Birthday Jagjivan Ram : क्यों राजीव गांधी की जीत से खुश नहीं थे जगजीवन राम

जगजीवन राम (फाइल फोटो)

जगजीवन राम को जवाहरलाल नेहरू ने अपनी सरकार में सबसे युवा मंत्री बनाया था. बाद में उन्होंने कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया लेकिन फिर आपातकाल के दौरान कांग्रेस से अलग हो गए. आज यानि 05 अप्रैल को उनका जन्मदिन है.

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    जगजीवन राम का आज यानि 05 अप्रैल को जन्मदिन है. वो कांग्रेस के ऐसे नेता थे, जिन्हें पहली बार जवाहरलाल नेहरू ने 1946 अपनी अंतरिम सरकार में मंत्री बनाया था. उसके बाद से वो लगातार मंत्री बने रहे. आपातकाल के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी. वो जनता पार्टी में चले गए. फिर जनता पार्टी की मोरारजी सरकार में मंत्री भी बने. उसके बाद वो कभी कांग्रेस में नहीं लौटे बल्कि उसके प्रबल विरोधी भी हो गए.

    31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की हत्या के बाद कांग्रेस के नेतृत्व ने आपाधापी में राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) को प्रधानमंत्री बना दिया. राजीव गांधी के पास तक कोई राजनीतिक अनुभव नहीं था लेकिन वो रातोंरात देश की सबसे ताकतवर राजनीतिक कुर्सी पर काबिज हो चुके थे. नवंबर महीने से चुनाव प्रचार की शुरुआत हो गई और राजीव गांधी की अगुवाई में कांग्रेस ने जोर-शोर से प्रचार किया. 24, 27 और 28 दिसंबर को लोकसभा चुनाव देशभर में संपन्न हुए जब नतीजे आए तो कांग्रेस की प्रचंड जीत हुई. लेकिन एक पूर्व कांग्रेसी और दिग्गज नेता खुश नहीं थे. वो थे जगजीवन राम. लेकिन ऐसा क्यों था?

    'नेहरू के दिखाए रास्ते से भटक गई थीं इंदिरा गांधी'
    वकील और संविधान विशेषज्ञ एजी नूरानी ने अपने एक लेख में इस घटना का जिक्र किया है. उन्होंने लेख में इंदिरा गांधी की सरकार में बहुसंख्यक समुदाय के बीच असुरक्षा पनपाने की बात लिखी है. नूरानी ने लिखा है कि इंदिरा गांधी ने अपने पिता जवाहर लाल नेहरू के रास्ते अलग रुख अख्तियार किया था. इसी के आधार पर उन्होंने 1984 के लोकसभा चुनाव की रणनीति भी तैयार की थी. उसी साल पंजाब में खालसा आतंकियों पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की थी. लेकिन चुनाव के ऐन पहले उनकी हत्या हो गई. उनकी हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे हुए. फिर चुनावी कमान उनके बेटे राजीव गांधी के हाथों में थी.

    आपातकाल के दौरान पहले तो जगजीवन राम ने इंदिरा गांधी का साथ दिया लेकिन आपातकाल हटते ही उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देकर जनता पार्टी की सदस्यता ले ली.


    जब चुनाव के नतीजे आए तो जगजीवन राम ने चिल्लाकर कहा था-ये वोटिंग हिंदू भारत के लिए हुई है. उनका आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस की तरफ से आनंदपुर साहिब रिजोल्यूशन और मुस्लिमों के खिलाफ भाषण दिया गया. हालांकि जगजीवन राम का कहना था कि मुस्लिमों ने कांग्रेस को वोट इसलिए दिया क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं मौजूद था.

    नेहरू की अंतरिम सरकार में सबसे युवा मंत्री
    राजीव गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस की 1984 की लोकसभा जीत भारत के चुनावी इतिहास में ऐतिहासिक है लेकिन जगजीवन राम जैसे पुराने कांग्रेसी दिग्गज इसे पचा नहीं पाए. 5 अप्रैल 1908 को भोजपुर के दलित परिवार में पैदा हुए जगजीवन राम को 1946 में 1जवाहर लाल नेहरू ने अपनी अंतरिम सरकार में मंत्री बनाया था. वो सबसे कम उम्र के मंत्री थे. उन्हें श्रम मंत्री बनाया गया था. संविधान सभा का हिस्सा रहे जगजीवन राम को भारत के उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता है जिन्होंने दलित और पिछड़ों के आजीवन प्रयास किए. आजादी के बाद केंद्र की कांग्रेसी सरकारों में वो लगातार मंत्री रहे.

    1971 में जब भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में बुरी तरह हराया था तब जगजीवन राम देश के रक्षा मंत्री थे. यही नहीं देश के कृषि मंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल आज भी याद किया जाता है. भारत में हरित क्रांति लाने में उनके योगदान की आज भी प्रशंसा की जाती है. लेकिन जवाहर लाल नेहरू के खास रहे जगजीवन राम की 1970 के दशक में इंदिरा गांधी के साथ अनबन हो गई थी. भले ही उन्होंने कांग्रेसी नेता के तौर पर इमरजेंसी का समर्थन किया हो लेकिन इमरजेंसी के बाद कांग्रेस से नाता तोड़ लिया.

    1991 में भारत सरकार ने जगजीवन राम पर डाक टिकट जारी किया था.


    इमरजेंसी के बाद छोड़ दी थी कांग्रेस
    1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनावों में उन्होंने अपनी पार्टी कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी बनाकर जनता पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था. चुनावी जीत के बाद वो मोरार जी देसाई सरकार में देश के उपप्रधानमंत्री रहे. फिर 1979 में मोराजी की सरकार गिराकर चौधरी चरण सिंह देश के प्रधानमंत्री बन गए. जगजीवन राम ने इसी साल नई पार्टी कांग्रेस (जगजीवन) का गठन किया. 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में भले ही इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बन गईं लेकिन जगजीवन राम फिर कांग्रेस में नहीं गए.

    इंदिरा सरकार के मुखर आलोचक
    1980 में आई इंदिरा सरकार में वो लगातार सरकार के गलत कदमों की विरोध करते रहे. जगजीवन राम का मानना था कि इंदिरा गांधी ने कांग्रेस का स्वरूप बदल दिया है. यही कारण है कि 1984 के चुनावी नतीजों को उन्हें सांप्रदायिक नतीजा बताया था. 1986 में जगजीवन राम की मृत्यु हुई थी तब भी वो अपनी पार्टी का कामकाज देख रहे थे. हालांकि जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार अभी कांग्रेस की नेता है. यूपीए सरकार के दौरान वो लोकसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रहीं.

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