जन्मदिन विशेष: जंग लगी गाड़ी को रफ्तार दे रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जन्मदिन विशेष: जंग लगी गाड़ी को रफ्तार दे रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
पीएम नरेंद्र मोदी गुरुवार को 70वां जन्मदिन मना रहे हैं.

PM Narendra Modi Birthday: पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) कोरोना काल के बाद की सभी को वर्चुअल ज़िन्दगी का रास्ता दिखाने मे लगे हैं. पीएम मोदी की यही खूबी है कि वो हर रोज़ प्रयोग करते रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 17, 2020, 10:17 AM IST
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नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी  (Pm Narendra Modi) 17 सितंबर को 70 साल के हो गए. बतौर प्रचारक शुरू कर पीएम के पद तक पहुंचना और जीवन के 5 दशक जन सेवा में निकलना किसी के लिए भी आसान काम नहीं होता और वो भी उसी जोश से जिस से अपना मिशन शुरू किया था. पूरी की पूरी बीजेपी मानों उन्हीं के कंधों के सहारे दिन ब दिन मजबूत होती जा रही है. रिकॉर्ड भी गिनाने के लिए भरे पड़े है लेकिन सादगी पसन्द पीएम मोदी ने 2014 में ही साफ कर दिया था कि कोई धूम धड़ाका नहीं होगा. इस लिए हर साल की भांति इस साल भी बीजेपी अधयक्ष जेपी नड्डा ने 14 से 20 सितंबर तक सेवा सप्ताह मनाने का ऐलान कर दिया.

सेवा और विकास ऐसे शब्द हैं जो पीएम की सामान्य बोल चाल में ही समाहित हो गए है. सूत्र बताते हैं कि चौबीसों घंटे सातों दिन पीएम मोदी यही सोंचते रहते हैं कि कैसे शोषित और वंचित समाज को आगे बढ़ाया जाए. कैसे आखिरी गांव तक बिजली पहुचे. उनके 70वें जन्मदिन के मौके पर देश भर में सेवा सप्ताह आयोजित हो रहा है. इसमे बूथ से लेकर जिला स्तर के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं. पीएम मोदी जानते हैं कि इससे बीजेपी कार्यकर्ता तो हरकत में आते ही हैं बल्कि बूथ स्तर तक पार्टी मजबूत हो जाती है. पीएम मोदी के व्यक्तित्व का मूल्यांकन करने लगे तो साबित हो जाएगा कि ये सख्शियत जरा हट के है. कम से कम 2 दशकों से ज्यादा उनका राजनीतिक सफर देखने के बाद यही कह सकता हूँ कि बंदे में दम है और कुछ करने की इच्छाशक्ति. इस लिए थोड़ी उनकी खूबियों के बारे में बताता हूं.

पारिवारिक मूल्यों के प्रति निष्ठा
बतौर मुख्यमंत्री भी नरेंद्र मोदी के जन्मदिन की शुरुआत होती थी अपनी मां हीराबा के आशीर्वाद से. साल 2013 में जब बीजेपी ने उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया, उस जन्मदिन पर उनहे अपनी मां के आर्शीवाद के साथ साथ तोहफे में एक गीता भी मिली थी. पिछले साल अपने 69वें जन्मदिन के मौके पर भी वो गांधीनगर में थे और मां का आशीर्वाद लिया था. ये दिखाता है कि पारिवारिक मूल्यों से उनका नाता नहीं छूटा है. यही नहीं कोई भी उनके परिवार का व्यक्ति उनके नाम पर फायदा नही उठा पाया है. ना ही पीएम मोदी ने अपने परिवार को आगे बढ़ाया है.
वक्त और नियमों के पाबंद


अब तो सबकी समझ में आने लगा है कि लेट लतीफी और नियम कायदों का पालन न करने वालों को जवाब देना भारी पड़ता है. खुद पीएम मोदी वक़्त के इतने पाबंद है कि अगर दिन में 5 रैलियां करनी हो या फिर दसियों बैठके, वो कभी लेट नही करते. स्वर्गीय पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक कार्यक्रम में कहा था कि जब वो वाजपेयी सरकार में मंत्री थे तब वो 6 बजे मंत्रालय से निकल जाते थे और फिर आइआईसी में कॉफ़ी पीने के बाद ही घर पहुंच जाते थे. लेकिन अब फर्क ये है कि सभी मंत्री देर रात तक अपने कार्यालयों मे काम करते मिल जाते हैं.

