Choose Municipal Ward
    CLICK HERE FOR DETAILED RESULTS

    Bihar Election 2020: बीजेपी बार-बार क्यों कह रही- 'नीतीश ही होंगे बिहार के अगले सीएम'?

    Bihar Chunav: पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार की फाइल फोटो
    Bihar Chunav: पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार की फाइल फोटो

    Bihar Election 2020: भारतीय जनता पार्टी (BJP) एकाएक यह संदेश देने में जुट गई है कि सिर्फ नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ही राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे. बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह (Amit shah) से लेकर राज्य इकाई के सुशील मोदी, पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव भी बीते एक हफ्ते से यही कह रहे हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 20, 2020, 10:53 AM IST
    • Share this:
    नई दिल्ली/पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) में मतदान के पहले चरण के लिए सिर्फ 8 दिन बचे हैं. इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) एकाएक यह संदेश देने में जुट गई है कि कोई और नहीं बल्कि सिर्फ नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ही राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर पूर्व अध्यक्ष अमित शाह (Amit shah) तक और राज्य इकाई के सुशील मोदी, पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव भी बीते एक हफ्ते से यही कह रहे हैं कि बीजेपी और जदयू में कौन ज्यादा सीटें हासिल करेगा, इसका कोई मतलब नहीं है. यह पक्का है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के जीतने पर नीतीश कुमार ही बिहार के अगले सीएम होंगे.

    सुशील मोदी ने 16 अक्टूबर को कहा था कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री होंगे, भले ही भाजपा और जदयू के बीच अधिक सीटें किसी की भी हों. 17 अक्टूबर को News18 को दिए एक इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि 'नीतीश कुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे. इसमें लेकिन, किंतु-परंतु नहीं है.' उसी दिन पार्टी के महासचिव भूपेंद्र यादव ने एक ट्वीट में कहा, 'भाजपा बहुत स्पष्ट है, लोजपा हमारे गठबंधन का हिस्सा नहीं है. हम चिराग पासवान को बताना चाहते हैं कि उन्हें भ्रम नहीं पालना चाहिए. भाजपा-जद (यू). चुनाव लड़ रहे हैं और नीतीश कुमार जी मुख्यमंत्री होंगे.'

    LJP का नीतीश के खिलाफ अभियान, मोदी के 'हनुमान'
    लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है. उन्होंने खुद को भाजपा के शीर्ष नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताया. लेकिन भाजपा की ओर से लगातार आ रहे स्पष्टीकरण अपने गठबंधन सहयोगी को दिलासा देने और पार्टी कैडर के बीच जमीनी स्तर पर किसी भी तरह के भ्रम को दूर करने का प्रयास है? पिछले कई वर्षों से बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाले वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक नवल किशोर चौधरी का यही मानना है.
    पटना यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक चौधरी ने कहा कि 'भाजपा के दृष्टिकोण से चिराग पासवान द्वारा तैयार किए गए भ्रम को दूर करना जरूरी था . भ्रम केवल जेडी (यू) के वोटों के लिए एक संभावित खतरा नहीं था, लेकिन एनडीए के वोटों के लिए भी दिक्कत हो सकती थी. कई भाजपा मतदाता ऐसे हो सकते थे जो जमीनी भ्रम की स्थिति में नीतीश के खिलाफ वोट करते. मुझे लगता है कि अमित शाह के बयानों से अब भ्रम समाप्त होना चाहिए और भाजपा और जद (यू) दोनों को मदद करनी चाहिए.'



    किशोर ने कहा - 'अगर अभी भी जमीन पर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, तो नरेंद्र मोदी को रैली में सभी अफवाहों पर पूरी तरह से रोक लगाना चाहिए. उन्होंने कहा कि 'बात यह है कि बीजेपी महाराष्ट्र नहीं दोहराना चाहती और दोनों दलों के बीच अविश्वास के कारण अपने गठबंधन का साथी खो सकती है. भाजपा कई राष्ट्रीय मुद्दों पर दबाव में है. पंजाब में उनके सहयोगी ने भी उन्हें छोड़ दिया है. ऐसे बीजेपी नो रिस्क नो गेन की स्थिति में रहना चाहती है. भाजपा चाहती है कि जो जैसा था वैसा ही बना रहे. इसलिए जैसे-जैसे वे चुनाव में और आगे जाएंगे, भाजपा, नीतीश कुमार के साथ अपना गठबंधन बनाने को मजबूर है.

     'मंशा भ्रम बनाने की है या बढ़ाने की?'
    उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की दलित लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या को लेकर दलित समुदाय के एक वर्ग के गुस्से का सामना करने के बाद बीजेपी भी बैकफुट पर दिख रही है.

    इसी मुद्दे पर सचींद्र नारायण सिंह ने कहा कि 'नीतीश कुमार के जद (यू) की हैसियत कम करने के लिए भाजपा लोजपा और प्लुरल पार्टी की अफवाहों को फैलाया जा रहा है. ये स्पष्टीकरण खुला संदेश हैं. आप वही देखेंगे जो आप देखना चाहते हैं. नारायण ने पूछा- 'कौन कह सकता है कि उनकी मंशा भ्रम बनाने की है या बढ़ाने की.' कहा कि जिस तरह से बीजेपी कहती है कि 'नीतीश अगले सीएम होंगे' से पता चलता है कि वे चुनाव जीतने के प्रति आश्वस्त हैं. अगर ऐसा होता तो वे उनके साथ सहयोगी क्यों थे? मोदी इतनी रैलियां क्यों कर रहे हैं?'

    हालांकि एक सच यह भी है कि बीजेपी अपने सहयोगी दल नीतीश कुमार से दूरी बनाए रखना चाहती है, जो 15 साल की सत्ता विरोधी लहर के साथ-साथ उन प्रवासी मजदूरों का गुस्से का भी सामना कर रहे हैं जो अभी भी गांवों में ही हैं.
    अगली ख़बर

    फोटो

    टॉप स्टोरीज