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जब बिपिन रावत ने कहा था... दो बार हेलीकॉप्टर हादसों में बच गया पता नहीं तीसरी बार क्या होगा...

जब बिपिन रावत ने कहा था... दो बार हेलीकॉप्टर हादसों में बच गया पता नहीं तीसरी बार क्या होगा...

सीडीएस बिपिन रावत का हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया है.

सीडीएस बिपिन रावत का हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया है.

Chief of Defense Staff General Bipin Rawat: चार साल बाद रावत की जान हेलीकॉप्टर हादसों में ही चली गई. रावत के काम को लंबे वक्त तक याद रखा जाएगा. भारतीय लड़ाकू विमानों द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट के अंदर घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाये जाने के अभियान में तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष जनरल रावत ने अहम भूमिका निभायी थी

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    नई दिल्ली. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (Chief of Defense Staff General Bipin Rawat) का बुधवार को एक हेलीकॉप्टर हादसे में निधन हो गया. हैरानी की बात ये है कि वो इससे पहले दो बार हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो चुके थे. उन्होंने एक बार कहा था कि भगवान की कृपा रही है कि दो बार उन्हें हादसों में कुछ नहीं हुआ. उन्होंने ये बातें साल 2017 में इंदौर के डेली कॉलेज में हुए एक कार्यक्रम में कही थी.

    हिंदी अखबार राजस्थान पत्रिका के मुताबिक दिसंबर 2017 में बिपिन रावत इंदौर के डेली कॉलेज आए थे. वो कॉलेज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे. इसी दौरान यहां के प्रिसिंपल नीरज कुमार बधौतिया को उन्होंने बाताया था कि वो दो बार हेलीकॉप्टर हादसे में बच चुके हैं. उन्होंने ये भी कहा था कि हर बार भगवान की कृपा रही वरना पता नहीं क्या होता. इन बातों का ज़िक्र करने के चार साल बाद रावत की जान हेलीकॉप्टर हादसों में ही चली गई.

    छात्रों से शेयर किया अनुभव
    अखबार के मुताबिक सीडीएस बिपिन रावत ने छात्रों को देशसेवा के लिए खासा प्रेरित किया. उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता के मूलमंत्र भी बताए थे. उन्होंने तीन बातों पर सबसे ज्यादा जोर दिया था—देश सबसे पहले, असफलता देती है ताकत और रास्ता कठिन हो और सही हो तो उसे ही चुने. उन्होंने छात्रों से कहा था कि हमेशा उन्हें सबसे पहले देश के बारे में सोचना चाहिए.

    दूर की सोचते थे बिपिन रावत
    बता दें कि बिपिन रावत के काम को लंबे वक्त तक याद रखा जाएगा. साल 2016 और 2019 के बीच वो सेना प्रमुख थे, तब उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के लिए ”त्वरित कार्रवाई” की नीति का पुरजोर समर्थन किया था. साल 2017 में डोकलाम गतिरोध से बहुत पहले ही जनरल रावत ने इस बात पर प्रकाश डाला था कि चीन से भारत के सामने सुरक्षा चुनौती सामने आएगी और भारत को इसका सामना करने के लिए अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता है.

    पाकिस्तान में घुसकर हमला
    भारतीय लड़ाकू विमानों द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट के अंदर घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाये जाने के अभियान में तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष जनरल रावत ने अहम भूमिका निभायी थी और उन्होंने अभियान के लिए महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रदान की थीं. सीडीएस के रूप में नियुक्त होने वाले पहले सेनाध्यक्ष जनरल रावत का चार दशकों में एक शानदार करियर रहा, जिसके दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर सहित कई संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में गौरव के साथ काम किया.

    Tags: Bipin Rawat, Cds bipin rawat death

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