मंत्री बनने का मतलब ये नही की आप सुरक्षित जोन में है
पीएम मोदी ने साफ कर दिया था की मंत्री बनाने का ये मतलब नही की आप दिल्ली में बैठ कर राज करोगे. अब पार्टी तय करने लगा कि की किस मंत्री की कहाँ ड्यूटी लगेगी. छुट्टियां बिताने विदेश जाने का दौर समाप्त हो गया. अब तो सप्ताह के अंत में मंत्रियों को भी पार्टी का काम करना पड़ रहा है .

नौकरशाहों को काबू में किया
पीएम मोदी ने हमेशा कहा है कि जब वो पहली बार सीएम बने तो उन्हें अधिकारियों से बड़ा डर लगता था. लेकिन धीरे धीरे वो काबू में आ गए और उनके एजेंडा पर चलना भी शुरु कर दिया. जब पीएम पद की शपथ ली तो साफ था कि एजेंडा नौकर शाह नहीं सरकार ही तय करेगी. 31 देसMबेर 2014 को पीएम मोदी ने सभी विभागों के सव्हीवों की बैठक बुला.ली. जब दुनिया पेटी की टिहरी कर रही थी, तब विकास के लिए नए आईडिया पर चर्चा हो रही थी. संदेश साफ था. बड़े बड़े ऑफिसर्स का समय पर आफिस आना और 24/7 काम करना ये दर्शाता है कि अब स्थितियां बदल रही हैं. प्रगति की बैठकों से राज्यों के आला अधिकारियों से सीधा संवाद और इनफॉर्मल तरीके से सभी अधिकारियों से मुलाकाते, नए अधिकारियों की ट्रेनिंग मे बदलाव, अब पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि नैकरशाही भी जन सेवा ही रहेगी.

नए गैजेट्स के लिए जिज्ञासा और इस्तेमाल
मुझे याद है साल 2002 का विधान सभा चुनाव तब मुझे उनसे मिलने और सीएम मोदी के प्रचार को कवर करने का मौका मिला था. सुबह से मैं उनके साथ हेलीकाप्टर में था. वडोदरा से डांग के सफर के दौरान उन्होंने अपनी जेब से कुछ निकाला. साथ कि सीट पर मैं बैठा था. देखा तो एक स्क्रीन जैसा छोटा गैजेट था. उसमें पेन्सिलनुमा चीज से थोड़ी लिखने जैसी मूवमेंट की. फिर उससे फ़ोन की तरह कान पर लगा लिया और बात करते रहे. तब तो बड़े बड़े मोबाइल फोन का जमाना था. और ये तो अनूठी चीज ही थी मेरे लिए.

 गाड़ी को रफ्तार देने में लगे हैं पीएम मोदी
टाइपराइटर के दौर की बीजेपी में जब वो दिल्ली आए तो मेल और मोबाइल तो चलन में ला ही दिया था. इसलिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल और सेल्फी का जुनून जो पूरे देश में फैला वो पीएम मोदी की देन ही कह सकते हैं. अब मोदी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फॉलो किये जाने वाले राजनेता है. ये साबित करता है कि वक़्त के साथ टेक्नोलॉजी बदली तो उसके इस्तेमाल में वो पीछे नही रहे.

पीएम मोदी देश वासियों को कोरोना काल के बाद की वर्चुअल ज़िन्दगी का रास्ता दिखाने मे लगे हैं. पीएम मोदी की यही खूबी है कि वो हर रोज़ प्रयोग करते रहे हैं. पीएम मोदी ने एक जंग लग रही गाड़ी को गैराज से बाहर निकल कर स्टार्ट कर दिया है. मोदी 2.0 में इसी गाड़ी को रफ्तार देने में लगे हैं.
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