Exclusive: बिहार ने कैसे पाया कोरोना पर काबू? टीका एक्सप्रेस को लेकर क्या है प्लान; स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जवाब

बिहार में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आ रही है.

बिहार में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आ रही है.

कोरोना जब राज्य में अपने चरम पर था तब सरकारी अस्पतालों की हालात पर नीतीश कुमार की सत्तासीन सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. लॉकडाउन, कोरोना के इंतजाम और अस्पतालों की स्थिति पर न्यूज18 इंडिया ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी नेता मंगल पांडे से बातचीत की.

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नई दिल्ली/पटना. देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस (Coronavirus) की रफ्तार धीरे-धीरे कम हो रही है. अन्य हिस्सों की तरह बिहार में भी कोरोना लॉकडाउन का असर देखने को मिल रहा है. राज्य में जहां प्रतिदिन दर्ज किए जाने वाले संक्रमित मरीजों (Bihar Coronavirus Cases) की संख्या 1500 पर आ गई है. वहीं, रिकवरी दर में भी 96 फीसदी पर पहुंच गया है.

हालांकि कोरोना जब राज्य में अपने चरम पर था तब सरकारी अस्पतालों की हालात पर नीतीश कुमार की सत्तासीन सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. लॉकडाउन, कोरोना के इंतजाम और अस्पतालों की स्थिति पर न्यूज18 इंडिया ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी नेता मंगल पांडे से बातचीत की.

  • बिहार में कोरोना तो अब काबू में आता नज़र आ रहा है, लेकिन मीडिया में राज्य के अस्पतालों की खासकर दरभंगा के सरकारी अस्पतालों की जो तस्वीरें आ रहीं है उस पर क्या कहेंगे?


    कोविड को लेकर बिहार में हालात अब काफी काबू में है. अगर कोई अस्पतालों की हालत के बारे में कोई रिपोर्ट दे रहा है तो मैं इसे सकारात्मक ही लूंगा और कोशिश करूंगा कि जल्दी ही उनकी हालत में सुधार हो. लेकिन हमें ये भी याद रखना चाहिए कि पूरे बिहार ने एकजुट होकर ये लड़ाई लड़ी है और कोरोना की दूसरी लहर पर काबू पाया है. बिहार कोरोना के सक्रिय मामलों वाले राज्यों की सूची में 20वें स्थान पर है. वर्तमान में बिहार में 18,000 सक्रिय मामले हैं. हमसे ऊपर 19 राज्य हैं उनमें से कई तो हमसे बहुत छोटे हैं. जनसंख्या के मामले में बिहार देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है और सक्रिय मामलों में हम 20वें स्थान पर हैं. ये इस बात का सबूत है कि हमने बिहार में कोविड को कैसे नियंत्रित किया है.

  • बिहार गांव-गांव में लोगों को टीका लगाने के लिए 700 वैक्सीनेशन वैन (टीका एक्सप्रेस) चला रहा है, इस प्रयोग के बारे में बताएं?


    टीका एक्सप्रेस के पीछे ये विचार था कि 45+ श्रेणी के जो लोग हैं उन्हें वैक्सीनेशन सेंटर जो कुछ किलोमीटर दूर था, वहां आने में दिक्कत आ रही थी. अगर 50+ की श्रेणी की बात करें तो कई लोगों को पहले से कुछ बीमारियां होती है या 60+ की बात करें तो लोग काफी बुज़ुर्ग हैं. तो टीका एक्सप्रेस उनके गांव पहुंचेगी और उन्हें वैक्सीन लगाएगी. इस वैन में प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद रहता है जो वैक्सीन लगाता है. हमारा उद्देश्य 45+ की श्रेणी में टीकाकरण को बढ़ाना है. हमें इस कैंपेन के अच्छे और सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं. जहां तक युवाओं की बात है जो 18-44 की श्रेणी में आते हैं तो वो वैक्सीनेशन सेंटर पर पहुंच सकते हैं.


  • बिहार में अप्रैल के अंत और शुरुआती मई में कोरोना वायरस के काफी मामले सामने आए थे. आपने हालात पर कैसे काबू पाया?

    हमने टेस्ट की संख्या में बढ़ोतरी की और ट्रीटमेंट का जो प्रोटोकॉल था उसे ठीक से लागू किया. इसके साथ ही हम लगातार ट्रैकिंग करते रहे. हमने अपनी टेस्ट के दायरे को बढ़ाते हुए उसे प्रतिदिन औसत 1 लाख से 1.25 लाख तक किया. हमने अपने किसी भी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी, एक बार अगर कोई मरीज हॉस्पिटल पहुंचा तो उसे ऑक्सीजन की कमी से नहीं जूझना पड़ा. सभी कोविड केंद्रों पर हमने अच्छे इंतज़ामात किये हुए थे और मरीजों के लिए तमाम ज़रूरी दवाएं उपलब्ध करवा कर रखी हुई थी.


  • 18-44 उम्र के समूह के लिए आपके राज्य में वैक्सीन का अभाव कितना रहा ?

    3-4 दिन पहले तक बिहार उन राज्यों में से था जहां 18-44 उम्र वाले समूह के लोगों को ज्यादा वैक्सीन लगाई गई. इस श्रेणी के हम 16 लाख लोगों को वैक्सीन लगा चुके हैं. अगर सप्लाई कम होगी तो स्वाभाविक है कि टीकाकरण में भी कमी आएगी. हमने सीरम इन्स्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक दोनों ही कंपनी को एडवांस में पेमेंट कर चुके हैं. हमारा अनुमान है कि ये अस्थायी दिक्कत है, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी और जैसे ही देश में आने वाले दिनों में वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा तो चीज़े अपने आप ठीक हो जाएंगी. हमने अनुमान लगाया है कि राज्य में जून में वैक्सीनेशन डेढ़ गुणा हो जाएगा.


  • क्या दूसरे राज्यों की तरह आप ग्लोबल टेंडर पर विचार नहीं कर रहे हैं?

    हम इस बारे में नहीं सोच रहे हैं और मुझे बताइए किसी भी राज्य ने ग्लोबल टेंडर किया है और उन्हें कुछ परिणाम हासिल हुआ हो तो.


  • आप तीसरी लहर को लेकर किस तरह की तैयारी कर रहे हैं?

    हमने इसके लिए अच्छे से विचार विमर्श किया है और दूसरी लहर से हमने सीखा है कि हमारे पास पर्याप्त ऑक्सीजन की सप्लाई होनी चाहिए. हमने ऑक्सीजन बनाने, उसकी रिफिलिंग और ट्रांसपोर्टेशन पर ध्यान दिया है. ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट राज्य में पहले से लगाए जा रहे हैं. हम क्रायोजैनिक टैंकर और रिफिलिंग प्लांट को भी बढ़ा रहे हैं. दूसरा मुद्दा मैनपॉवर का है- तो हमने डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को भर्ती करना भी शुरू कर दिया है. तीसरा मुद्दा है हॉस्पिटल में बेड की संख्या और दवा में इज़ाफा करना. तो अगले 2-3 महीनों में हम इसे भी पूरी कर लेंगे.

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