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COVID-19: लौट रहे प्रवासी मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा, बीमा देने के लिए राज्यों से समझौता करेगा बिहार

महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली से लौटे कई मजदूर बिहार में संक्रमित पाये गये हैं (सांकेतिक फोटो)

महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली से लौटे कई मजदूर बिहार में संक्रमित पाये गये हैं (सांकेतिक फोटो)

सूत्रों का कहना है कि क्वारंटाइन सेंटर्स (Quarantine Centers) में मजदूरों के कौशल के स्तर की जानकारी लेना शुरू कर दिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जायेगा कि राज्य अपने प्रवासियों का एक डेटाबेस तैयार कर सकें. प्रवासियों से फोन नंबर और आधार कार्ड (Aadhar Card) की जानकारी भी देने को कहा गया है.

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    (मारिया शकील, रौनक कुमार गुंजन)
    नई दिल्ली.
    बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर में एक क्वारंटाइन सेंटर (Quarantine Center) में रखे गये प्रवासी मजदूरों से बातचीत करते हुये बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने पूछा, "कहां चले गये थे?" यह उस दौर में स्वागत का प्यार भरा संबोधन माना गया, जब कथित तौर पर मुख्यमंत्री के ऊपर प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) की जरा भी फिक्र न करने का आरोप लग रहे हैं.

    इसी भावना के अनुरूप एक नीति भी अब राज्य ने अपनाई है. प्रवासी कार्यबल, जिसके बारे में जानकारियां साफ नहीं होतीं, उसके लिए बिहार सरकार (Bihar Government), उन्हें रोजगार देने वाले राज्यों के साथ एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए मसौदा तैयार कर रही है. ऐसा इन मजदूरों (Labourer) के उन राज्यों में लौटने को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.

    मई के आखिरी तक बिहार को 30 लाख प्रवासी मजदूरों के लौटने की आशा
    पिछले तीस दिनों से ऐसी ही वीडियो कॉन्फ्रेंस लगातार हो रही हैं. बिहार सरकार के सूत्रों ने बताया कि मई के अंत तक राज्य में 30 लाख प्रवासी मजदूरों के लौटने की आशा है.

    हालांकि अधिकारी जिन्हें इस मसौदे को तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्होंने News18 को बताया, "यह राज्य के मध्यस्थ का रोल निभाने के लिए है, कई राज्यों के प्रमुख सचिव हमारे संपर्क में हैं, जो अपने यहां उद्योगों को इन मजदूरों के लौटे बिना नहीं शुरू कर सकेंगे. राज्य चाहते हैं कि बिहारी प्रवासियों को लेकर स्थिति को औपचारिक तरीके से साथ कर लिया जाये, क्योंकि इन्हीं मजदूरों ने देश के बड़े-बड़े शहर बनाये हैं."

    प्रवासियों से उनके फोन नंबर और आधार कार्ड की जानकारी मांगी गई
    यह MoU प्रवासियों को बीमा, रहने की सुविधाएं और अन्य सामाजिक सुरक्षा की चीजें उपलब्ध करा उनके भी हितों का ध्यान रखेगा. सूत्रों का कहना है कि क्वारंटाइन सेंटर्स में मजदूरों के कौशल के स्तर की जानकारी लेना शुरू कर दिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जायेगा कि राज्य अपने प्रवासियों का एक डेटाबेस तैयार कर ले. यह एक ऐसा काम है, जिसे पहले कभी नहीं किया गया. सूत्रों का कहना है, प्रवासियों से कहा गया है कि वे अपने फोन नंबर और आधार कार्ड की जानकारी भी दें.

    महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली से लौटे मजदूर ज्यादातर संक्रमित
    कम से कम 8 लाख 64 हजार मजदूर राज्य में वापस लौट चुके हैं, जिन्हें पूरे राज्य के 38 जिलों में बनाए गये 11218 क्वारंटाइन सेंटर्स में रखा गया है. राज्य के लिये चिंता की बात यह भी है कि अभी तक हर चार (मजदूर जिनकी जांच हुई) में से एक कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है. बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर मजदूर जो महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली से वापस लौटे हैं, संक्रमित पाये गये हैं.

    राज्य सरकार के प्रमुख अधिकारी ने न्यूज18 से कहा, "क्या स्वास्थ्य का आधारभूत ढांचा केवल बिहार से संबंधित मुद्दा है? तब क्यों सूरत और मुंबई से लौटे ज्यादातर मजदूर टेस्टिंग में पॉजिटिव पाये गये हैं."

    यहां क्लिक करके अंग्रेजी में पढ़ें पूरी रिपोर्ट

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