराग पासवान भाजपा के उम्मीदवारों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं और नीतीश को साथ लेकर जेडी (यू) की संभावनाओं को कम कर सकते हैं. नीतीश ने भाजपा के कई नेताओं पर नाराजगी जताई है, जिन्होंने लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. उनमें से एक दिनारा से प्रत्याशी राजेंद्र सिंह हैं जिन्हें भाजपा कैडर का समर्थन मिल रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सिंह ने कहा कि 'वे खुद से ऐसा कर रहे होंगे. मैंने किसी को लालच नहीं दिया.'

नीतीश को विश्वास में लेने की कोशिश कर रही बीजेपी!
भाजपा नीतीश को विश्वास में लेने की कोशिश कर रही है कि वह सीएम रहेंगे चाहे जितनी भी सीटें जीतें. बीजेपी पासवान की आलोचना भी कर रही है. साथ ही उन पर भ्रम पैदा करने की कोशिश का आरोप लगा रही है.

जद (यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी का कहना है कि 'वे आरजेडी के गेम प्लान को लेकर चिंतित नहीं हैं. यह तथ्य कि राजद हमें अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में दिखा रहा है कि हम राज्य में राष्ट्रपति शासन के तौर पर भी आगे बढ़ सकते हैं. यह लोगों को तय करना है कि उन्हें नीतीश कुमार चाहिए या नहीं. बाकी बातें अप्रासंगिक है.'
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