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बिहार में मिली संजीवनी से गदगद माले, बोली- हम और कांग्रेस 50-50 सीटों पर लड़ते तो बेहतर होते नतीजे

बिहार में मिली संजीवनी से गदगद माले, बोली- हम और कांग्रेस 50-50 सीटों पर लड़ते तो बेहतर होते नतीजे

दीपांकर भट्टाचार्य की फाइल फोटो (News18)

दीपांकर भट्टाचार्य की फाइल फोटो (News18)

Bihar Election Results 2020: बिहार 2020 के चुनाव में महागठबंधन में शामिल तीन प्रमुख वाम दलों- भाकपा (माले) (CPI-ML), भाकपा और माकपा को पिछले विधानसभा चुनाव में भाकपा (माले) को तीन सीटें मिली थीं. साल 2010 में भाकपा सिर्फ एक सीट जीती थी.

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    पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election Results 2020) में सीपीआई (एमएल), सीपीआई और सीपीएम ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की है. बंगाल में अगले साल चुनाव से पहले 16 सीटों पर मिली यह जीत वाम दलों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है. इन नतीजों से उत्साहित माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि वाम दलों को खारिज करना गलत साबित हुआ और अगर वामपंथी पार्टियों को बिहार में चुनाव लड़ने के लिए और सीटें मिलती तो वे इससे भी ज्यादा सीटें जीतते.

    येचुरी ने कहा, ‘हमारी शुरुआत से ही स्पष्ट सोच थी कि भाजपा को हराना है. बिहार में हमारा स्ट्राइक रेट 80 फीसदी है. अगर हमें और सीटें मिलतीं तो हम इससे भी ज्यादा सीटें जीतते.’ राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन में शामिल तीन प्रमुख वाम दलों- भाकपा (माले), भाकपा और माकपा- ने कुल 29 सीटों पर चुनाव लड़ा. भाकपा (माले) ने 19, भाकपा ने छह और माकपा ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा था. तीनों दलों को क्रमशः 11, 3 और 2 सीटों पर जीत मिली.

    इस परिणाम पर सीपीआईएमल के जनरल सेक्रेटरी दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि उन्हें महागठबंधन और लेफ्ट में और मजबूत जीत की उम्मीद थी. यह एक ऐसा चुनाव था जिसमें जनता और युवाओं ने अपने मुद्दे गढ़े. इस चुनाव में युवा आगे आया. यह देखना काफी सुखद है कि लोग शिक्षा, नौकरी, और अन्य मूलभूत मुद्दों को आगे बढ़ा रहे हैं. भट्टाचार्य ने कहा कि लॉकडाउन के दौराम हमारे कॉमरेड्स घर-घर गए और लोगों की मदद की. सिर्फ इतना ही नहीं, अगर आप महागठबंधन के 25 पॉइंट चार्टर को देखेंगे तो उसमें भी हमारी मांगों को जगह मिली हुई है. शिक्षकों, स्किल वर्कर्स के आंदोलनों को हम लीड कर रहे थे, ऐसे में इस चुनाव हमारी अहम भूमिका रही.

    यह भी पढ़ें: Bihar Election 2020: लोजपा की एनडीए में वापसी मुश्किल, फ्लॉप शो के बाद आसान नहीं चिराग की राह



    तीसरे फेज में बीजेपी और एनडीए ने संभवतः अच्छा किया
    CPIML जनरल सेक्रेटी ने जीत ना मिलने की वजहों की चर्चा करते हुए कहा कि महागठबंधन को उम्मीद के मुताबिक सीटें ना मिलने का कारण चुनाव का तीसरा फेज हो सकती है, जिसमें सीमांचल इत्यादि इलाकों में चुनाव हुए. बीजेपी ने बहुत ही शातिर किस्म का सांप्रदायिक प्रचार किया हुआ था. इसके साथ ही AIMIM के कारण भी वोटों का बंटवारा हुआ. अगर आप पहले फेज को देखें तो महागठबंधन बहुत आगे था. उदाहरण के लिए पूरा भोजपुर, मगध, महागठबंधन के खाते में आया. लेकिन दूसरे चरण और खास तौर से तीसरे में बीजेपी और एनडीए ने संभवतः अच्छा किया.

    अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्स्प्रेस के अनुसार भट्टाचार्य ने कहा कि  मुझे लगता है कि  हम पहले गठबंधन बना सकते थे और सीट आवंटन अधिक बेहतर हो सकता था. उदाहरण के लिए, वाम दलों और कांग्रेस को कम 50-50 सीटें मिलनी चाहिए थी. यह उचित बंटवारा होता. सीट आवंटन और सब कुछ तय करने में लंबा समय लगा.

    बिहार चुनाव के बाद आगामी चुनावों का जिक्र करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि  पश्चिम बंगाल और असम में वामपंथियों की नंबर एक प्राथमिकता भाजपा को रोकना होना चाहिए. मुझे लगता है कि वाम दलों को बंगाल में एक साथ काम करना होगा. उन्होंने कहा बंगाल में जहां जरूरत होगी वहां तृणमूल कांग्रेस का विरोध होगा लेकिन बीजेपी के खिलाफ हमारा संघर्ष और मजबूत होगा. बीजेपी को देश और बंगाल में लोकतंत्रत का दुश्मन नंबर 1 माना जाना चाहिए.

    Tags: Bihar Election 2020, Cpi, Jdu, Mahagathbandhan, RJD

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